रैकिंग में स्थान पाने वाला झारखंड का इकलौता स्टेट यूनिवर्सिटी बना विनोबा भावे विश्वविद्यालय
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Apr 2017 7:35 AM (IST)
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हजारीबाग : विनोबाभावे विवि हजारीबाग ने नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क की जारी सूची में 101 से 150 के बीच स्थान पाया है. स्टेट यूनिवर्सिटी में बिहार व झारखंड का एकमात्र विवि यह है, जिसे यह रैंक हासिल हुआ है. प्रेसवार्ता में कुलपति प्रो गुरदीप सिंह ने बताया कि यह गर्व की बात है कि विभावि […]
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हजारीबाग : विनोबाभावे विवि हजारीबाग ने नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क की जारी सूची में 101 से 150 के बीच स्थान पाया है. स्टेट यूनिवर्सिटी में बिहार व झारखंड का एकमात्र विवि यह है, जिसे यह रैंक हासिल हुआ है. प्रेसवार्ता में कुलपति प्रो गुरदीप सिंह ने बताया कि यह गर्व की बात है कि विभावि ने कम समय में शिक्षा के क्षेत्र में अपना एक मुकाम बनाया है. रैंकिंग में पूरे भारत से 3319 विवि के आवेदन स्वीकृत हुए थे, जिसमें विभावि भी शामिल हुआ था. रैंकिंग के लिए 20 सूचक का इस्तेमाल किया गया था. इसमें शोधकार्य ,कंसल्टेंसी, लाइब्रेरी, प्लेसमेंट, क्वालिटी एजुकेशन, करीकुलम आदि बिंदु शामिल हैं.
उन्होंने बताया कि नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क ने पहली बार वर्ष 2016 में पूरे भारत के विवि का रैंकिंग की थी. दूसरी बार 2017 में रैंकिंग हुई. इसमें आइआइटी, सेंट्रल विवि, आइआइएम जैसे विवि शामिल हैं. यह रैंक भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने जारी किया है.कुलपति ने बताया कि शोध कार्य एवं प्लेसमेंट में हम पीछे चल रहे हैं.
शिक्षकों की भी कमी है. इसके बाद भी यहां सीबीसीएस सिस्टम, ऑनलाइन नामांकन, रजिस्ट्रेशन लागू किया गया है. इसी वर्ष विवि को नैक की ओर से ग्रेडिंग की गयी है. इसके अंतर्गत 19 अंगीभूत कॉलेज हैं. 11 कॉलेजों की नेक ने ग्रेडिंग की है. शेष कॉलेजों में भी नैक टीम के आने की सूचना हो गयी है. सभी विभागाध्यक्ष, संकायाध्यक्ष एवं शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों से इस खुशी को बांटी गयी है. गया है. विवि परिवार की कोशिश होगी की रैंकिंग में अगली बार हम टॉप 50 के अंदर रहें. प्रति कुलपति प्रो मनोरंजन प्रसाद सिन्हा ने बताया कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पांच प्रतिशत विद्यार्थी पढ़ते हैं, जबकि इन्हें 95 प्रतिशत का फंड मिलता है.
स्टेट यूनिवर्सिटी में 95 प्रतिशत विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं, जबकि फंड के नाम पर पांच प्रतिशत ही मिल पाता है, फिर भी उच्च शिक्षा को हमलोगों ने गंभीरतापूर्वक लिया है. प्रेसवार्ता में डीएसडब्ल्यू डॉ राजेश कुमार, कुलसचिव डॉ एसके सिन्हा, डॉ अभय कुमार सिन्हा शामिल थे.
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