विपक्षी दलों ने फूंका विरोध का बिगुल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Aug 2016 12:24 AM (IST)
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राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण 2013 के प्रावधानों के अनुरूप करे काम हजारीबाग : केंद्र व झारखंड सरकार के निर्णय के खिलाफ विपक्षी दलों की एकजुटता सोमवार को हजारीबाग में दिखी. जिला स्कूल मैदान में आयोजित उपवास कार्यक्रम में विपक्षी दलों के संयुक्त एजेंडा घोषित कर विधायक प्रदीप यादव ने सरकार के विरुद्ध जंग का एलान […]
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राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण 2013 के प्रावधानों के अनुरूप करे काम
हजारीबाग : केंद्र व झारखंड सरकार के निर्णय के खिलाफ विपक्षी दलों की एकजुटता सोमवार को हजारीबाग में दिखी. जिला स्कूल मैदान में आयोजित उपवास कार्यक्रम में विपक्षी दलों के संयुक्त एजेंडा घोषित कर विधायक प्रदीप यादव ने सरकार के विरुद्ध जंग का एलान किया. संत विनोबा भावे, पूर्वी क्षेत्र में उच्च शिक्षा की शुरुआत के रूप में संत कोलंबा कॉलेज की धरती और जयप्रकाश नारायण के आंदोलन की भूमि हजारीबाग से सरकार के तानाशाह निर्णय के खिलाफ जनता को गोलबंद करने की शुरुआत की गयी. उपवास के माध्यम से पूरे झारखंड के लोगों में संदेश पहुंचाने का संकल्प लिया गया.
दो दिवसीय उपवास कार्यक्रम में पहले दिन मंच और पंडाल खचाखच भरा रहा. बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में उपवास कार्यक्रम पूर्व निर्धारित समय 10.30 बजे से शुरू हुआ. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा पर बाबूलाल मरांडी समेत कार्यक्रम प्रभारी शिवलाल महतो, सह प्रभारी मुन्ना मल्लिक एवं अन्य नेताओं ने माल्यार्पण किया. राष्ट्रगान के बाद उपवास प्रारंभ हुआ.
कार्यक्रम का संचालन झाविमो युवा मोरचा के संतोष कुमार व स्वागत भाषण झाविमो किसान मोरचा के केंद्रीय अध्यक्ष शिवलाल महतो ने दिया.
उपवास का एजेंडा: जेवीएम विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार ने जमीन कॉरपोरेट घरानों को देने का गलत निर्णय लिया है. केंद्र सरकार के इशारे पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को खुश करने के लिए भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के प्रावधानों को अमल में नहीं लाया जा रहा है. सीएनटी, एसपीटी एक्ट में संशोधन, गैरमजरुआ जमीन की बंदोबस्ती रद्द करने के पीछे सिर्फ किसी भी तरह लोगों की जमीन को छीनना है. सरकार भूमि अधिग्रहण 2013 के सभी प्रावधानों के अनुरूप काम करे.
विस्थापन आयोग का गठन हो: झारखंड में 30 लाख से अधिक विस्थापितों को पुनर्वास व सुविधाएं नहीं मिली है. रजरप्पा कोल प्रोजेक्ट सेवई ग्राम में 1984 में लोगों को विस्थापित किया गया, लेकिन आज विस्थापितों का नामो-निशान मिट गया है. इसी तरह डीवीसी मैथन पंचायत डैम का सीमा पातर गांव के आदिवासी की जमीन ली गयी. उन्हें मुआवजा व नौकरी आज तक नहीं मिली. राज्य में ऐसे कई उदाहरण हैं. विपक्षी दल मांग करती है कि विस्थापन आयोग का गठन हो. स्थानीयता को नये तरीके से परिभाषित किया जाये. विपक्षी दल मांग करती है कि स्थानीयता की परिभाषा जो सरकार ने गढी है, उसे निरस्त किया जाये. खतियानी रैयत ही झारखंडी होंगे.
73 प्रतिशत आरक्षण मिले: पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था. उच्च न्यायालय ने रजनीश मिश्रा बनाम झारखंड सरकार के वाद के आलोक में फैसला दिया था कि तमिलनाडु सरकार ने 69 प्रतशित आरक्षण का प्रावधान किया है, जो 50 प्रतिशत से अधिक है. माननीय उच्च न्यायालय का फैसला तीन वर्ष पूर्व इस पर आया है. आज कई राज्यों में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण का प्रावधान है. झारखंड में 73 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाये.
शराब पर पाबंदी लगे: उपवास के माध्यम से कहा गया कि झारखंड में शराब के कारण 98 प्रतिशत दुर्घटनाएं हो रही हैं. इसी तरह 95 प्रतिशत घेरलू हिंसा, 70 प्रतिशत आपराधिक घटनाएं हो रही हैं. राज्य में शराब पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगे. कहा गया कि राज्य सरकार मनमाने तरीके से पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर रही है. रामगढ़ के गोला में गोलीकांड इसका ताजा उदाहरण है.
सांप्रदायिक तनाव खत्म हो: वर्तमान में राज्य सरकार में डेढ साल के कार्यकाल में 50 से अधिक सांप्रदायिक दंगे हुए हैं. दंगाइयों को चिह्नित कर कठोर कार्रवाई नहीं की गयी. हजारीबाग, छडवा डैम दंगा के बाद आइजी तदाशा मिश्रा ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी है. स्थानीय पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाया.
रांची के दंगे की रिपोर्ट में सीआइडी, आइजी अनुराग गुप्ता ने पुलिस और बजरंग दल के नेताओं को दोषी ठहराया. बोकारो दंगा की रिपोर्ट में डीसी और एसपी ने स्थानीय विधायक द्वारा जुलूस का नेतृत्व कर जुलूस का रूट बदलने के कारण सांप्रदायिक तनाव की बात कही. हजारीबाग में गत 21 जुलाई की रात दुकान जला कर सांप्रदायिकता दंगा फैलाने का प्रयास किया गया. इन सारी घटनाओं की जांच रिपोर्ट पर सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की. इन सारी घटनाओं की न्यायिक जांच हो.
निवेश के नाम पर खर्च बंद हो: विपक्षी दल मांग करती है कि करोडों रुपये खर्च कर कोलकाता, बंगलुरु, मुंबई, दिल्ली में रोड शो करने के बजाय गिरिडीह, कोडरमा, हजारीबाग के बंद कल करखानों को शुरू कराया जाये. राज्य के छोटे-छोटे उद्योग, जो बंद हैं उसे खुलवाने की कोशिश हो.
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