शहीद के प्रखंड जारी में नहीं है अस्पताल, बीमार पड़ने पर इलाज कराने छत्तीसगढ़ जाते हैं लोग

Published at :06 Jun 2018 6:03 AM (IST)
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शहीद के प्रखंड जारी में नहीं है अस्पताल, बीमार पड़ने पर इलाज कराने छत्तीसगढ़ जाते हैं लोग

गुमला : झारखंड की माटी के लाल परमवीर चक्र विजेता लांस नायक शहीद अलबर्ट एक्का, जिसे पूरा हिंदुस्तान नमन करता है, जिनके अदम्य साहस की कहानी सुन कर सीना चौड़ा हो जाता है. लेकिन दुर्भाग्य है, इस महान सपूत वीर शहीद के प्रखंड जारी में अस्पताल नहीं है. आज भी जारी प्रखंड के लोग इलाज […]

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गुमला : झारखंड की माटी के लाल परमवीर चक्र विजेता लांस नायक शहीद अलबर्ट एक्का, जिसे पूरा हिंदुस्तान नमन करता है, जिनके अदम्य साहस की कहानी सुन कर सीना चौड़ा हो जाता है. लेकिन दुर्भाग्य है, इस महान सपूत वीर शहीद के प्रखंड जारी में अस्पताल नहीं है.

आज भी जारी प्रखंड के लोग इलाज के अभाव में परेशान रहते हैं. बीमार पड़ने पर इलाज कराने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य जाना पड़ता है, क्योंकि छत्तीसगढ़ राज्य ठीक जारी प्रखंड से सटा हुआ है.
चूंकि गुमला आने वाली सड़क खराब है. इस सड़क से बीमार तो दूर, गर्भवती को भी लाना खतरनाक है. इस कारण लोग गुमला, चैनपुर व डुमरी जाने के बजाय छत्तीसगढ़ राज्य चले जाते हैं. सड़क भी अच्छी है. इस कारण लोग आसानी से छत्तीसगढ़ राज्य के अस्पताल में जाकर इलाज कराते हैं. इधर, जारी प्रखंड में अस्पताल नहीं बनने पर शहीद के बेटे भिंसेंट एक्का ने कहा कि सरकार बताये कि हम इलाज के लिए कहां जायें? बीमार पड़ने पर या तो मरना पड़ेगा या फिर इलाज के लिए छत्तीसगढ़ राज्य जाना पड़ेगा. उन्होंने झारखंड सरकार से मांग की है कि अधूरे पड़े अस्पताल का निर्माण करा कर जल्द स्वास्थ्य सुविधा जारी प्रखंड में उपलब्ध कराये.
पांच करोड़ का अस्पताल नहीं बना
जारी प्रखंड बनने के बाद वर्ष 2011 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण जारी गांव में हो रहा था. पांच करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल भवन बन रहा था. आधा काम हो गया है. कुछ हिस्सों में ढलाई भी हो गयी है, लेकिन वर्ष 2012 में जारी प्रखंड की जनसंख्या कम बता कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण रोक दिया गया. इसके बाद से फिर काम नहीं हुआ. आज तक काम बंद है, जबकि जारी प्रखंड की पांच पंचायत के 52 गांव में करीब 33 हजार आबादी है. इतनी आबादी होने के बाद भी जारी प्रखंड में अस्पताल नहीं बन रहा है. इसी क्षेत्र के सांसद व विधायक भी हैं. इसके बावजूद शहीद के प्रखंड में अस्पताल नहीं बन रहा है और लोगों को बीमार होने पर भटकना पड़ रहा है.
झोलाछाप डॉक्टर के चंगुल में शहीद का प्रखंड
जारी प्रखंड में अस्पताल नहीं है. प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र है, तो उसकी स्थिति भी दयनीय है. नर्स नहीं रहते हैं. नतीजा शहीद के प्रखंड के लोग झोलाछाप डॉक्टर के चंगुल में फंसे हुए हैं. रात में अगर कोई बीमार पड़ जाये और छत्तीसगढ़ या गुमला नहीं जा पाये, तो गांव के ही झोलाछाप डॉक्टर की शरण में जाते हैं. कई बार लोगों की जान अाफत में पड़ जाती है. इधर, खराब सड़क व स्वास्थ्य सुविधा नहीं होने से अब लोगों का नेताओं से भरोसा उठ रहा है. जनता की समस्या को दूर करने के लिए जनप्रतिनिधि आवाज नहीं उठा रहे हैं.
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