गढ़वा: चार स्टेडियम, करोड़ों खर्च फिर भी खेल सुविधाएं बेकार; अब नए स्टेडियम की तैयारी

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पुराने स्टेडियम | Prabhat Khabar Network

गढ़वा में एक किमी के दायरे में बने चार स्टेडियम करोड़ों खर्च के बाद भी बदहाल हैं। रखरखाव के अभाव में खेल परिसर वीरान पड़े हैं और कमरों में ताले लटके हैं।

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पीयूष तिवारी की रिपोर्ट

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गढ़वा. जिला मुख्यालय में करीब एक किलोमीटर के दायरे में चार बड़े खेल स्टेडियम हैं, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी इनका समुचित उपयोग नहीं हो रहा है. कई स्टेडियमों में खेल गतिविधियां सीमित हैं, दर्जनों कमरे सालों से बंद हैं, कहीं खिड़की-दरवाजे गायब हैं तो कहीं पूरा परिसर बदहाल पड़ा है.

रिनोवेशन के नाम पर लाखों खर्च

समय-समय पर मरम्मत और रिनोवेशन के नाम पर लाखों खर्च होते हैं, लेकिन खिलाड़ियों को लाभ नहीं मिल रहा. खेल प्रेमी सवाल उठा रहे हैं कि जब पुराने स्टेडियम ही नहीं संभल रहे, तो नए स्टेडियम का फायदा कब मिलेगा.

रामासाहू आउटडोर स्टेडियम - 2007 से उपेक्षित

रामासाहू आर्यवैदिक प्लस टू विद्यालय मैदान में 2007 में NREP से आउटडोर स्टेडियम बना था। साथ में कार्यालय और आवास के लिए दर्जन भर कमरे बने. बाद में भवन निर्माण विभाग ने रिनोवेशन भी कराया, लेकिन रखरखाव नहीं होने से खिड़की-दरवाजे गायब हो चुके हैं. सीढ़ियां टूटी हैं, परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है. कुछ साल तक यहां DAV स्कूल चला, उसके बाद से पूरा परिसर उपेक्षित है. मैदान भी समतल नहीं है, फिर भी बच्चे खेलते हैं और डे-बोर्डिंग में एथलेटिक्स और वॉलीबॉल का अभ्यास होता है. सिंथेटिक ट्रैक की मांग सालों से लंबित है.

इनडोर स्टेडियम - आधे से ज्यादा कमरे बंद

इसी परिसर में 2011 में बना इनडोर स्टेडियम भी पूरी तरह उपयोग में नहीं है. रिनोवेशन हो चुका है, लेकिन 2-3 कमरों को छोड़कर बाकी में शुरू से ताला लगा है. एक कमरे में कुश्ती की डे-बोर्डिंग, एक में जिम और एक में कार्यालय चल रहा है। आधा दर्जन कमरे और बड़ा हॉल खाली पड़ा है.

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1.56 करोड़ की शिबू सोरेन इनडोर स्टेडियम

कचहरी के सामने 2021 में 1.56 करोड़ से बना दिशोम गुरु शिबू सोरेन इनडोर स्टेडियम कोरोना काल में टीकाकरण केंद्र बना था. उसके बाद से कोई नियमित प्रशिक्षण नहीं. एक हॉल में निजी तौर पर लोग बैडमिंटन खेल लेते हैं, बाकी हॉल और दर्जन भर कमरों में ताले लटके हैं.

7 करोड़ का फुटबॉल स्टेडियम

अस्पताल के सामने कन्या मध्य विद्यालय मैदान में 7 करोड़ से फुटबॉल स्टेडियम बनाया गया है. यहां 10 से 14 साल के 25 बच्चों को आवासीय सुविधा के साथ प्रशिक्षण देना था, लेकिन योजना अब तक शुरू नहीं हुई. स्थानीय खिलाड़ी रोज अभ्यास जरूर करते हैं.

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नये बन रहे हैं लेकिन पुराने बदहाल

नया स्टेडियम भी बन रहा है पुराने स्टेडियमों की बदहाली के बीच कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में 14 करोड़ की लागत से नया भव्य इनडोर स्टेडियम बन रहा है, जिसमें बैडमिंटन, टेबल टेनिस समेत अन्य इनडोर खेलों के हाईटेक कोर्ट होंगे.

अब सवाल यही है कि जब पुराने स्टेडियमों के रखरखाव की व्यवस्था ही नहीं है, तो नए स्टेडियम का लाभ खिलाड़ियों तक कैसे पहुंचेगा?


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