25 लाख से बना खैरबनी का आयुष्मान आरोग्य मंदिर खुद मांग रहा जीवनदान, जानें क्या है इसकी वजह
खैरबनी का आयुष्मान आरोग्य मंदिर
डुमरिया के खैरबनी गांव में विद्यालय के समीप ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल द्वारा 25 लाख रुपये से अधिक की लागत से निर्मित आयुष्मान आरोग्य मंदिर का भवन अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है.
डुमरिया: डुमरिया प्रखंड के खैरबनी पंचायत स्थित खैरबनी गांव में विद्यालय के समीप ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल द्वारा 25 लाख रुपये से अधिक की लागत से निर्मित आयुष्मान आरोग्य मंदिर का भवन अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है. नदी के किनारे ढलान पर बिना किसी ठोस योजना के बनाए गए इस दो मंजिला भवन का निर्माण वर्ष 2025 में पूरा हुआ था.
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उसी वर्ष आई बाढ़ का पानी इसके ग्राउंड फ्लोर में घुस गया, जिससे खिड़कियां टूट गईं और कार्यालय में रखा एलईडी टीवी, जरूरी दस्तावेज, आलमीरा में रखी सामग्रियां और अन्य महत्वपूर्ण कागजात पूरी तरह बर्बाद हो गए. ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण स्थल पर कोई सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया था, जिससे इसकी पारदर्शिता पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं.
बुनियादी सुविधाओं और पहुंच मार्ग का अभाव
भवन की स्थिति इतनी दयनीय है कि यहां कार्यरत एएनएम और सीएचओ के लिए भी कार्य करना मुश्किल हो गया है. ऊपरी मंजिल की छत से पानी टपकता है और खिड़कियों से भी बारिश का पानी अंदर आ जाता है. मुख्य द्वार के सामने बाढ़ के कारण मिट्टी बह जाने से एक बड़ा गड्ढा बन गया है और चारों तरफ झाड़ियां उग आई हैं. मुख्य द्वार का प्लेटफॉर्म कभी भी ढह सकता है. इस तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क या रास्ता नहीं है, जिससे बरसात के दिनों में मरीजों का यहां पहुंचना असंभव हो जाता है. इसके अलावा, परिसर में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है क्योंकि नलकूप में लगा मोटर लंबे समय से खराब पड़ा है.
अधिकारियों की उदासीनता और जवाबदेही पर सवाल
लाखों रुपये की सरकारी राशि से जनता की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए खड़ा किया गया यह भवन आज खुद लाचारी की स्थिति में है. ग्रामीणों में इस बात का भारी रोष है कि गलत जगह चयन और घटिया निर्माण कार्य से सिर्फ संवेदक और विभागीय अधिकारियों को लाभ पहुंचाया गया है. स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और वरीय पदाधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि जनता के पैसे की बर्बादी पर रोक लग सके और ग्रामीणों को वास्तविक स्वास्थ्य लाभ मिल सके.
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