नक्सलियों के दस्ते में आज भी हैं बच्चे

नकुल व मदन के मंसूबे ठीक न देख कर रवींद्र गंझू ने सभी बच्चों को अपने दस्ते में रख लिया है. रिपोर्ट के अनुसार बिशुनपुर के करीब 30 से 35 बच्चे अभी भी गायब हैं. दो-तीन साल पहले सभी बच्चों को नक्सली उठा कर ले गये थे. दुर्जय पासवान गुमला : बिशुनपुर प्रखंड के कसमार […]
नकुल व मदन के मंसूबे ठीक न देख कर रवींद्र गंझू ने सभी बच्चों को अपने दस्ते में रख लिया है. रिपोर्ट के अनुसार बिशुनपुर के करीब 30 से 35 बच्चे अभी भी गायब हैं. दो-तीन साल पहले सभी बच्चों को नक्सली उठा कर ले गये थे.
दुर्जय पासवान
गुमला : बिशुनपुर प्रखंड के कसमार इलाके से दो तीन साल पहले भाकपा माओवादियों द्वारा उठा कर ले जाये गये बच्चे अभी भी नक्सली दस्ते में हैं. सरेंडर किये हार्डकोर नक्सली नकुल यादव व मदन यादव के मंसूबों को भांपते हुए हार्डकोर नक्सली रवींद्र गंझू ने सभी बच्चों को अपने दस्ते में रख लिया है. ये बच्चे दस्ते में हथियार व नक्सलियों का सामान ढोने का काम कर रहे हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करीब 30 से 35 बच्चे रवींद्र के दस्ते में घूम रहे हैं. ये सभी बच्चे बिशुनपुर प्रखंड के कसमार व लोहरदगा के पेशरार क्षेत्र के हैं. इसका खुलासा नक्सली दस्ते से भाग कर घर लौटी सरिता ने किया है. सरिता खुद नक्सलियों की प्रताड़ना की शिकार हो चुकी है. उसकी शादी अधेड़ नक्सली अनिल से जबरन करा दी गयी थी. जिससे वह गर्भवती हुई. अभी उसका डेढ़ माह का बेटा है. सुरक्षा के दृष्टिकोण से उसे गुमला नारी निकेतन में रखा
गया है.
सरिता पांच लड़कियों के साथ भागी थी
सरिता ने बताया कि नक्सली बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार करते हैं. जिससे धीरे-धीरे बच्चे भाग रहे हैं. सरिता खुद पांच लड़कियों के साथ संगठन छोड़ कर भागी थी. पांच माह पहले जब वह भागी थी. उस समय संगठन में दर्जनों कम उम्र के लड़का-लड़की थे. जिनसे नक्सली कई तरह का काम कराते थे.
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