प्रतिवर्ष 10 लाख का कारोबार

Updated at : 26 Oct 2016 12:36 AM (IST)
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प्रतिवर्ष 10 लाख का कारोबार

खलारी : खलारी में बनी लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां केवल खलारी व आसपास के बाजारों में ही नहीं, बल्कि राजधानी रांची के बाजार में भी उपलब्ध होंगी. ये मूर्तियां खलारी के जेहलीटांड़ में रहनेवाले कुम्हारों ने बनायी है. जेहलीटांड़ में करीब डेढ़ दर्जन कुम्हार परिवार रहते हैं. इनमें लक्ष्मी-गणेश की सर्वाधिक मूर्तियां बनानेवाले हरि […]

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खलारी : खलारी में बनी लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां केवल खलारी व आसपास के बाजारों में ही नहीं, बल्कि राजधानी रांची के बाजार में भी उपलब्ध होंगी. ये मूर्तियां खलारी के जेहलीटांड़ में रहनेवाले कुम्हारों ने बनायी है. जेहलीटांड़ में करीब डेढ़ दर्जन कुम्हार परिवार रहते हैं. इनमें लक्ष्मी-गणेश की सर्वाधिक मूर्तियां बनानेवाले हरि प्रजापति हैं. रांची के मूर्ति व्यवसायी केवल हरि से छह हजार लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीद कर ले गये हैं. वे बताते हैं कि जेहलीटांड़ कुम्हार बस्ती में इस वर्ष करीब 20 हजार लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बनायी गयी हैं.
खुदरा बाजार में ये मूर्तियां 50 रुपये से लेकर 600 रुपये तक उपलब्ध होंगी. जेहलीटांड़ कुम्हार बस्ती में केवल दीवाली के अवसर पर मूर्तियां, दीये, व मिट्टी के अन्य सामान का करीब 10 लाख रुपये का कारोबार होता है. हरि के अलावे प्रमोद, मनोज, बसंत आदि ने भी मूर्तियां बनायी हैं. प्रमोद प्रजापति ज्यादातर बड़ी मूर्तियां बनाते हैं.
दीपावली बाजार के लिए वे मां काली की मूर्तियां बना रहे हैं. हरि बताते हैं कि उन्होंने डेढ़ से दो महीने की मेहनत में मूर्तियों को बनाया है. मूर्तियों को गढ़ने से लेकर रंग-रोगन मोतियों से जड़ने, मुकुट, वस्त्र आदि पहनाने में इन कुम्हारों के पूरे परिवार का योगदान होता है. खास कर परिवार की बेटियों की अहम भूमिका होती है. साज-सज्जा का सामान उन्होंने कोलकाता से खरीदा है. स्थानीय स्तर पर कुछ रंग की खरीदारी की गयी है.
हरि बताते हैं कि बैंक ऑफ इंडिया की खलारी शाखाने ऋण तो दिया है, लेकिन अपेक्षा से कम है. हरि बिजली चालित चाक का भी इस्तेमाल करते हैं. जिसे इन्होंने जुगाड़ से बनाया है. लेकिन जेहलीटांड़ में ट्रांसफारमर नहीं होने से लो वोल्टेज की समस्या रहती है. इन मूर्तिकारों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन तथा आर्थिक सहायता की अपेक्षा है.
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