राधास्वामी संगठन मामला: बिहार-झारखंड के कई जिलों तक पहुंची जांच, जानें ईडी की रडार पर क्यों आई शेल कंपनियां

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राधास्वामी संगठन का बंद पड़ा कार्यालय | Prabhat Khabar Network

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राधास्वामी संगठन अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में आ गया है. करोड़ों रुपये की कथित ठगी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच पटना इकाई द्वारा शुरू कर दी गई है. ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है.

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गिरिडीह. करोड़ों रुपये की कथित ठगी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से घिरे राधास्वामी संगठन और उससे जुड़े नेटवर्क की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तक पहुंच गयी है. पुलिस जांच में सामने आये तथ्यों के आधार पर ईडी की पटना इकाई ने मामले से संबंधित सूचनाएं जुटानी शुरू कर दी हैं. सूत्रों के अनुसार, झारखंड और बिहार के विभिन्न जिलों में दर्ज प्राथमिकी, वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है. जांच एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है.

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कई जिलों में दर्ज मामलों का ब्योरा जुटा रही ईडी

सूत्रों के मुताबिक ईडी उन थाना क्षेत्रों से जानकारी ले रही है, जहां राधास्वामी संगठन, उसके पदाधिकारियों और उससे संबद्ध संस्थाओं के खिलाफ मामले दर्ज हैं. गिरिडीह समेत झारखंड और बिहार के कई जिलों में दर्ज प्राथमिकी की प्रतियां और जांच रिपोर्ट जुटायी जा रही हैं. जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि लाभुकों और निवेशकों से प्राप्त धनराशि किस माध्यम से एकत्र की गयी और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया.

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वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की होगी पड़ताल

जांच एजेंसियां आरएसओजी से जुड़ी कंपनियों और कथित शेल कंपनियों के वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण कर रही हैं. यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वर्षों के दौरान जुटायी गयी राशि किन-किन बैंक खातों तक पहुंची और उससे कहां-कहां चल एवं अचल संपत्तियां अर्जित की गयीं. सूत्रों का कहना है कि जांच में पर्याप्त आधार मिलने पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा सकती है.

पचंबा थाना में दर्ज दो मामलों की जानकारी ली

गिरिडीह के पचंबा थाना में संगठन से संबंधित दो प्राथमिकी दर्ज हैं. सूत्रों के अनुसार, ईडी की पटना टीम इन मामलों की प्रगति और उपलब्ध साक्ष्यों के संबंध में जानकारी ले चुकी है. पुलिस भी इन मामलों की जांच तेज कर चुकी है. साथ ही उन शिकायतों की भी समीक्षा की जा रही है, जिनमें संगठन से जुड़े लोगों के माध्यम से निवेश कराने या राशि जमा कराने के आरोप लगे हैं.

पांच बैंक खातों में लेन-देन पर रोक

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संगठन के प्रदेश प्रभारी मुकेश कुमार सिन्हा और जिला प्रभारी अनीशा सिन्हा से जुड़े बंधन बैंक के पांच खातों में लेन-देन पर रोक लगायी गयी है. जांच एजेंसियां इन खातों में हुए वित्तीय लेन-देन का ब्योरा खंगाल रही हैं. आधिकारिक स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं की गयी है, लेकिन सूत्र इसे जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बता रहे हैं.

छापेमारी में मिले दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन

इससे पहले धोखाधड़ी के एक मामले में पुलिस ने मुकेश कुमार सिन्हा, अनीशा सिन्हा, सुबोध सिंह और सुमित सिन्हा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. बाद में पुलिस ने मुकेश कुमार सिन्हा को रिमांड पर लेकर पूछताछ की. पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर उनके आवास और कार्यालय में छापेमारी की गयी. छापेमारी के दौरान कई दस्तावेजों के साथ नोट गिनने की मशीन भी बरामद की गयी थी. पुलिस बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है.

राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका भी जांच के दायरे में

पुलिस सूत्रों के अनुसार, राधास्वामी संगठन और उससे जुड़े कारोबारी नेटवर्क के संचालन में राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक कुमार शर्मा की भूमिका की भी जांच की जा रही है. विभिन्न मामलों में उनका नाम सामने आने के बाद पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है. पचंबा थाना में दर्ज मामलों में भी उन्हें आरोपी बनाया गया है. सूत्रों के अनुसार, वह फिलहाल पुलिस की पहुंच से बाहर हैं.

एक्सप्लेनर : 10 से अधिक राज्यों तक फैला था नेटवर्क

पुलिस जांच में सामने आया है कि वर्ष 2010 में राधास्वामी संगठन नामक संस्था की शुरुआत की गयी थी. जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2010 से 2025 के बीच विभिन्न नामों से करीब 10 कंपनियां बनाकर 10 से अधिक राज्यों में गतिविधियां संचालित की गयीं. आरोप है कि विभिन्न योजनाओं और आकर्षक प्रस्तावों के माध्यम से लोगों से बड़ी मात्रा में धनराशि जुटायी गयी.

भारी छूट के दावों पर उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, दोपहिया और चारपहिया वाहन, आवास, फ्लैट तथा एफएमसीजी उत्पाद 40 से 90 प्रतिशत तक छूट पर उपलब्ध कराने के दावे किये जाते थे. समय पर वादे पूरे नहीं होने और राशि वापस नहीं मिलने के बाद विभिन्न जिलों में शिकायतें दर्ज करायी गयीं. इसके बाद पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की. जांच एजेंसियां अब पूरे वित्तीय नेटवर्क, बैंकिंग ट्रेल और कथित निवेश मॉडल की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं.

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