कार्तिक उरांव के गांव के स्कूल में मैथ व साइंस के शिक्षक नहीं

Published at :29 Oct 2017 1:01 PM (IST)
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कार्तिक उरांव के गांव के स्कूल में मैथ व साइंस के शिक्षक नहीं

गुमला: गुमला से करीब 10 किमी की दूरी पर लिटाटोली गांव है. इसी गांव में प्रतिभा के धनी व कुशाग्र बुद्धि के कार्तिक उरांव का जन्म हुआ था. कार्तिक उरांव ने अभियांत्रिक के क्षेत्र में महारत हासिल कर गुमला जिले का नाम रोशन किया था. लेकिन दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमैटिक पावर स्टेशन का प्रारूप […]

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गुमला: गुमला से करीब 10 किमी की दूरी पर लिटाटोली गांव है. इसी गांव में प्रतिभा के धनी व कुशाग्र बुद्धि के कार्तिक उरांव का जन्म हुआ था. कार्तिक उरांव ने अभियांत्रिक के क्षेत्र में महारत हासिल कर गुमला जिले का नाम रोशन किया था. लेकिन दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमैटिक पावर स्टेशन का प्रारूप ब्रिटिश सरकार को देने वाले कार्तिक उरांव के गांव में स्थित प्रोजेक्ट कार्तिक उरांव हाई स्कूल लिटाटोली में मैथ व साइंस के शिक्षक नहीं है.

जिस गांव के बेटे ने पूरे देश में नाम कमाया. उन्हें आदिवासी समाज के लोग आज भी भगवान की तरह पूजते हैं. उन्हीं के गांव के बच्चे आज के इस हाइटेक व वैज्ञानिक युग में मैथ व साइंस की शिक्षा से वंचित हैं. स्कूल में शिक्षकों के स्वीकृत पद आठ हैं, जिसमें मात्र तीन शिक्षक हैं, जो 315 बच्चों को पढ़ाते हैं. यहां वर्ग सात से लेकर 10 तक की पढ़ाई होती है. स्कूल में शौचालय भवन बेकार है. शिक्षक व बच्चे खुले में शौच जाते हैं. एक चापानल है. र्मी में पानी नहीं निकलता है. बच्चे मध्याह्न भोजन खाने के बाद नजदीक के तालाब में बर्तन व हाथ-मुंह धोने जाते हैं. स्कूल की चहारदीवारी नहीं हुई है. असामाजिक तत्व व जानवर स्कूल में घुस जाते हैं. बेंच-डेक्स की कमी है. एक बेंच में चार से पांच बच्चे बैठते हैं.

एचएम सोहन साहू ने कहा

स्कूल के एचएम सोहन साहू, सहायक शिक्षक संदीप टोप्पो व रजनी कुजूर हैं. एचएम ने बताया कि स्कूल में समस्याओं को अंबार है. कई बार समस्या दूर करने की मांग की, लेकिन कोई ध्यान नहीं देते हैं. इस कारण हमारे पास जो संसाधन व सुविधा है. उसी के अनुसार स्कूल का संचालन कर रहे हैं. उन्होंने चहारदीवारी, शौचालय व चापानल बनवाने की मांग की है.

भवन बना कर छोड़ दिया, उपयोग नहीं

स्कूल परिसर में वर्ष 2012 में स्कूल भवन बनना शुरू हुआ है. 2015 में भवन बन कर तैयार हो गया. भवन 64 लाख रुपये की लागत से बना है. भवन प्रमंडल विभाग ने स्कूल बनाया है. अभी तक स्कूल को हैंडओवर नहीं किया गया है. दो साल में ही स्कूल भवन जर्जर व भूत बंगला हो गया है. खिड़की व दरवाजा नहीं लगा है. अगर कुछ बहुत लगा था, तो उसकी चोरी हो गयी है.

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