प्रधानमंत्री किफायती आवास योजना में करोड़ों खर्च, फिर भी एक भी लाभुक को नहीं मिला घर

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नगर परिषद का निर्माणाधीन किफायती आवास | Prabhat Khabar Network

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गढ़वा में प्रधानमंत्री किफायती आवास योजना नौ साल बाद भी अधूरी है. 400 फ्लैट का काम अटका, लाभुक बैंक कर्ज और किराये के बोझ तले दबे हुए हैं.

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पीयूष तिवारी की रिपोर्ट

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गढ़वाः प्रधानमंत्री किफायती आवास योजना (शहरी) के तहत गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र के किराए के मकानों में रहने वाले 400 लोगों को अपना घर मिलने का इंतजार नौ साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है. वर्ष 2018-19 में शुरू हुई इस योजना पर अब तक 9.09 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन एक भी लाभुक को आवास नहीं मिल सका है. गढ़वा शहर के सोनपुरवा लाइन उस पार महुराम टोला में बन रहे किफायती आवास का निर्माण बेहद धीमी गति से चल रहा है.

योजना के तहत लाभुकों को किफायती दर पर बने-बनाए वन बीएचके फ्लैट उपलब्ध कराए जाने थे. लंबे समय से आवास का इंतजार कर रहे लाभुकों में नाराजगी है. इनमें कई ऐसे लाभुक भी हैं, जिन्होंने बैंक से कर्ज लेकर नगर परिषद में अपना अंशदान जमा किया है. अब उन्हें एक ओर किराए के मकान का खर्च उठाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर बैंक ऋण की किस्त भी चुकानी पड़ रही है.

कच्छप गति से चल रहा निर्माण

प्रधानमंत्री किफायती आवास योजना (शहरी) की क्रियान्वयन एजेंसी जुडको है. जुडको ने वर्ष 2017-18 में डीपीआर तैयार कर टेंडर किया था और वर्ष 2018-19 में निर्माण कार्य शुरू हुआ. इसके बाद से निर्माण की गति बेहद धीमी रही. योजना शुरू होने के समय इसकी लागत 25.84 करोड़ रुपए निर्धारित की गई थी. इसके तहत कुल 400 फ्लैट का निर्माण होना था. इनमें 64 फ्लैट का काम अभी फाउंडेशन (प्लिंथ) लेवल पर ही अटका हुआ है. वहीं, 336 फ्लैट का स्ट्रक्चर तैयार हो चुका है, लेकिन इनमें भी प्लास्टर, पेंट, दरवाजा-खिड़की, वायरिंग, पानी कनेक्शन, शौचालय, किचन, सीढ़ी की रेलिंग और फर्श समेत कई काम बाकी हैं.

विभाग के अनुसार योजना की भौतिक प्रगति 46 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति 34.72 प्रतिशत है. वित्तीय प्रगति के आधार पर अब तक संवेदक को 9.09 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है.

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लाभुकों के अंशदान से भी फंसा मामला

योजना के तहत प्रत्येक फ्लैट की वास्तविक लागत 6.46 लाख रुपए निर्धारित की गई है. इसमें लाभुक को 3.96 लाख रुपए अंशदान के रूप में जमा करने थे. शेष 2.50 लाख रुपए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अनुदान के रूप में दिए जाने हैं. इसमें केंद्र सरकार का 1.50 लाख और राज्य सरकार का एक लाख रुपए शामिल है. लाभुकों को चयन के समय पांच हजार रुपए देकर रजिस्ट्रेशन कराना था. यह राशि उनके कुल 3.96 लाख रुपए के अंशदान में शामिल की गई. इसके बाद लॉटरी के माध्यम से लाभुकों का चयन किया गया. रजिस्ट्रेशन से लेकर लाभुकों के चयन तक की प्रक्रिया नगर परिषद गढ़वा की देखरेख में हुई.

निर्माण की प्रगति के साथ जमा करनी थी राशि

चयन के बाद लाभुकों को 30 दिन के अंदर प्रथम किस्त के रूप में 20 हजार रुपए जमा करने थे. भवन का 25 प्रतिशत निर्माण पूरा होने पर 92,750 रुपए, 50 प्रतिशत निर्माण होने पर कुल जमा की जाने वाली राशि का 50 प्रतिशत और निर्माण पूरा होने पर शेष राशि जमा करनी थी. कई लाभुकों के पास अंशदान की राशि उपलब्ध नहीं थी. ऐसे लाभुकों ने बैंक से ऋण लेकर नगर परिषद में राशि जमा की. करीब 114 लाभुक निर्माण की प्रगति के अनुसार अपना अंशदान जमा कर चुके हैं. वहीं, अन्य लाभुकों ने रजिस्ट्रेशन कराने के बाद अपना अंशदान जमा नहीं किया. इससे योजना के निर्माण में पेंच फंस गया है.

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पुराने प्राक्कलन और वर्तमान लागत में बड़ा अंतर

योजना को शुरू हुए लंबा समय बीत जाने के कारण वर्तमान निर्माण लागत और पुराने प्राक्कलन में काफी अंतर आ गया है. बताया गया कि जब तक जुडको की ओर से प्राक्कलन को रिवाइज नहीं किया जाता, तब तक निर्माण कार्य को आगे बढ़ाना संभव नहीं है. यही वजह है कि योजना का काम लंबे समय से धीमी गति से चल रहा है और लाभुकों को अपने घर के लिए अभी और इंतजार करना पड़ रहा है.

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