विकसित भारत के निर्माण के लिए तकनीक, इनोवेशन व कौशल विकास पर ध्यान देना अनिवार्य : कुलपति

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आरवीएस इंजीनियरिंग कॉलेज में सस्टेनेबिलिटी और नेट-जीरो ग्रोथ पर सेमिनार.

विकसित भारत के निर्माण के लिए तकनीक, नवाचार और कौशल विकास पर ध्यान देना अनिवार्य है. आरवीएस इंजीनियरिंग कॉलेज में 'सस्टेनेबिलिटी और नेट-जीरो ग्रोथ' पर आयोजित सेमिनार में यह बात कही गई. छात्रों ने प्रस्तुत किए सस्टेनेबल मॉडल.

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जमशेदपुर : आरवीएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में सस्टेनेबिलिटी, क्लाइमेट क्राइसिस एंड नेट-जीरो इंडस्ट्रियल ग्रोथ : इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस फॉर ए रेजिलिएंट फ्यूचर विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. इसमें मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो (डॉ) डीके सिंह और टाटा स्टील के सीआइआइ झारखंड सस्टेनेबिलिटी कमेटी के संयोजक सौरभ कुंडू थे. साथ ही एपेक्स ऑटो के विश्वजीत दत्ता, आरएसबी ट्रांसमिशन के तुषार रंजन रोटरी और फिल्ट्रम फिल्टर्स के उदय शंकर शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे.

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विकसित भारत के निर्माण के लिए कौशल विकास पर ध्यान देना जरूरी

अतिथियों का स्वागत संस्था के चेयरमैन बिंदा सिंह, निदेशक शत्रुघ्न सिंह, शासी निकाय सदस्य शक्ति सिंह, प्रिंसिपल प्रो (डॉ) राजेश कुमार तिवारी और टीएंडपी हेड डॉ विक्रम शर्मा ने किया. प्रो डीके सिंह ने कहा - विकसित भारत के निर्माण के लिए तकनीक, नवाचार (इनोवेशन) और कौशल विकास पर ध्यान देना अनिवार्य है. उन्होंने उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया. सौरभ कुंडू ने 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआइ) में प्रगति को जरूरी बताया.

विद्यार्थियों ने जल संरक्षण व स्मार्ट इरिगेशन पर रखे विचार

कार्यक्रम के मुख्य प्रायोजक आरएसबी ग्लोबल और सह-प्रायोजक एपेक्स ऑटो प्राइवेट लिमिटेड थे. इस अवसर पर छात्रों ने जल संरक्षण, जेटा पावर (सोलर), स्मार्ट वॉटर लीकेज डिटेक्शन, स्मार्ट इरिगेशन और पॉल्यूशन ट्रैकर जैसे सस्टेनेबल एनर्जी मॉडल प्रदर्शित किये. तीन विषयों पर हुई पैनल चर्चा उद्घाटन सत्र के बाद तीन अलग-अलग विषयों पर पैनल चर्चा आयोजित की गयी. तुषार रंजन रोटरी, सुधीर चंदेल, आरएन प्रसाद, जीजी मंडल और एजीएम दिलीप कुमार ने मानवीय मूल्यों को सस्टेनेबिलिटी का आधार बताया. विश्वजीत दत्ता, कविता लोधी, जया सिंह, के रवि, रश्मि तिवारी और वनिशिखा सरकार ने पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों पर विचार व्यक्त किये. उदय शंकर, नवीन सिन्हा, नवीन कुमार शर्मा, प्रणय चटर्जी और स्वप्निल मिश्रा ने समाधानों पर चर्चा की.


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