हजारीबाग के जंगलों में दिखा दुर्लभ गिद्धों का कुनबा, विलुप्त हो रहे भारतीय गिद्धों ने महावर पहाड़ को बनाया नया आशियाना

Updated:
विज्ञापन
जंगल में मौजूद भारतीय गिद्ध

जंगल में मौजूद भारतीय गिद्ध

बरकट्ठा के महावर पहाड़ पर दुर्लभ 'भारतीय गिद्ध' (इंडियन वल्चर) बड़ी संख्या में देखे गए हैं, जो जंगल की जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। यह इलाका एक बार फिर इन लुप्तप्राय पक्षियों का सुरक्षित घर बनता दिख रहा है।

विज्ञापन

बरकट्ठा से रेयाज खान की रिपोर्ट

हजारीबाग : हजारीबाग जिले के बरकट्ठा वन क्षेत्र से एक बेहद उत्साहित करने वाली खबर सामने आई है. एक समय भारत के जंगलों से लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच चुके दुर्लभ 'भारतीय गिद्ध' (इंडियन वल्चर) अब बरकट्ठा की वादियों में बड़ी संख्या में नजर आ रहे हैं. बरकट्ठा के प्रसिद्ध महावर पहाड़ और कपका-कुरचुनोबेडो पुल के पास इन पक्षियों को झुंड में देखा गया है. वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है, क्योंकि यह इलाका एक बार फिर प्राकृतिक रूप से इन पक्षियों का सुरक्षित घर बनता दिख रहा है.

महावर पहाड़ पर सुरक्षित है गिद्धों का आशियाना

बरकट्ठा के फॉरेस्टर पंकज कुमार ने जानकारी दी है कि पिछले कुछ दिनों से जंगल के अलग-अलग हिस्सों में गिद्धों की हलचल काफी बढ़ गई है. सबसे खुशी की बात यह है कि इस झुंड में एडल्ट गिद्धों के साथ-साथ छोटे और कम उम्र के गिद्ध भी दिखाई दिए हैं. यह इस बात का साफ सबूत है कि महावर पहाड़ और आसपास का वातावरण इन दुर्लभ पक्षियों के लिए पूरी तरह अनुकूल है और वे यहां बिना किसी डर के अपना परिवार बढ़ा रहे हैं. महावर पहाड़ लंबे समय से इनका पसंदीदा ठिकाना रहा है और इनकी वापसी से क्षेत्र की हरियाली और जैव विविधता और समृद्ध हुई है.

ये भी पढ़ें: बिहार-झारखंड योगा चैंपियनशिप में छाया रांची का स्कूल, 4 खिलाड़ियों का नेशनल टीम में चयन

डाइक्लोफेनाक दवा बनी थी विनाश की वजह

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, 1980 के दशक तक भारत के आसमान में करोड़ों की संख्या में उड़ने वाले गिद्ध अचानक गायब होने लगे थे. जानवरों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 'डाइक्लोफेनाक' नाम की दर्द निवारक दवा, जंगलों की कटाई और भोजन की कमी के कारण इनकी आबादी में 99 फीसदी तक की रिकॉर्ड गिरावट आई. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पूरे देश में इनकी संख्या महज कुछ हजारों में सिमट कर रह गई. भारत में पाई जाने वाली गिद्धों की नौ प्रजातियों में से भारतीय गिद्ध, सफेद पीठ वाला गिद्ध, पतली चोंच वाला और लाल सिर वाला गिद्ध सबसे ज्यादा खतरे (क्रिटिकली एनडेंजर्ड) में हैं.

वन विभाग ने लोगों से की सहयोग की अपील

गिद्धों की इस तरह वापसी पर्यावरण के संतुलन के लिए बेहद जरूरी और ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि गिद्ध कुदरत के सफाईकर्मी होते हैं. इस बीच वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों से जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा में मदद करने की अपील की है. अधिकारियों ने जंगलों में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि न करने की सख्त चेतावनी दी है. साथ ही स्थानीय लोगों से कहा गया है कि अगर उन्हें कहीं भी गिद्धों का घोंसला या उनका झुंड दिखाई दे, तो तुरंत वन विभाग को खबर करें ताकि इन दुर्लभ मेहमानों को पूरी सुरक्षा दी जा सके.

ये भी पढ़ें: हुसैनाबाद में ट्रक से 320 किलो गांजा बरामद, डेढ़ करोड़ से अधिक की खेप जब्त


विज्ञापन
समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola