झारखंड की ‘सारी सारजोम’ ने बढ़ाया मान, बेंगलुरु शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल की इंडियन प्रतियोगिता में चयन

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सारी सारजोम की पोस्टर व मानसिंह बास्के की फोटो  | Prabhat Khabar Network

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झारखंड की मुंडारी भाषा की शॉर्ट फिल्म सारी सारजोम का बेंगलुरु इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के लिए चयन हुआ है। जानिए फिल्म की खास बातें।

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जमशेदपुर: झारखंड की मुंडारी भाषा की शॉर्ट फिल्म 'सारी सारजोम' (पवित्र साल वृक्ष) का बेंगलुरु इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल-2026 के इंडियन कंपीटिशन श्रेणी में चयन हुआ है. फेस्टिवल का आयोजन 14 से 16 अगस्त तक बेंगलुरु में होगा, जबकि इसकी ओटीटी स्क्रीनिंग 6 से 16 अगस्त तक चलेगी. यह फिल्म आदिवासी समाज की संस्कृति, स्मृति, पहचान और प्रकृति से उसके गहरे संबंधों को संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है.

अपनी सशक्त कहानी और सिनेमाई भाषा के कारण फिल्म पहले भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही जा चुकी है. फिल्म के लेखक और निर्देशन मानसिंह बास्के हैं, जो बहरागोड़ा के बेनागड़िया गांव के रहने वाले हैं. वे वर्ष 2017 से फिल्म निर्माण के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं. वे हिंदी के साथ-साथ अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी सिनेमा के विकास पर काम कर रहे है.

बेंगलुरु इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल भारत के सबसे प्रतिष्ठित और भारत का एकमात्र ऑस्कर-मान्यता प्राप्त लघु कथा फिल्म महोत्सव है. ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर इंडियन प्रतियोगिता में चयनित होना न केवल फिल्म की गुणवत्ता का प्रमाण है, बल्कि संताली भाषा में बनी सिनेमा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है.

इस शॉर्ट फिल्म में झारखंड के कई कलाकारों और तकनीशियन ने अपना योगदान दिया है. सिनेमेटोग्राफर के रूप में धनबाद के सायान मोदक ने बेहतर काम किया है. वहीं, शॉर्ट फिल्म को गोड्डा निवासी राज आनंद ने एडिटिंग किया है. जबकि सह लेखक में खूंटी के विदित होरो ने सहयोग किया है.

ये सभी एफटीआइआइ से पोस्ट ग्रेजुएट हैं. साउंड का काम युगल शर्मा संभाला है. आर्ट डायरेक्शन और प्रोडक्शन डिजाइन अर्पित नाग और रोबिन खत्री ने किया है. सारी सारजोम मुंडारी शॉर्ट में स्थानीय कलाकार सुकुमार टुडू, अनुराग लुगून, रेणुका, कैलाश, हर्ष, अक्षय, धर्मेंद्र ने अपने शानदार अभिनय से लोगों का दिल जीता है.

स्थानीय कहानियों को लोग कर रहे हैं पसंद

मान सिंह मानसिंह बास्के ने बताया कि स्थानीय कहानियां और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी फिल्मों को वैश्विक स्तर पर खूब पसंद किया जा रहा है. आने वाले दिनों में झारखंड की माटी से संबंधित फिल्मों राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का काम करेंगे. 'सारी सारजोम' का यह चयन झारखंड के उभरते फिल्मकारों और क्षेत्रीय भाषाओं में बनने वाले सिनेमा के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि है.


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दशमत सोरेन

लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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