जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर बच्चे, अंबाटोली स्कूल की छत दे रही हादसे को न्योता

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स्कूल के बाहर छात्र | Prabhat Khabar Network

गुमला के अंबाटोली प्राथमिक विद्यालय की छत जर्जर है, जिससे बच्चों की जान को खतरा है. शौचालय और पेयजल की भी भारी किल्लत है। प्रशासन से मदद की गुहार लगाई गई है.

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प्रेम प्रकाश भगत की रिपोर्ट

डुमरी (गुमला): जिले के डुमरी प्रखंड की जैरागी पंचायत स्थित अंबाटोली उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है. कमरों और बरामदे की छत से प्लास्टर उखड़ गया है और सरिया बाहर निकल आयी है. इसके बावजूद कक्षा पहली से पांचवीं तक के 16 नामांकित बच्चों की पढ़ाई इसी असुरक्षित भवन में करायी जा रही है. ऐसे में कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है.

विद्यालय के प्रधानाध्यापक स्टीफन मुंडा ने बताया कि जर्जर भवन की जानकारी कई बार विभागीय अधिकारियों को दी गयी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस बार कम बारिश के कारण किसी तरह पढ़ाई चल रही है, जबकि सामान्य बारिश होने पर स्थिति बेकाबू हो जाती है.

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अबतक नहीं उठाया गया कोई ठोस कदम

विद्यालय का शौचालय भी बदहाल है. वहीं, स्वच्छ पेयजल की सुविधा नहीं होने के कारण बच्चे कुएं का पानी पीने को मजबूर हैं. करीब एक वर्ष पूर्व डुमरी बीडीओ और जेई जयंत उरांव ने विद्यालय का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

हाल ही में पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने भी विद्यालय का निरीक्षण किया और नये भवन के निर्माण का भरोसा दिलाया है. ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन समिति ने प्रशासन से विद्यालय के नये भवन का निर्माण कराने, शौचालय की मरम्मत कराने और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था अविलंब करने की मांग की है.

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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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