बड़कागांव में नदी की तेज धार ने उजाड़ी किसानों की खेती, 5 एकड़ फसल बही; 15 लाख का नुकसान
नदी के जल स्तर बढ़ने से फ़सल लगा जमीन नदी में समाया | Prabhat Khabar Network
बड़कागांव के पंडरिया में हहारो नदी की तेज धार से किसानों की 5 एकड़ फसल बह गई। 15 लाख रुपये के नुकसान से किसानों की कमर टूटी, प्रशासन से मदद की गुहार।
बड़कागांव: बरसात में हहारो नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद ग्राम पंडरिया में नदी की तेज धार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. नदी के किनारे करीब पांच एकड़ में लगी धान, मकई और ओल की फसल के साथ पेड़-पौधे भी पानी में बह गये. किसानों के अनुसार, इससे करीब 15 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है. फसल और खेत बह जाने से किसानों की कमर टूट गयी है.
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कृषक विनोद कुमार महतो और कमलनाथ महतो ने बताया कि हहारो नदी के किनारे उनके खेत हैं. बरसात के दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे तेज बहाव में खेतों में लगी फसल बह गयी. किसानों का कहना है कि नदी की तेज धार से खेतों को बचाने के लिए लंबे समय से गार्डवाल निर्माण की मांग की जा रही है. इसके लिए जिला परिषद, सांसद और विधायक को ज्ञापन भी दिया गया था, लेकिन अब तक गार्डवाल का निर्माण नहीं हो सका.
इन किसानों के खेत हुए प्रभावित
किसानों के अनुसार, पंडरिया में कमलनाथ महतो का पांच कट्ठा, धनराज महतो का चार कट्ठा, मनोज महतो का दो कट्ठा, बालेश्वर महतो का तीन कट्ठा, बिहारी महतो का एक कट्ठा, राजू महतो का एक कट्ठा, विजय महतो का दो कट्ठा, बजरंग राणा का दो कट्ठा, केदार राणा का दो कट्ठा और विनोद राणा का दो कट्ठा खेत प्रभावित हुआ है.
वहीं, ग्राम चोरका के मोहर साव का पांच कट्ठा, टेभा साव का दो कट्ठा, बीटल साव का दो कट्ठा, बासो महतो का पांच कट्ठा, लालदेव महतो का पांच कट्ठा और जगन महतो का तीन कट्ठा खेत भी नदी की तेज धार की चपेट में आया है. किसानों ने बताया कि इनके अलावा कई अन्य किसानों की फसल लगी जमीन भी बह गयी है.
गार्डवाल बनता तो बच सकती थी खेती
किसानों का कहना है कि हहारो नदी में हर साल बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ने से नदी का कटाव तेज हो जाता है. इससे नदी किनारे खेती करने वाले किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ता है. किसानों ने कहा कि समय रहते गार्डवाल का निर्माण हो जाता तो खेतों और फसलों को नदी की तेज धार से बचाया जा सकता था.
जिला परिषद सदस्य ने प्रस्ताव रखने की बात कही
जिला परिषद सदस्य यासमीन निशा ने कहा कि अब तक ग्रामीणों की ओर से उन्हें कोई आवेदन नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि मामला दुखद है. क्षेत्र के किसानों की आजीविका मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है और बरसात में फसल लगी जमीन बह जाने से उन्हें काफी नुकसान हुआ है.
उन्होंने कहा कि बाकी बचे खेतों को बचाने के लिए गार्डवाल निर्माण का प्रस्ताव जिला परिषद की बैठक में रखा जायेगा, ताकि भविष्य में नदी के कटाव से किसानों की जमीन और फसल को बचाया जा सके.
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