नेपाल बाढ़ से बचकर आये बशीरहाट के दंपती ने सुनायी आपबीती, कहा- पानी का पहाड़ देख लगा अब नहीं बचेंगे

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काठमांडू से सुरक्षित लौटे अनुकूल पोद्दार और उनकी पत्नी रेवा पोद्दार. फोटो : प्रभात खबर

बशीरहाट के रहने वाले अनुकूल पोद्दार और उनकी पत्नी रेबा पोद्दार ने नेपाल की विनाशकारी बाढ़ का अनुभव सुनाया. वे कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर थे जब बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया. चालक की सूझबूझ और किस्मत ने उन्हें मौत के मुंह से वापस लौटाया.

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बशीरहाट से मनोरंजन सिंह की रिपोर्ट

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मन में बाबा कैलाश और मानसरोवर के दर्शन की आस लिए घर से निकले थे, लेकिन रास्ते में मौत इंतजार कर रही थी. नेपाल में आयी प्रलयकारी बाढ़ में फंसकर बशीरहाट के एक दंपती ने मौत को बेहद करीब से देखा. आंखों के सामने पानी का पहाड़ आता देख उन्हें लगा कि अब बचना मुश्किल है. किस्मत और चालक की सूझबूझ से दोनों सुरक्षित घर लौट आये हैं, लेकिन नेपाल के उस भयावह मंजर को याद कर अब भी उनकी आंखें भर आती हैं.

बशीरहाट के काछारीपाड़ा के रहने वाले हैं अनुकूल पोद्दार

बशीरहाट नगरपालिका के वार्ड- 7 के काछारीपाड़ा इलाके के निवासी पूर्व शिक्षक अनुकूल पोद्दार और उनकी पत्नी रेबा पोद्दार नेपाल में आयी तबाही को याद कर सिहर उठते हैं. पोद्दार दंपती ने बताया, “जल का पहाड़ देखकर लगा अब नहीं बचेंगे. मरना तय था, लेकिन ड्राइवर भगवान बनकर आया और जान बच गयी.” मौत के मुंह से लौटे दंपती ने रविवार को अपनी आपबीती सुनायी.

चारों ओर दिख रहा था पानी का सैलाब

अनुकूल पोद्दार और उनकी पत्नी रेबा पोद्दार मानसरोवर और कैलाश दर्शन के लिए निकले थे. उन्हें इमिग्रेशन सेंटर तक पहुंचना था. रास्ते में ही महाप्रलय की खबर मिली. अनुकूल पोद्दार ने बताया कि पहले उन्हें अंदाजा नहीं था कि स्थिति इतनी भयावह हो सकती है. बाद में जो देखा, उससे उनकी रूह कांप गयी. चारों तरफ पानी का सैलाब था और पहाड़ जैसा पानी तेजी से बहता हुआ आ रहा था.

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21 अगस्त को ट्रैवल एजेंसी के साथ निकले थे मानसरोवर यात्रा पर

उन्होंने बताया कि यदि चालक ने सूझ-बूझ नहीं दिखायी होती, तो शायद वे सुरक्षित नहीं लौट पाते. अनुकूल पोद्दार ने बताया कि 21 अगस्त को वे लोग एक ट्रैवल एजेंसी के साथ मानसरोवर यात्रा पर निकले थे. आपदा वाले दिन 26 अगस्त की सुबह उन्होंने काठमांडू से आगे की यात्रा शुरू की थी. दंपती के मुताबिक, उस दिन एक गाड़ी में बंगाल के पर्यटक और दूसरी गाड़ी में दक्षिण भारत के परिवार सवार थे. दोनों गाड़ियों में कुल 52 लोग थे. इनमें बंगाल के 22 पर्यटक शामिल थे. आगे बढ़ने के दौरान चालक ने दूर पहाड़ से तेजी से नीचे उतरता पानी देखा.

ड्राइवर ने तुरंत गाड़ी मोड़ी और पहाड़ की तरफ ले गया

कुछ ही देर में अफरा-तफरी मच गयी. बच्चे डर के मारे रोने लगे और लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे. स्थिति को भांपते हुए चालक ने तुरंत गाड़ी मोड़ी और सड़क से पहाड़ की तरफ सुरक्षित दूरी पर ले जाकर रोक दी. कुछ देर बाद टूर मैनेजर का फोन आया. बताया गया कि इमिग्रेशन कार्यालय जाने वाला पुल हड़पाबान में बह गया है. इसके बाद सभी लोग वापस काठमांडू लौट आये.

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29 अगस्त को रक्सौल पहुंचा दंपती

जब तबाही की तस्वीर सामने आयी, तो दंपती को एहसास हुआ कि वे कितनी बड़ी आपदा से बाल-बाल बचे हैं. अनुकूल पोद्दार ने बताया कि 26 और 27 अगस्त को दो दिनों तक वे लोग कुछ परेशानी में रहे. इसके बाद काठमांडू से बीरगंज पहुंचे और वहां से 29 अगस्त को रक्सौल आये. फिर रक्सौल से ट्रेन पकड़कर रविवार तड़के हावड़ा स्टेशन पहुंचे.

बशीरहाट थाने की पुलिस ने हावड़ा स्टेशन पर किया रिसीव

दंपती को लेने के लिए बशीरहाट थाने के आइसी समेत पुलिस की एक टीम हावड़ा स्टेशन पर मौजूद थी. पुलिस की गाड़ी से दोनों को सुरक्षित बशीरहाट स्थित उनके घर पहुंचाया गया. अनुकूल पोद्दार और उनकी पत्नी रेबा राय पोद्दार ने सकुशल वापसी के लिए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन का आभार जताया.


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