बेंगाबाद में वीबी जी रामजी योजना के 12,500 मजदूरों की मजदूरी अटकी, दो माह बाद भी भुगतान नहीं

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बेंगाबाद में वीबी-रामजी योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों को दो माह बाद भी मजदूरी नहीं मिली है. प्रक्रिया की जटिलता के कारण भुगतान में देरी हो रही है.

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बेंगाबाद. मजदूरों को साल में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने के उद्देश्य से शुरू की गयी वीबी जी रामजी योजना को लागू हुए दो माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बेंगाबाद में अब तक एक भी मजदूर को मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है. मजदूरों की मजदूरी भुगतान प्रक्रिया में देरी के कारण योजनाओं के संचालन पर भी असर पड़ रहा है.

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मनरेगा की तरह वीबी जी रामजी योजना में भी मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के अंदर करने का प्रावधान है. इसके बावजूद भुगतान लंबित है. मजदूरी नहीं मिलने के कारण मजदूर इस योजना में काम करने से भी कतरा रहे हैं. इससे पंचायतों में चल रही योजनाओं को समय पर पूरा करने में परेशानी हो रही है.

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मनरेगा की योजनाएं हुईं वीबी जी रामजी में कनवर्ट

वीबी जी रामजी योजना एक जुलाई से प्रभावी हुई है. इसके तहत प्रखंड में संचालित मनरेगा की योजनाओं को अपडेट कर दिया गया है. पहले मनरेगा में मजदूरों को साल में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी, जिसे बढ़ाकर 125 दिन किया गया है. मजदूरी दर भी 282 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन करने का प्रावधान है.

नई व्यवस्था में मजदूरी का भुगतान सीधे राज्य स्तर से नहीं, बल्कि जिला ट्रेजरी के माध्यम से मजदूरों के खातों में किया जाना है. इसी प्रक्रिया के कारण भुगतान में देरी की बात सामने आ रही है. एफटीओ तैयार होने और राशि आवंटित होने के बावजूद मजदूरों के खाते में राशि नहीं पहुंच रही है.

25 पंचायतों के करीब 12,500 मजदूरों का भुगतान लंबित

प्रखंड की सभी 25 पंचायतों में करीब 12,500 मजदूरों के लिए डिमांड किया गया है. वेजलिस्ट तैयार कर एफटीओ के लिए जिला ट्रेजरी को भेजी जा चुकी है. प्रखंड स्तर से समय-समय पर वेजलिस्ट जिले को भेजे जाने के बावजूद मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा है.

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बताया जा रहा है कि ट्रेजरी स्तर पर तकनीकी समस्या के कारण भुगतान में परेशानी आ रही है. वहीं, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (बीपीओ) कुमारी हेमलता के अनुसार भुगतान के लिए वेजलिस्ट लगातार जिले को भेजी जा रही है, लेकिन मजदूरों के खाते में राशि नहीं पहुंच पा रही है.

मजदूरी भुगतान में देरी से मजदूरों के बीच नाराजगी है. साथ ही समय पर भुगतान नहीं होने से पंचायतों में संचालित योजनाओं को पूरा करने में भी परेशानी बढ़ रही है.

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