कक्षा से विश्व मंच तक पहचान, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए जामताड़ा के डॉ. अरुण वर्मा सम्मानित
सम्मानित शिक्षक डॉ अरुण कुमार वर्मा | Prabhat Khabar Network
जामताड़ा के डॉ. अरुण कुमार वर्मा को शिक्षक दिवस पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए जिला स्तर पर सम्मानित किया गया है. शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले डॉ. वर्मा को उनके योगदान के लिए सराहा गया है.
संवाददाता, जामताड़ा. झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, रांची के निर्देश के आलोक में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए जिला स्तर पर अनुशंसित शिक्षकों को सम्मानित किया गया. इसी क्रम में राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय, मिहिजाम के वरीय शिक्षक डॉ. अरुण कुमार वर्मा को शिक्षक दिवस के अवसर पर डायट में सम्मानित किया गया.
डॉ. अरुण कुमार वर्मा शिक्षा के साथ साहित्य के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं. शिक्षक के रूप में अपने दायित्वों के साथ उन्होंने साहित्य सृजन को भी निरंतर आगे बढ़ाया है. उनकी उपलब्धियों को देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए जिला स्तर पर उनका चयन जामताड़ा के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है.
विश्व हिंदी सम्मेलनों में प्रस्तुत कर चुके हैं अपनी रचनाएं
डॉ. वर्मा ने मॉरीशस, फिजी और इंडोनेशिया में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन में अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी है. इसके अलावा विभिन्न देशों में आयोजित कार्यक्रमों में भी उन्होंने अपनी स्वरचित पुस्तकों के उद्धरणों को कविता के रूप में प्रस्तुत किया है.
उनकी चर्चित कृतियों में 'मधुशाला फिर से' और 'रजनी आमंत्रण' प्रमुख हैं. उनकी साहित्यिक रचनाओं को पाठकों के बीच सराहना मिली है और साहित्य जगत में भी उनकी अलग पहचान बनी है.
सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका
शिक्षण और साहित्य के अलावा डॉ. अरुण कुमार वर्मा सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं. सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें राज्य एवं जिला स्तर पर 'सड़क सुरक्षा मित्र' के रूप में सम्मानित किया जा चुका है.
उनका मानना है कि शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
सामूहिक प्रयास से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव
डायट में सम्मानित किए जाने के अवसर पर डॉ. वर्मा ने जिले के शैक्षिक वातावरण, शिक्षकों की भूमिका और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर संभावनाओं पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और समाज के सामूहिक प्रयास जरूरी हैं.
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षकों को नई तकनीक और शिक्षण पद्धतियों को अपनाते हुए विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा. शिक्षा को प्रभावी और परिणामदायी बनाने में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है.
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए जिला स्तर पर डॉ. अरुण कुमार वर्मा की अनुशंसा को जामताड़ा के शैक्षिक और साहित्यिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है.
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