वोटर लिस्ट सुधार में गड़बड़ी का आरोप, बीएलओ पर दबाव डालकर नाम कटवाने की कोशिश, ये है चुनाव आयोग के नियम
प्रेस वार्ता को संबोधित करते कांग्रेस नेता.
जुगसलाई और कदमा में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगा है. कांग्रेस ने भाजपा पर नाम कटवाने के लिए बीएलओ पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है.
जमशेदपुर : जुगसलाई और कदमा इलाके में वोटर लिस्ट के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआइआर) काम में गड़बड़ी और मनमानी का मामला सामने आया है. शनिवार को बिष्टुपुर के तिलक पुस्तकालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के जिला महासचिव अनूप मिश्रा ज्योति ने भाजपा पर आरोप लगाया. उन्होंने कहा - चुनाव को प्रभावित करने के लिए भाजपा के लोग नियमों की अनदेखी कर रहे हैं और फॉर्म-7 (वोटर लिस्ट से नाम हटाने वाला फॉर्म) का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसा ही दबाव कदमा इलाके के बीएलओ पर भी बनाए जाने की बात सामने आयी है.
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बीएलओ पर थोक के भाव में फॉर्म लेने का दबाव
अनूप मिश्रा ने बूथवार जानकारी देते हुए बताया - भाजपा नेता स्थानीय बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) पर थोक के भाव में फॉर्म लेने का दबाव बना रहे हैं. उन्होंने बताया कि बूथ नंबर 162 में करीब 80 फॉर्म जबरन जमा कराने की कोशिश हुई. बूथ नंबर 182 में बीएलओ पर 50 फॉर्म लेने का दबाव डाला गया. बूथ नंबर 204 में 38 फॉर्म बीएलओ को थमाने का प्रयास किया गया.
डीसी से मिले कांग्रेसी, मिला जांच का आश्वासन
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कांग्रेसी नेता डीसी राजीव रंजन से मिले. उन्हें पूरी बातों से अवगत कराया. इससे पहले चुनाव अधिकारियों से भी शिकायत की. डीसी ने कांग्रेस नेताओं को कहा - इतनी बड़ी संख्या में फॉर्म कहां से आये इसकी जांच होगी. डीसी ने भरोसा दिलाया कि नियम के खिलाफ कोई काम नहीं होगा. एक दिन में 10 से ज्यादा फॉर्म नहीं लिये जायेंगे और जब तक घर-घर जाकर सही तरीके से जांच (वेरिफिकेशन) नहीं होगी. तब तक किसी भी वोटर का नाम लिस्ट से नहीं काटा जायेगा.
क्या है चुनाव आयोग का नियम
चुनाव आयोग का साफ नियम है कि जिस बूथ का जो बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) होगा. वही फॉर्म जमा कर सकता है. साथ ही कोई भी व्यक्ति एक दिन में 10 से ज्यादा फॉर्म नहीं दे सकता. इसके उलट, जो लोग उस बूथ के बीएलए तक नहीं हैं, वे धौंस दिखाकर दर्जनों फॉर्म एक साथ जमा कराने पर तुले हैं. कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि आम जनता के इतने सारे फॉर्म आखिर भाजपा नेताओं के पास पहुंचे कैसे? इसकी जांच होनी चाहिए.
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