आंदोलनकारियों को नहीं मिलता सम्मान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Mar 2017 2:32 AM (IST)
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कार्यक्रम को संबोिधत करते नारायण मंडल कहा जेल गये आज उन्हीं आंदोलनकारियों के साथ सरकार छलावा कर रही है जामताड़ा : झारखंड आंदोलनकारियों को सरकार ने भूला दिया. राज्य की लड़ाई में जेल गये. पुलिस की लाठियां खायी. लड़कर राज्य को अलग किया, लेकिन राज्य के अधिकारी, सरकार आंदोलनकारियों को उचित सम्मान नहीं देती है. […]
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कार्यक्रम को संबोिधत करते नारायण मंडल कहा
जेल गये आज उन्हीं आंदोलनकारियों के साथ सरकार छलावा कर रही है
जामताड़ा : झारखंड आंदोलनकारियों को सरकार ने भूला दिया. राज्य की लड़ाई में जेल गये. पुलिस की लाठियां खायी. लड़कर राज्य को अलग किया, लेकिन राज्य के अधिकारी, सरकार आंदोलनकारियों को उचित सम्मान नहीं देती है. उक्त बातें आंदोलनकारी नेता नारायण मंडल अनुमंडल कार्यालय के समक्ष धरना को संबोधित कर रहे थे. अपनी मांगों को लेकर आंदोलनकारी एसडीओ कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना देकर अपनी पीड़ा को संबोधन के माध्यम से कहा कि जिस झारखंड के लिए पुलिस की लाठियां खायी, जेल गये आज उन्हीं
आंदोलनकारियों के साथ सरकार छलावा कर रही है. राज्य गठन के इतने वर्षों बाद भी आंदोलनकारियों को सम्मान राशि भी नहीं दिया जा रहा है. श्री मंडल ने कहा कि एकीकृत बिहार में झारखंड के किसी भी नेता एवं मंत्री को बिहार में तरजीह बहुत कम दिया जाता था. झारखंडियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता था. कहा : यदि सरकार एवं जिला प्रशासन आंदोलनकारियों को पंद्रह दिनों के अंदर सम्मान राशि का भुगतान नहीं करती है तो वे सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे. धरना के बाद आंदोलनकारियों ने एसडीओ को राज्यपाल के नाम छह सूत्री मांग पत्र सौंपा.
आंदोलनकारियों की ये हैं मांगें
चिह्नित आंदोलनकारियों को अविलंब सम्मान राशि का हो भुगतान,आंदोलनकारियों की लंबित आवेदनों पर जल्द हो सुनवाई, राज्य स्थापना दिवस से ही पेंशन लागू हो, आंदोलनकारियों का वर्गीकरण न हो, आंदोलनकारियों के परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी में बहाली हो तथा आंदोलनकारियों को प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी एवं 15 अगस्त को विशेष रूप से सम्मानित करें मांगे शामिल हैं.
मौके पर नंदलाल सोरेन, शिव शंकर लाल मुर्मू, सुनील मंडल, रंजीत राउत, जमाल हुसैन, लंबोदर सिंह, भुजंग भूषण तिवारी अवनिकांत यादव, नाजिर टुडू, बड़ो सोरेन सहित सैकड़ों आंदोलनकारी मौजूद थे.
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