जयकारे से गुंजायमान हुआ पारसनाथ पर्वत
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Aug 2016 9:01 AM
मधुबन : प्रतिकूल मौसम, भारी भीड़ का दबाव तथा पारसनाथ पर्वत की 4750 फीट की उंचाईं, बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं रहा. देश के विभिन्न जगहों से आये लगभग दस हजार भक्तों ने मोक्ष सप्तमी के अवसर पर भगवान पार्श्वनाथ को निर्वाण लाडू अर्पित किया. पर्वत की तलहटी से पार्श्वनाथ टोंक के बीच श्रद्धालुओं […]
मधुबन : प्रतिकूल मौसम, भारी भीड़ का दबाव तथा पारसनाथ पर्वत की 4750 फीट की उंचाईं, बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं रहा. देश के विभिन्न जगहों से आये लगभग दस हजार भक्तों ने मोक्ष सप्तमी के अवसर पर भगवान पार्श्वनाथ को निर्वाण लाडू अर्पित किया. पर्वत की तलहटी से पार्श्वनाथ टोंक के बीच श्रद्धालुओं का तांता हर समस्या और कठिनाई को बौना साबित कर रहा था. इस आस्था की यात्रा में बच्चे, बूढ़े व युवा हर आयु वर्ग के लोग शामिल थे. जहां एक ओर नौ किलोमीटर की चढ़ाई पूरी करते हुए भगवान पार्श्वनाथ को निर्वाण लाडू अर्पित कर भक्तगण अपने आपको धन्य मान रहे थे, वहीं दूसरी ओर या़त्रा को सफल बनाने में जैन संस्था व प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद थे.
टोंक में हुई श्री जी की पूजा : पार्श्वनाथ टोंक में श्री जी की पूजा-अर्चना की गयी. इसके पूर्व श्री जी को मधुबन स्थित श्री दिगंबर जैन बीसपंथी कोठी से गाजे बाजे के साथ पार्श्वनाथ टोंक ले जाया गया. भक्तों की टोली श्री जी की प्रतिमा को सर पर रखकर ले गये. टोंक में पहुंचते ही पूजा का सिलसिला शुरू हो गया. साथ ही मंत्रों की झड़ी लग गयी. इस दौरान लोगों में पूजा देखने की होड़ लग गयी थी. मंदिर के अंदर पैर रखने को जगह नहीं थी.
खुला था प्राथमिक चिकित्सा केंद्र : पर्वत में किसी भी यात्री के साथ कोई अनहोनी न हो, इसके लिए संस्थाओं द्वारा भी व्यापक व्यवस्था की गयी थी. भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षे़त्र कमेटी द्वारा पर्वत में दो जगह प्राथमिक उपचार केंद्र लगाये गये थे. जहां गौतम स्वामी टोंक व पार्श्वनाथ टोंक में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था थी, वहीं डाकबंगला समेत अन्य जगहों में अल्पाहार व भोजन की व्यवस्था थी. वहीं दूसरी ओर कई तीर्थ यात्रियों द्वारा प्रसाद वितरण भी किया जा रहा था.
रातभर जागता रहा मधुबन: मोक्ष सप्तमी को ले सोमवार की रात मधुबन पूरी तरह से जागता रहा. शाम आठ बजे से ही भक्तों का जत्था पर्वत चढना शुरू कर दिया था और यह सिलसिला सुबह सात बजे तक चलता रहा. रात भर पैदल वंदना मार्ग में यात्रियों की चहलकदमी रही. दुकानें भी खुली रहीं. आम तौर पर रात में बंद हो जाने वाले विभिन्न संस्थाओं के गेट भी रात भर खुले रहे ओर लोगों की आवाजाही होती रही. हालांकि कई ऐसे यात्री भी थे जो डोली के सहारे पर्वत चढ़ रहे थे. ऐसे में डोली वालों की भी अच्छी खासी संख्या थी.
सुविधा को ले प्रशासन रहा चुस्त : बिजली को छोड़ पूरे महोत्सव के दौरान पानी, ट्रैफिक व सुरक्षा की मुकम्मल व्यवस्था थी. किसी भी तरह की परेशानी न हो इसके जवान लगातार गश्त कर रहे थे. ट्रैफिक व्यवस्था में नियंत्रण बनाए रखने के लिए वन वे कर दिया गया था. मधुबन स्थित शिवमंदिर के समीप जवानों की एक टीम ट्रैफिक व्यवस्था पर नजर बनाए हुई थी. वहीं समय-समय पर आलाधिकारी भी बाजार का जायजा ले रहे थे.
यहां से पहुंचे थे श्रद्वालु : महोत्सव में भाग लेने देश के विभिन्न जगहों से तीर्थ यात्री पूज- अर्चना करने पहुंचे थे. दिल्ली, मुजफ्फरनगर, बाराबांकी, बरेली, लखनऊ, ग्वालियर, भोपाल, कोलकाता, आगरा, चेन्नई, बडौत, समेत झारखंड एवं बिहार के विभिन्न जिलों से भारी संख्या में लोग मधुबन पहुंचे थे.
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