हजारीबाग के 23 मॉडल स्कूलों की डीईओ ने की समीक्षा, बोलीं- निजी स्कूलों से बेहतर हो शिक्षा का माहौल

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जिले में चलकुसा प्रखंड का पीएम श्री स्कूल.

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झारखंड के हजारीबाग जिले में पीएम श्री और मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के 23 विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई. जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमारी नीलम ने शैक्षणिक व्यवस्था, नामांकन, उपस्थिति और शिक्षण गतिविधियों का गहन मूल्यांकन किया.

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Hazaribagh News: झारखंड के हजारीबाग जिले में संचालित पीएम श्री और मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (सीएम एसओई) के 23 विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुक्रवार को व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की गई. जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कुमारी नीलम ने एक-एक विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, नामांकन, उपस्थिति और शिक्षण गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की. बैठक के बाद उन्होंने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षा कर्मियों को स्पष्ट संदेश दिया कि ये विद्यालय जिले के मॉडल स्कूल हैं और यहां की शिक्षा व्यवस्था पूरे जिले के लिए उदाहरण बननी चाहिए.

मॉडल स्कूलों से जिले को है बड़ी उम्मीद

समीक्षा के दौरान डीईओ ने कहा कि पीएम श्री और सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का उद्देश्य केवल बेहतर भवन या सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि सरकारी विद्यालयों में ऐसा शैक्षणिक माहौल तैयार करना है, जो निजी स्कूलों से भी बेहतर हो. उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी. उन्होंने शिक्षकों से कहा कि यदि मॉडल स्कूलों में शिक्षा का स्तर मजबूत होगा, तो इसका सकारात्मक प्रभाव जिले के अन्य सरकारी विद्यालयों पर भी पड़ेगा.

शैक्षणिक प्रगति और उपस्थिति की हुई समीक्षा

बैठक में सभी 23 विद्यालयों की शैक्षणिक प्रगति, छात्र नामांकन, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, आधारभूत संरचना और शिक्षण व्यवस्था की अलग-अलग समीक्षा की गई. डीईओ ने विद्यालयों में चल रही कक्षाओं, शिक्षकों की भूमिका और विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति की जानकारी भी ली. उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक विद्यालय अपने प्रदर्शन की नियमित निगरानी करे और जहां भी सुधार की आवश्यकता हो, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए.

लर्निंग आउटकम पर रहेगा विशेष फोकस

डीईओ ने कहा कि सभी विद्यालयों में कक्षा-वार लर्निंग आउटकम को प्राथमिकता दी जाए. उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता का लगातार मूल्यांकन करें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे निर्धारित शैक्षणिक स्तर तक पहुंच रहे हैं. उन्होंने कहा कि केवल पाठ्यक्रम पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि छात्र विषयों को अच्छी तरह समझें और व्यवहारिक रूप से उनका उपयोग कर सकें.

नियमित गतिविधियों के संचालन का निर्देश

विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाने के लिए डीईओ ने कई नियमित गतिविधियों को समय पर संचालित करने पर जोर दिया. उन्होंने निर्देश दिया कि सभी स्कूलों में नियमित कक्षाएं, प्रार्थना सभा, पुस्तकालय गतिविधियां, प्रयोगशाला का उपयोग और खेलकूद कार्यक्रम तय समय पर आयोजित किए जाएं. इसके साथ ही पीएम श्री और सीएम एसओई के निर्धारित मानकों के अनुरूप सभी शिक्षण गतिविधियां, प्रोजेक्ट वर्क और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने को कहा गया.

कमजोर छात्रों के लिए रेमेडियल क्लास

डीईओ कुमारी नीलम ने शिक्षकों को निर्देश दिया कि जिन विद्यार्थियों की पढ़ाई कमजोर है, उनके लिए विशेष रेमेडियल क्लास संचालित की जाए. वहीं मेधावी छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित करने और उन्हें अतिरिक्त मार्गदर्शन देने पर भी जोर दिया गया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक छात्र की क्षमता अलग होती है. इसलिए कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहयोग देने के साथ प्रतिभाशाली छात्रों को आगे बढ़ाने की भी समान जिम्मेदारी विद्यालयों की है.

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स्वच्छता और अनुशासन पर भी जोर

बैठक में विद्यालय परिसर की साफ-सफाई, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए. डीईओ ने कहा कि अनुशासित और स्वच्छ विद्यालय का माहौल बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को मजबूत बनाता है. समीक्षा बैठक में संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक और शिक्षा कर्मी उपस्थित रहे. अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इन निर्देशों के प्रभावी पालन से जिले के पीएम श्री और मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में शिक्षा की गुणवत्ता और बेहतर होगी तथा सरकारी विद्यालयों में उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी.

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