मझिआंव व कांडी प्रखंड के दो दर्जन गांव प्रभावित

Updated at : 27 Jul 2017 12:46 PM (IST)
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मझिआंव व कांडी प्रखंड के दो दर्जन गांव प्रभावित

मोरबे के लोगों के लिए उवि में अस्थायी शिविर लगाया गया सोन व पंडा नदी में पानी बढ़ने से चार प्रखंडों के लोगों की नींद उड़ी गढ़वा : गढ़वा जिले में बुधवार को लगातार चौथे दिन हुई बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. पिछले तीन दिनों के अंदर हुई बारिश की अपेक्षा बुधवार को […]

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मोरबे के लोगों के लिए उवि में अस्थायी शिविर लगाया गया
सोन व पंडा नदी में पानी बढ़ने से चार प्रखंडों के लोगों की नींद उड़ी
गढ़वा : गढ़वा जिले में बुधवार को लगातार चौथे दिन हुई बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. पिछले तीन दिनों के अंदर हुई बारिश की अपेक्षा बुधवार को जिले के करीब सभी प्रखंडों में रुक-रुक कर दिनभर मूसलाधार बारिश हुई. इस बारिश से जहां गढ़वा शहर के कई रिहायशी इलाके में जलजमाव हो गया, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में कई कच्चे घर ध्वस्त हो गये. जिले के आहर, तालाब एवं डैमों में जहां पानी भर गया है.
वहीं लगभग सभी छोटी-बड़ी नदियां उफान पर हैं. विशेषकर इस समय कोयल नदी में बाढ़ आ जाने से एक दर्जन से अधिक गांव प्रभावित हो गये हैं. मझिआंव एवं कांडी प्रखंड के कई गांवों में लोगों को घर छोड़कर बाहर शरण लेनी पड़ी है. मझिआंव के मोरबे में बाढ़ का पानी घुसने की स्थिति में गांववालों के रहने के लिये वहां के उवि में अस्थायी शिविर लगाया गया है. इसी प्रखंड के खरसोता गांव के करीब एक दर्जन घर के पास कोयल के बाढ़ का पानी पहुंच जाने के कारण करीब 75 लोगों को पंचायत भवन में रहने की व्यवस्था की गयी है. इसी तरह मझिआंव एवं कांडी प्रखंड के कई गांव के लोग कोयल में लगातार बढ़ रहे पानी की वजह से गांव को छोड़ने की स्थिति में आ गयी है.
मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, गुरुवार तक इसी तरह बारिश होने की संभावना बतायी गयी है. उस स्थिति में कोयल नदी हजारों परिवारों के लिये मुसीबत साबित हो सकती है. गांव में पानी घुसने के साथ ही किसानों की लगाये गये भदई की फसल एवं धान के बोये गये बिचड़े बरबाद हो चुके हैं. इसी तरह सोन एवं पंडा नदी में भी लगातार बारिश से पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने लगा है. रह-रहकर सोन नदी में उतर प्रदेश के रिहंद डैम के पानी खोले जाने की भी सूचना मिल रही है. इससे सोन के बेसिन में बसे कांडी, खरौंधी, भवनाथपुर एवं केतार प्रखंड के दर्जनों गांव के लोगों की नींद हराम हो गयी है.
विदित हो कि पिछले साल पंडा एवं सोन नदी की बाढ़ में नदी तट के गांवों में भारी नुकसान झेलना पड़ा था. इसी तरह जिले के कनहर, तहले, बांकी, दानरो सहित अन्य नदियां भी उफान पर हो चुकी हैं. इसके कारण जन जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है. लोगों की दिनचर्या एक तरह पूरी तरह ठप हो चुकी है. इधर अन्य क्षेत्रों में भी बाढ़ के पानी से आहर, तालाब व डैम भरने के साथ जगह-जगह भारी मात्रा में हुए जलजमाव से कई जगह घरों में पानी घुस गये हैं. कई मार्ग बाधित हो गये हैं.
कल्याणपुर भी जिला मुख्यालय से कटा
दानरो नदी में पानी बढ़ जाने से गढ़वा शहर से सटा चिनिया मार्ग पर कल्याणपुर गांव सहित दर्जनों गांव सीधे तौर पर जिला मुख्यालय से कट गये हैं.
अब इस क्षेत्र के लोगों को सहिजना होते अतिरिक्त चार किमी दूरी तय कर जर्जर सड़क से होकर गढ़वा शहर आना पड़ेगा. विदित हो प्रधान जिला जज एवं एसपी का भी आवास कल्याणपुर में ही है. इसके कारण इन अधिकारियों की भी समस्या बढ़ गयी है. इसके अलावा उस पार स्थित गोपीनाथ महिला महाविद्यालय, इंदिरा सिंह बीएड कॉलेज सहित कई शैक्षणिक संस्थान के विद्यार्थी भी प्रभावित हुए हैं. गौरतलब है कि पिछले बरसात में ही दानरो नदी का पुल बह गया है. इसके बाद वहां पुल का निर्माण कार्य चल रहा है. लेकिन निर्माण कार्य काफी धीमी गति से चलने के कारण बरसात के पूर्व पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है.
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