चंडी शतकम’ के 102 श्लोकों पर हुई चर्चा, पांडुलिपियों में पाठभेद पर शोध की जरूरत
दिवसीय व्याख्यान में उपस्थित शिक्षक | Prabhat Khabar Network
हजारीबाग के तुलसीदास सभागार में चंडी शतकम पर पांच दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन हुआ, जिसमें शोधार्थियों को विशेष शोध करने की सलाह दी गई।
पांच दिवसीय व्याख्यानमाला के तीसरे दिन बाणभट्ट की रचना पर मंथन, दूसरे सत्र में दुर्गा सप्तशती की दी गयी व्यवहारिक जानकारी
हजारीबाग : तुलसीदास सभागार में गुरुवार को पांच दिवसीय व्याख्यानमाला के तीसरे दिन का कार्यक्रम संपन्न हुआ. कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती माता को पुष्प अर्पित कर किया गया. प्रथम सत्र सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक चला. इसका विषय महाकवि बाणभट्ट द्वारा रचित ‘चंडी शतकम’ था.
मुख्य वक्ता डॉ घनश्यामचंद्र उपाध्याय ने बताया कि ‘चंडी शतकम’ की रचना महाकवि बाणभट्ट ने 606-648 के दौरान की थी. उपलब्ध पांडुलिपियों में केवल 70 श्लोक मिलते हैं. वर्तमान में उपलब्ध ‘चंडी शतकम’ में 102 श्लोक हैं, जबकि विभिन्न प्रकाशनों में 78 श्लोकों में पाठभेद पाया जाता है. उन्होंने शोधार्थियों से इस विषय पर और अधिक शोध करने की आवश्यकता बतायी.
दुर्गा सप्तशती पर भी हुई चर्चा
दूसरे सत्र में डॉ घनश्यामचंद्र उपाध्याय ने दुर्गा सप्तशती से संबंधित व्यवहारिक जानकारी दी. उन्होंने सप्तशती के सात सौ श्लोकों पर विचार व्यक्त किये. डेक्कन यूनिवर्सिटी के पुस्तकालय से प्राप्त पांडुलिपि के आधार पर उन्होंने बताया कि प्राधानिक रहस्य और मूर्ति रहस्य मार्कंडेय पुराण से संदर्भित हैं.
विभागाध्यक्षा डॉ अंजुम आरा ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम में संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डॉ नकुल पांडेय, डॉ अंजुम आरा, डॉ अखिलेश्वर पाठक, पुरुषोत्तम कुमार सिंह और डॉ सुबोध सिंह शिवगीत उपस्थित थे.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए