झारखंड : छह गांवों में की गयी पत्थलगड़ी, सबने कहा, यह हमारा संवैधानिक अधिकार

Updated at : 26 Feb 2018 6:45 AM (IST)
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झारखंड : छह गांवों में की गयी पत्थलगड़ी, सबने कहा, यह हमारा संवैधानिक अधिकार

II मनोज जायसवाल II खूंटी : खूंटी के अड़की के बहंबा, सिजुड़ी, कोचांग, साके, तुसूंगा व तोतकेरा गांव में रविवार को पत्थलगड़ी की गयी. इस अवसर पर कोचांग में संयुक्त रूप से आमसभा का आयोजन किया गया. सभा को संबोधित करते हुए डॉ जोसेफ पूर्ति ने कहा : आदिवासियों का पत्थलगड़ी कार्यक्रम पूर्व से चला […]

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II मनोज जायसवाल II
खूंटी : खूंटी के अड़की के बहंबा, सिजुड़ी, कोचांग, साके, तुसूंगा व तोतकेरा गांव में रविवार को पत्थलगड़ी की गयी. इस अवसर पर कोचांग में संयुक्त रूप से आमसभा का आयोजन किया गया. सभा को संबोधित करते हुए डॉ जोसेफ पूर्ति ने कहा : आदिवासियों का पत्थलगड़ी कार्यक्रम पूर्व से चला आ रहा है. इसका उद्देश्य संविधान का अनुपालन करना है. हम लोग ग्राम सभा को सशक्त बताते हुए आदिवासियों को बता रहे हैं कि उनका क्या अधिकार है. पत्थलगड़ी का कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है.
सरकार कह रही है कि यह गलत है. पर संविधान की पांचवीं अनुसूची, भारत शासन अधिनियम आर्टिकल 51 व 92 में इसका उल्लेख है.
इसमें स्पष्ट है कि आंशिक वर्जित क्षेत्र में अलग ही नियम व कानून है. लेकिन सरकार ने संघ राज्य क्षेत्र के सामान्य कानून को लाकर इधर रख दिया है. देश आदिवासियों का है. जमीन अधिग्रहण व विस्थापन के कारण आदिवासियों के साथ हमेशा अन्याय होता आया है. इसी कारण देश में आदिवासी मिटते जा रहे हैं. पत्थलगड़ी कर हम अपनी व्यवस्था व अधिकार को जानने का प्रयास कर रहे हैं.
उन्होंने कहा : पत्थलगड़ी संवैधानिक है. संविधान आदिवासियों का है. संविधान का अनुपालन गैर आदिवासियों को करना होगा. इसे साकार करने के लिए देश भर में पत्थलगड़ी को युद्ध स्तर पर किया जा रहा है. सीएनटी एक्ट की दफा दो को विलोपित कर दिया गया है.
किसी भी एक्ट में संशोधन आदिवासियों की इजाजत के बिना गैर कानूनी है. कार्यक्रम में बिरसा मुंडा, जेजे तिड़ू, गुलशन तिड़ू, बलराम समद ने कहा : सरकार संविधान का पालन नहीं कर रही है. लोकसभा और विधानसभा से ऊपर ग्राम सभा है. ग्राम सभा का निर्णय अंतिम है. सरकार ग्राम सभा का हक छीनने का काम कर रही है. शंकर महली ने कहा : आदिवासियों के हित के लिए टीएसी बना है. इसमें आदिवासी विधायक, मंत्री व अन्य रहते हैं. पर वर्तमान में रघुवर दास ने टीएसी को हाइजेक कर लिया है.
पत्थलगड़ी पर पक्ष में तर्क
पांचवीं अनुसूची के तहत हम अपना अधिकार मांग रहे हैं
दो सरकार आपने सुने होंगे, एक तीसरी सरकार भी है. तीसरी सरकार आपकी मदद करेगी
तीन वर्ष इंतजार करें, सब ठीक होगा. गांव में करोड़ों रुपये आयेंगे
बच्चों को सरकारी स्कूल-कॉलेज में न भेजें. सरकारी सुविधाएं न लें
वर्तमान स्वरूप में पत्थलगड़ी न करनेवाले ग्रामीणों ने कहा
बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे, तो फिर कैसे पढ़ेंगे?
सरकारी योजना नहीं लेंगे, तो हमारी मदद कौन करेगा ?
गांव में पैसे कौन सरकार देगी ?
पत्थलगड़ी का पुराना स्वरूप ठीक
20 से 22 गांव के ग्राम प्रधान की हुई बैठक, बोले
हमारे गांव में पत्थलगड़ी नहीं हो रही है. हमारे यहां भी ग्राम सभा है. सप्ताह में एक बार बैठक होती है. इसमें हड़िया शराब कैसे खत्म हो, खेती-बारी कैसे हो, इस पर चर्चा होती है. अड़की के कुछ गांव में पत्थलगड़ी हो रही है. बाहर से आकर लोग गांव के लोगों को गुमराह कर रहे हैं. सरकार की योजना नहीं लेंगे, तो विकास कैसे होगा. विकास को लेकर कोई तर्क नहीं दिया जाता है़
– सैनाथ सिंह मुंडा, ग्राम प्रधान बारूबेड़ा
हमारे गांव में पत्थलगड़ी नहीं हुई है. इसका वर्तमान स्वरूप ठीक नहीं है.अगर हमलोग सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं लेंगे, तो आदिकाल में रहने जैसी स्थिति में पहुंच जायेंगे. हमारे गांव के आसपास के गांव में भी पत्थलगड़ी नहीं हुई है. गांव में प्रवेश निषेध की बात भी गलत है. हमलोग भी पढ़े लिखे हैं. कहीं नहीं लिखा है कि बाहरी लोगों को प्रवेश नहीं करने देंगे.
– सागर मुंडा, ग्राम प्रधान एवं मुंडा चीरूडीह
कुछ जगह पर जिस तरह से पत्थलगड़ी हो रही है, उसका उद्देश्य नहीं समझ पा रहे हैं. लाभ तो अभी नहीं दिख रहा है. आदिवासी कम पढ़े लिखे हैं. संविधान की जानकारी नहीं है. ऐसे में कैसे पता चलेगा कि संविधान के नाम पर जो लिख रहे हैं, वह सही है या गलत? बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे, सरकारी योजना का लाभ नहीं लेंगे, तो कैसे बढ़ेंगे?
– बुंदीराम मुंडा, सेरेंगहातू
पत्थलगड़ी तो हमारी परंपरा है. पर अभी जो लोग पत्थलगड़ी कर रहे हैं, वे गलत तरीके से कर रहे हैं. हम अपने गांव में यह नहीं होने देंगे. हमारी हूंठ पंचायत में यह नहीं हुआ है. पत्थलगड़ी के लिए जो बैठक हो रही है, उसमें लोगों को प्रलोभन दिया जा रहा है. कहते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं लेंगे. यह भी कहते हैं कि हर गांव में पांच करोड़ रुपये आयेगा.
– जितेंद्र सिंह मुंडा, ग्राम प्रधान, सेरेंगहातू
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