भक्त ध्रुव, प्रह्लाद और वामन अवतार हुआ वर्णन

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श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक संजय शास्त्री महाराज ने भक्त वात्सल्य ध्रुव, प्रह्लाद और वामन अवतार की कथा सुनायी.

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नारायणपुर. प्रखंड के सिकदारडीह गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक संजय शास्त्री महाराज ने भक्त वात्सल्य ध्रुव, प्रह्लाद और वामन अवतार की कथा सुनायी. उन्होंने कहा कि मनु और शतरूपा के दो पुत्र और तीन पुत्रियां हुई. पुत्रों के नाम प्रियव्रत और उत्तानपाद. राजा उत्तानपाद की दो रानियां थीं. एक का नाम सुरुचि और दूसरे का नाम सुनीति था. पुत्र का नाम उत्तम और सुनीति के पुत्र का नाम ध्रुव था. बालक ध्रुव एक बार पिता की गोद में बैठने की जिद करने लगे, लेकिन सुरुचि उसे पिता की गोद में बैठने नहीं देती है. ध्रुव रोता हुआ मां सुनीति को सारी बात बताया. मां के आंखों में आंसू आ गये और वह ध्रुव को भगवान की शरण में जाने को कहती हैं. पांच वर्ष का बालक ध्रुव राज्य छोड़कर वन में तपस्या के लिए चल गये है. नारद जी रास्ते में मिलते हैं और ध्रुव को समझाते हैं कि मैं तुम्हें पिता की गोद में बैठाउंगा, लेकिन ध्रुव ने कहा कि पिता की नहीं अब परम पिता की गोद में बैठना है. कठिन तपस्या से भगवान प्रसन्न होकर वरदान देते हैं. भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाते हुए व्यास जी ने कहा कि पिता अगर कुमार्ग पर चले तो पुत्र का कर्तव्य है उसे सही मार्ग पर लाये. तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद प्रह्लाद ने भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा. भगवान ने नरसिंह रूप में अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध कर अपने परमधाम को पहुंचाया. भगवान के वामन अवतार ने राजा बलि के अहंकार को चूर किया और उन्हें भगवान की भक्ति और आकर्षित किया. वहीं तीसरे दिन की कथा में श्रोताओं की भारी भीड़ उमड़ी.

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