जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए झारखंड में फिर एक ‘हूल क्रांति’ की जरूरत, बोले पूर्व सीएम चंपाई सोरेन

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लोगों को संबोधित करते पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन

Hul Diwas: हूल दिवस के मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए झारखंड में फिर एक ‘हूल क्रांति’ की जरूरत है. उन्होंने सिदो-कान्हू के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा और युवाओं से उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया. पूरी खबर नीचे पढ़ें…

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जामताड़ा से उमेश कुमार
Hul Diwas: हूल दिवस के अवसर पर जामताड़ा प्रखंड के अमलाबनी रामपुर चौक स्थित सिदो-कान्हू चौक में आयोजित समारोह में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कहा कि आदिवासी और मूलवासी समाज के अस्तित्व तथा जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए आज झारखंड में एक और ‘हूल क्रांति’ की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि संताल परगना से लेकर पूरे राज्य में आदिवासियों की जमीनों पर लगातार अवैध कब्जे हो रहे हैं, लेकिन मौजूदा गठबंधन सरकार सत्ता के नशे में चूर होकर मूकदर्शक बनी हुई है.

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हूल दिवस कार्यक्रम पर सरकार ने लगा दी रोक

उन्होंने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि वीर शहीद सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, चांद मुर्मू, भैरव मुर्मू, फूलो मुर्मू और झानो मुर्मू की जन्मभूमि भोगनाडीह में ग्रामीणों द्वारा आयोजित कार्यक्रम को सरकार ने रोक दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में तब्दील कर 51 मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं. सरकार जनता में भय का माहौल बनाकर हूल दिवस के गौरवशाली इतिहास को दबाना चाहती है.

15000 एकड़ से अधिक आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जा

चंपई सोरेन ने कहा कि इसी भोगनाडीह से अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका गया था, जिसके परिणामस्वरूप संताल परगना की पहचान बनी और संथाल परगना टेनेसी एक्ट (SPT Act) अस्तित्व में आया. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद भी एसपीटी एक्ट को सख्ती से लागू नहीं किया गया. इसका परिणाम यह है कि आदिवासी समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है. उन्होंने दावा किया कि केवल पाकुड़ जिले में 15 हजार एकड़ से अधिक आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जा हो चुका है, जबकि पूरे संताल परगना और राज्य में यही स्थिति बनी हुई है.

रिम्स-2 के लिए जबरन जमीन घेराबंदी का आरोप

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रिम्स-2 परियोजना के लिए नगड़ी क्षेत्र में बिना ग्रामसभा की अनुमति के जबरन जमीन घेराबंदी की जा रही है. कहा कि आदिवासियों की हड़पी गई एक-एक इंच जमीन वापस ली जाएगी. उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने तीर-धनुष के बल पर ब्रिटिश हुकूमत को झुकने पर मजबूर किया था और अब जनता लोकतांत्रिक तरीके से अन्याय का जवाब देगी. इससे पूर्व आदिवासी सवता सुसार अखाड़ा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि चंपाई सोरेन ने सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की.

इसके बाद ग्रामीणों ने आदिवासी परंपरा के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया.कार्यक्रम में मंगल सोरेन, उत्तम हेम्ब्रम, सोनमुनि हेम्ब्रम, बीता हांसदा, सुनील हांसदा, मुखिया निर्मला सोरेन, दारा सिंह हेम्ब्रम, लालेश हेम्ब्रम, अर्जुन सोरेन, सुखेंद्र टुडू समेत अन्य ग्रामीण उपस्थित थे.

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