विभावि में भारतीय ज्ञान परंपरा के विऔपनिवेशीकरण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

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कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि | Prabhat Khabar Network

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विनोबा भावे विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित, विशेषज्ञों ने इतिहास लेखन और ज्ञान के महत्व पर चर्चा की।

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हजारीबाग : विनोबा भावे विश्वविद्यालय के विवेकानंद सभागार में स्नातकोत्तर इतिहास विभाग की ओर से ‘भारतीय ज्ञान परंपरा का विऔपनिवेशीकरण : इतिहास लेखन और अतीत से वर्तमान तक ज्ञान के निर्माण में योगदान’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गयी. कार्यक्रम दो सत्रों में हुआ. पहले सत्र में पैनल डिस्कशन व इंटरएक्टिव सेशन और दूसरे सत्र में शोधपत्रों का प्रस्तुतीकरण किया गया.

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कार्यक्रम की शुरुआत झारखंड सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई.

भारतीय ज्ञान परंपरा पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

पैनल डिस्कशन में डॉ अमित कुमार सुमन ने कहा कि ज्ञान की शक्ति से सत्ताएं प्रभावित होती हैं. प्रो. श्याम नारायण लाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा को गतिशील और प्रासंगिक बताते हुए पाणिनी के व्याकरण, नाट्यशास्त्र, कामसूत्र और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का उल्लेख किया.

प्रो. प्रीतिश आचार्य ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा ने अशिक्षित, दलित और वंचित वर्गों में भी विवेक और संस्कार विकसित करने में भूमिका निभायी. प्रो. सलिल मिश्रा ने कहा कि ठोस शोध और तर्क के आधार पर भारतीय ज्ञान परंपरा का पुनर्विश्लेषण किया जा सकता है.

कुलपति प्रो. चंद्रभूषण शर्मा ने कहा कि इतिहास सभी विषयों और विधाओं का केंद्र है. संगोष्ठी में विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थी प्रत्यक्ष और ऑनलाइन माध्यम से जुड़े. संचालन इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ हितेंद्र अनुपम ने किया. मौके पर डॉ विकास कुमार समेत शिक्षक और शोधार्थी मौजूद थे.

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