तमिलनाडु में फंसी आठ लड़कियां एक फोन कॉल पर हुई मुक्त, गुमला एसडीओ से मांगी थी मदद

ये लड़कियां रांची आने के लिए मंगलवार को ट्रेन चढ़ेंगी. गुमला जिला की सात व बेड़ो की एक लड़की है. कौशल विकास योजना के तहत छह माह पहले ये लड़कियां सिलाई का प्रशिक्षण लेने गयी थी. छह माह का प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद ये लड़कियां अपने घर आना चाह रही थी. परंतु तमिलनाडु की कपड़ा कंपनी के लोग इन लड़कियों को अपने घर जाने नहीं दे रहे थे. इसके बाद लड़कियों ने हिम्मत जुटायी और गुमला एसडीओ से मदद मांगी.
गुमला : तमिलनाडु के त्रिपुर में सिलाई कंपनी में फंसी झारखंड राज्य की आठ लड़कियां सोमवार को एक फोन कॉल पर मुक्त हो गयीं. लड़कियों ने फोन कर गुमला एसडीओ रवि आनंद से मदद मांगी थी. एसडीओ ने मामले को गंभीरता से लिया. तमिलनाडु प्रशासन व श्रम विभाग को इसकी जानकारी दी. इसके बाद एक फोन कॉल पर तमिलनाडु प्रशासन ने लड़कियों की मदद की. सभी लड़कियां सुरक्षित हैं. तमिलनाडु से रांची आने के लिए ट्रेन का टिकट बुक हो गया है.
ये लड़कियां रांची आने के लिए मंगलवार को ट्रेन चढ़ेंगी. गुमला जिला की सात व बेड़ो की एक लड़की है. कौशल विकास योजना के तहत छह माह पहले ये लड़कियां सिलाई का प्रशिक्षण लेने गयी थी. छह माह का प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद ये लड़कियां अपने घर आना चाह रही थी. परंतु तमिलनाडु की कपड़ा कंपनी के लोग इन लड़कियों को अपने घर जाने नहीं दे रहे थे. इसके बाद लड़कियों ने हिम्मत जुटायी और गुमला एसडीओ से मदद मांगी.
सोमवार की शाम 5.45 बजे प्रभात खबर प्रतिनिधि ने एक लड़की को फोन किया. उनकी सुरक्षा व आने की व्यवस्था की जानकारी ली. इसी दौरान कंपनी के मैनेजर उन लड़कियों के पास पहुंच गया. कंपनी के लोगों ने लड़कियों को धमकाया कि तुम लोगों ने झारखंड में किसको कंप्लेन की है. लगातार कंपनी के मालिक को फोन आ रहा है. कंपनी के लोगों द्वारा धमकाने के बाद लड़कियों ने कहा कि हम झारखंड की बेटी हैं. किसी से डरने वाली नहीं है. हमारा प्रशिक्षण खत्म हो गया है. हम घर जायेंगे. कंपनी हमें रोक नहीं सकती. लड़कियों की इस बात को सुनने के बाद कंपनी के लोग चुप हो गये.
एसडीओ रवि आनंद ने बताया कि दोपहर में तमिलनाडु के त्रिपुर से एक लड़की ने फोन की. उन्होंने कहा कि सिलाई कंपनी के लोग झारखंड की आठ लड़कियों को घर जाने नहीं दे रहे हैं. कंपनी से नहीं निकलने की धमकी दी है. लड़कियों से पूरी जानकारी लेने के बाद संकट को देखते हुए तुरंत श्रम विभाग गुमला के अधीक्षक एतवारी महतो व स्टेट कंट्रोल झारखंड को इसकी सूचना दी.
विभाग हरकत में आया और लड़कियों को तमिलनाडु से झारखंड लाने की व्यवस्था की. एसडीओ ने कहा कि मेरे कुछ साथी तमिलनाडु में अधिकारी हैं. मैंने उनसे भी लड़कियों की सुरक्षा व झारखंड भेजने में मदद करने की अपील की. तमिलनाडु के हमारे साथी अधिकारियों ने लड़कियों की मदद की है. उनसे संपर्क कर उनकी सुरक्षा पर नजर रखे हुए हैं.
बेड़ो की सिमरन उरांव, गुमला जिला की बसंती कुमारी, सीता कुमारी, मरियम बिलुंग, सीता कुमारी, माला कुमारी, सीता कुमारी व संतोषी कुमारी हैं. इसमें एक लड़की ने प्रभात खबर को फोन कर बताया कि हमलोग पढ़ लिखकर यहां सिलाई सीखने आयी हैं. हमारी झारखंड की सरकार चाहती तो हमें अपने ही राज्य व जिला में प्रशिक्षण देकर रोजगार दे सकती थी. परंतु कौशल विकास के नाम पर हमें इतनी दूर भेज दिया. यह सरकारी राशि का दुरुपयोग है.
आठों लड़कियां जब रांची में ट्रेन से उतरेंगी. तो इन लड़कियों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए गुमला से सवारी गाड़ी जायेगी. एसडीओ ने श्रम अधीक्षक एतवारी महतो को गाड़ी की व्यवस्था करने के लिए कहा है. जिससे लड़कियों के रांची पहुंचते ही उन सभी को उनके घर सकुशल पहुंचाना है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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