जनप्रतिनिधियों के तालमेल में अभाव, नहीं हुआ

Published at :16 Nov 2015 8:29 PM (IST)
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जनप्रतिनिधियों के तालमेल में अभाव, नहीं हुआ

जनप्रतिनिधियों के तालमेल में अभाव, नहीं हुआ हेडिंग- भौरों पंचायत का विकासएलडीजीए- 1 बनाया गया पंप हाउस. एलडीजीए- 2 उपेक्षित स्मारक स्थल. एलडीजीए- 3 शहादत. एलडीजीए- 4 पचू. एलडीजीए- 5 महावीर साहू.भंडरा/लोहरदगा. भंडरा प्रखंड का भौरों पंचायत कृषि के क्षेत्र में अग्रणी है. यहां के किसान अपनी मेहनत से विपरीत परिस्थिति में भी उन्नत कृषि […]

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जनप्रतिनिधियों के तालमेल में अभाव, नहीं हुआ हेडिंग- भौरों पंचायत का विकासएलडीजीए- 1 बनाया गया पंप हाउस. एलडीजीए- 2 उपेक्षित स्मारक स्थल. एलडीजीए- 3 शहादत. एलडीजीए- 4 पचू. एलडीजीए- 5 महावीर साहू.भंडरा/लोहरदगा. भंडरा प्रखंड का भौरों पंचायत कृषि के क्षेत्र में अग्रणी है. यहां के किसान अपनी मेहनत से विपरीत परिस्थिति में भी उन्नत कृषि उपज लेते हैं. यहां के किसानों की उपज के आधार पर इनकी पहचान झारखंड के सब्जी बाजार के अलावा छत्तीसगढ़, ओड़िशा, मध्यप्रदेश, बंगाल, उतरप्रदेश के सब्जी बजारों में है. भौंरो गांव की पहचान यहां के स्वतंत्रता शहीद पांडेय गणपत राय से भी जानी जाती है. 1857 का विद्रोह में इस गांव का सपूत अंग्रेजों के खिलाफत कर स्वतंत्रता की लड़ाई में अपना अमूल्य योगदान देकर शहीद हुआ था. विकास के क्षेत्र में एक शहीद के गांव का विकास जहां तक होना चाहिए, वह नहीं हो सका. विकास का दावा करने वाले सरकार के मंत्री, जनप्रतिनिधियों का झूठा आश्वासन सुन-सुन कर यहां के लोग आदि हो चुके हैं. यहां के लोग नेताओं के भाषण को ठगने वाला भाषण कहते है. पंचायती राज आने के बाद यहां के लोगों में आशा जगी थी कि स्थानीय लोग पंचायत का प्रतिनिधित्व करेंगे, तो पंचायत का विकास होगा. परंतु लोगों की बात के आधार पर यहां पंचायत प्रतिनिधियों का ध्यान विकास की ओर नहीं गया. भौंरो पंचायत में कृषि के साथ-साथ दूध उत्पादन भी किया जाता है. किसानों का दूध उत्पादन का बाजार उपलब्ध नहीं था. लोग औने पौने दाम में दूध बेचते थे. भौरों नदी टोली का युवक शहादत अंसारी दूध उत्पादकों को एक दिशा दी. स्थानीय किसानों से दूध लेकर वह डेयरी पहुंचाता है. दूध उत्पादकों को डेयरी से लाभ हो रहा है. वह बताता है कि पंचायत के पांच साल के कार्यकाल में बिचौलिया हावी थे. मुखिया स्थानीय ग्रामीणों की नहीं सुनती थी बल्कि बिचौलिया के माध्यम से ही काम होता था. सोरंदा बांध टोली गांव निवासी अख्तर अंसारी बताते हैं कि भौंरो पंचायत में सभी ग्रेड वन व मिट्टी मोरम सड़क का निर्माण किया गया. भौंरो से खावा टोली निवासी पंचू उरांव वार्ड नंबर एक का वार्ड सदस्य था. अब यह वार्ड महिला सदस्य के लिए आरक्षित है. उसका कहना है कि पंचायत में बलुआ टोली व खवा टोली में विकास का कोई काम नही हुआ. दोनों टोली के प्रति मुखिया अनिता उदासीन थी. पंसस विनुमति देवी के अनुसार मुखिया पंचायत के अन्य प्रतिनिधियों से संपर्क नहीं रखती थी. उपमुखिया बाहर रहते हैं. प्रतिनिधियों का तालमेल में कमी के कारण पंचायत का विकास अपेक्षित नहीं हुआ. भौंरो गांव निवासी महावीर साहू का कहना है कि भौंरो गांव में पेयजल, कोल्ड स्टोरेज, सिंचाई का साधन, सिंचाई हेतु बिजली, नदी के चेक डैमों की सफाई, चेक डैमों में लिफ्ट लगाने की जरूरत है. सोरंदा गांव निवासी रहमान खान, परवेज मिरदाहा, बिरसा उरांव सहित अन्य लोगों को कहना है कि गांवों की समस्या पर पंचायत प्रतिनिधि यों का कोई ध्यान नहीं है. सोरंदा गांव के लोग चार महिना से बिजली समस्या से झेल रहे हैं, परंतु इसकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता है. इस संबंध में भौरो पंचायत की मुखिया अनिता कुमारी से मोबाईन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु संपर्क नहीं हुआ.

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