गोड्डा में सुस्त पड़ी सुपर ग्रिड बनाने की योजना

Updated at : 13 May 2017 8:48 AM (IST)
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गोड्डा में सुस्त पड़ी सुपर ग्रिड बनाने की योजना

दो सौ करोड़ की योजना को धरातल पर उतारने में पिछड़ा जिला प्रशासन डेढ़ वर्ष में डेढ़ गज भी जमीन का नहीं हो पाया अधिग्रहण सुपर ग्रिड बनेगा तो दूर हो जायेगी जिले की बिजली संकट गोड्डा : गोड्डा में सुपर ग्रिड बनाने की योजना अधर में लटकी हुई है. करीब डेढ़ से दो करोड़ […]

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दो सौ करोड़ की योजना को धरातल पर उतारने में पिछड़ा जिला प्रशासन
डेढ़ वर्ष में डेढ़ गज भी जमीन का नहीं हो पाया अधिग्रहण
सुपर ग्रिड बनेगा तो दूर हो जायेगी जिले की बिजली संकट
गोड्डा : गोड्डा में सुपर ग्रिड बनाने की योजना अधर में लटकी हुई है. करीब डेढ़ से दो करोड़ की योजना को धरातल पर उतारने में जिला प्रशासन अभी भी कोसों दूर है. डेढ़ वर्ष में डेढ़ गज जमीन का भी अधिग्रहण नहीं हो पाया है. जिस गति से ग्रिड की स्वीकृति तत्कालीन जनप्रतिनिधियों ने दिलायी थी. उस हिसाब से काम शुरू नहीं हो पाया है.
कहां फंसा है पेंच : मालूम हो कि दो लाख पावर की क्षमता वाले सुपर ग्रिड प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिये विभाग को तकरीबन 18 से 20 एकड़ की जमीन चाहिए. इस प्रोजेक्ट को बनाये जाने के लिये सबसे पहले गोड्डा काॅलेज के पीछे वाले भू-भाग का चयन किया गया था.
हालांकि जमीन कम थी. फिर भी बनाया जा सकता था. पर वन विभाग के कारण ग्रिड नहीं बनाया जा सका. पुन: पथरगामा के माल निस्तारा पंचायत में रैयती जमीन को ली गयी. अधिग्रहण कराये जाने के लिये विभाग की ओर से प्रक्रियाएं भी पूरी की जा रही है.
लेकिन जिस तरीके से काम हो रहा है. उसमें एक वर्ष और लग जायेगा. दुमका ट्रांसमिशन विभाग तो लगातार इस ओर प्रयास कर रहा है. जमीन अधिग्रहण की समस्या आड़े आ रही है. यदि यह काम तेजी से किया जाता है तो आनेवाले कुछ ही महीनों में निश्चित रूप से इस योजना का शिलान्यास कार्यक्रम हो जाता.
ग्रिड से दूर होगी बिजली संकट की समस्या : सुपर ग्रिड के निर्माण होने से जिले में जारी विद्युत संकट की समस्या दूर होगी. गोड्डा जिला मुख्यालय में 30 किमी दूर से बिजली लानी पड़ती है. साथ ही खराब मैनेजमेंट व रखरखाव के कारण आपूर्ति सही मिल नहीं पाती है. नया ग्रिड गांधीग्राम के पास लग जाता है, तो निश्चित रूप से परेशानी दूर होगी. वोल्टेज आदि की समस्या भी दूर होगी. लेकिन इसके लिये लिये सबों को लगने की जरूरत है. चाहे वह फिर इस जिले के जनप्रतिनिधि हो या फिर इस जिले के पदाधिकारी.
जिंदल व अडाणी की तर्ज पर हो जमीन अधिग्रहण
इस योजना का दुर्भाग्य यह है कि अडाणी व जिंदल की तर्ज पर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया नहीं हो पा रही है. इसमें सुस्ती बरती जा रही है. जिस प्रकार से सरकार व जिला प्रशासन ने अडाणी व जिंदल को बसाये जाने के लिये अपनी इच्छाशक्ति दिखायी. उसी प्रकार से इस योजना को पूरा करने में इच्छाशक्ति दिखानी होगी.
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