गुमला नगर परिषद की ‘कथा’ में नया अध्याय, तबादले से पहले ही विदा हुए सिटी मैनेजर

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गुमला नगर परिषद के सिटी मैनेजर का दो दिन पहले ही तबादला हो गया. जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है. जानिए क्या है पूरा मामला.

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गुमलाः नगर परिषद इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर लगातार चर्चा में है. नगर परिषद की ‘कथा’ का असर अब अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच भी दिखने लगा है. जिन लोगों को कल तक किसी अधिकारी के कामकाज पर सवाल उठाते देखा जाता था, उनमें से कुछ अब नजदीकियां बढ़ाते नजर आ रहे हैं. वहीं, कुछ जनप्रतिनिधि ऐसे भी हैं, जो अब विवादों से दूरी बनाने में ही भलाई समझ रहे हैं.

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तबादला सात सितंबर को, दो दिन पहले ही विदाई

आज नगर परिषद की इसी ‘कथा’ में चर्चा सिटी मैनेजर की है. सिटी मैनेजर का तबादला हो चुका था और उन्हें सात सितंबर को गुमला से विदाई लेनी थी. लेकिन नगर परिषद से उनका मोह शायद इतना अधिक था कि तबादले के बाद भी वे कई दिनों तक गुमला में जमे रहे. हालांकि, नगर परिषद की लगातार चर्चा के बीच उन्होंने निर्धारित तारीख से दो दिन पहले ही गुमला से विदाई ले ली.

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जिनसे खफा थे, उन्हीं ने बुके देकर दी विदाई

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिन जनप्रतिनिधियों और लोगों को सिटी मैनेजर के कामकाज से नाराज बताया जाता था, उन्हीं में से कुछ ने उन्हें बुके देकर विदाई दी. हॉल के भीतर विदाई समारोह हुआ, तस्वीरें खिंचीं और मुस्कुराते चेहरों के साथ अधिकारी को विदाई दी गयी. लेकिन समारोह खत्म होने के बाद कहानी का दूसरा पहलू भी सामने आया.

एक जनप्रतिनिधि ने कहा, ‘चलो, एक बला से पीछा छूटा. नहीं तो अपने को साहब से कम नहीं समझता था. जाना सात सितंबर को था, पांच को ही विदा ले लिये. चलो, ठीक ही हुआ. अब नये सिटी मैनेजर से काम की उम्मीद है.’

फाइलों की भूमिका की भी होनी चाहिए जांच

सिटी मैनेजर लंबे समय तक गुमला नगर परिषद में रहे हैं. ऐसे में उनके कार्यकाल के दौरान किये गये कामों और निपटायी गयी महत्वपूर्ण फाइलों की भी जांच होनी चाहिए, ऐसी चर्चा नगर परिषद में है. कई फाइलों को आगे बढ़ाने और निपटाने में सिटी मैनेजर की भूमिका अहम रहती थी. बड़े साहब तक फाइल पहुंचने से पहले उसका हिसाब-किताब इन्हीं साहब के पास रहने की चर्चा भी होती रही है.

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उपाध्यक्ष के करीब, अध्यक्ष से दूरी की भी रही चर्चा

नगर परिषद में सिटी मैनेजर की भूमिका को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं होती रही हैं. कहा जाता है कि वे नगर परिषद के उपाध्यक्ष के काफी करीब रहे, जबकि अध्यक्ष से उनकी दूरी बनी रही. उनके जाने के बाद नगर परिषद कार्यालय के कई कर्मचारियों ने भी राहत की सांस ली है.

शहर को नये सिटी मैनेजर से उम्मीद

सिटी मैनेजर के जाने के बाद अब शहरवासियों की निगाहें नये सिटी मैनेजर पर टिकी हैं. नये अधिकारी गुमला शहर और यहां की समस्याओं से भलीभांति परिचित हैं. ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि नगर परिषद की कार्यशैली में बदलाव आयेगा और शहर के विकास से जुड़े कामों को गति मिलेगी.

इधर, कुछ जनप्रतिनिधियों ने सिटी मैनेजर को विदाई देने के बाद सोशल मीडिया पर समारोह की तस्वीरें भी साझा की हैं. तस्वीरों में मुस्कुराते हुए विदाई देने वाले यही लोग बाद में उनके कामकाज की आलोचना करते भी नजर आये. यानी नगर परिषद की ‘कथा’ अभी खत्म नहीं हुई है. आगे भी कई अध्याय खुलने बाकी हैं.

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