सर्जन नहीं, गंभीर मरीज तुरंत रेफर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई

Updated at : 29 Aug 2018 5:00 AM (IST)
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सर्जन नहीं, गंभीर मरीज तुरंत रेफर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई

अस्पताल में कई बीमारी की दवा भी उपलब्ध नहीं है अस्पताल में दंत चिकित्सक, सर्जन, नेत्र चिकित्सक सहित कई डॉक्टरों के पद रिक्त जामताड़ा : सरकार की ओर से प्रत्येक माह लगभग 80 लाख रुपये सदर अस्पताल जामताड़ा पर खर्च किये जाने के बावजूद भी सुविधाएं शून्य हैं. जिले से रोगी आते है, पर प्रसव […]

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अस्पताल में कई बीमारी की दवा भी उपलब्ध नहीं है

अस्पताल में दंत चिकित्सक, सर्जन, नेत्र चिकित्सक सहित कई डॉक्टरों के पद रिक्त
जामताड़ा : सरकार की ओर से प्रत्येक माह लगभग 80 लाख रुपये सदर अस्पताल जामताड़ा पर खर्च किये जाने के बावजूद भी सुविधाएं शून्य हैं. जिले से रोगी आते है, पर प्रसव व छोटे-मोटे ऑपरेशन छोड़ कर किसी अन्य रोगों का ऑपरेशन नहीं किया जाता है. हेड इंज्यूजरी, गंभीर रूप से जख्मी, गोली लगे मरीज सहित बड़े व गंभीर ऑपरेशन सदर अस्पताल में नहीं किये जाते हैं. ऐसे में जिले के एकमात्र सदर अस्पताल से भी लोगों को मायूसी ही हाथ लगती है. उन्हें रेफर कर दिया जाता है.
सबसे बड़ी बात सदर अस्पताल में डॉक्टरों की घोर कमी है. इस कारण जिलेवासियों को जो सुविधा मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पा रही है. अस्पताल में कई बीमारी की दवा भी उपलब्ध नहीं है. यहां तक की वार्ड के बेड भी फटने लगे हैं. मरीजों व उनके परिजनों की मानें तो किसी-किसी बेड पर चादर दिया जाता है किसी किसी पर नहीं दिया जाता है.
अधिकांश मरीज को कर दिया जाता है रेफर : जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर सदर अस्पताल में डॉक्टरों की घोर कमी है. जिले में कुल 89 डॉक्टर के पद स्वीकृत हैं. जिसमें से मात्र 30 ही डॉक्टर पदस्थापित हैं. इस कारण सदर अस्पताल से लेकर प्रखंड एवं ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों का सही से इलाज नहीं हो पाता है. सदर अस्पताल में भी डॉक्टरों की कमी के कारण अधिकांश मरीजों को रेफर कर दिया जाता है.
कई महत्वपूर्ण बीमारी के स्पेशियलिस्ट नहीं
सदर अस्पताल जामताड़ा में डॉक्टर की कमी तो है ही इसके अलावा सुविधाओं की भी घोर कमी है. डॉक्टर की कमी के कारण यहां आइसीयू की व्यवस्था नहीं करायी जा सकी है. हालांकि अस्पताल में एक माह में 15 से 20 प्रसव कराया जाता है तथा अगस्त माह में अभी तक 11 सीजर ऑपरेशन भी किया गया है. अस्पताल में दंत चिकित्सक, सर्जन, नेत्र चिकित्सक सहित कई डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हुए हैं.
29 डॉक्टर की जरूरत, काम कर रहे पांच
सदर अस्पताल में 29 डॉक्टर की जरूरत है, लेकिन फिलहाल पांच ही डॉक्टर सदर अस्पताल में कार्यरत हैं. अस्पताल में एक भी सर्जन नहीं है. सदर अस्पताल को चलाने में सरकार को जितना खर्च करना पड़ता है, उसके बदले सुविधाएं लोगों को नहीं मिल पा रही है. डॉक्टर के कारण इलाज कराने आये लोगों को घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है. यहां तक की कुछ ऐसे भी डॉक्टर हैं जो अपना निजी क्लीनिक में ही मरीजों को देखना पसंद करते हैं.
क्या कहते हैं डीएस
डॉक्टर की कमी के कारण मरीजों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिल रही है. कई बार वरीय अधिकारी के माध्यम से डॉक्टर की कमी के बारे में सरकार को अवगत कभी कराया गया है.
डॉ डीसी मुंसी, प्रभारी डीएस, सदर अस्पताल
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