दुमका में कोल टेस्टिंग बोरिंग के खिलाफ ग्रामीणों का हल्लाबोल, मशीनें हटने तक जारी रहा धरना

Updated:
विज्ञापन

आक्रोश का इजहार करते ग्रामीण | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

दुमका के ग्रामीणों ने ग्रामसभा की अनुमति के बिना हो रहे कोल टेस्टिंग बोरिंग का अनिश्चितकालीन धरना देकर विरोध किया. प्रदर्शनकारियों की मांगों पर प्रशासन ने बोरिंग मशीनें हटाईं, लेकिन आंदोलन जारी रहा.

विज्ञापन

दुमका : दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड के बांकीजोर, बांसपहाड़ी और हीरापुर पंचायत क्षेत्र के विभिन्न गांवों के ग्रामीण, रैयत एवं किसान मंगलवार से कल्याणपुर मैदान के समीप कोल टेस्टिंग बोरिंग कार्य के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना पर बैठ गये. भाकपा माले के झंडे-बैनर तले ग्रामीणों ने बोरिंग स्थल पर ही शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से धरना शुरू किया.

विज्ञापन
कोल टेस्टिंग बोरिंग के लिए लायी गयी मशीन | Prabhat Khabar Network
कोल टेस्टिंग बोरिंग के लिए लायी गयी मशीन | Prabhat Khabar Network

प्रशासन ने मशीनें हटायीं

आंदोलन के बीच प्रशासन ने बोरिंग स्थल से मशीनें और अन्य सामान हटाने की कार्रवाई शुरू की. आंदोलनकारियों के अनुसार, मंगलवार की रात करीब डेढ़ बजे प्रशासन ने एक बोरिंग मशीन समेत कुछ सामान वहां से हटवा दिया था. बुधवार को प्रशासन की मौजूदगी में दोपहर करीब दो बजे मजदूरों ने एक अन्य बोरिंग मशीन को खोलकर वहां से हटा लिया. आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने शेष मशीन और सामान को भी हटाने की बात कही थी.

आंदोलन के दौरान उपस्थित महिलाएं | Prabhat Khabar Network
आंदोलन के दौरान उपस्थित महिलाएं | Prabhat Khabar Network

मांगों को लेकर नारेबाजी

धरना के दौरान ग्रामीणों ने कोल टेस्टिंग बोरिंग कार्य तत्काल बंद करने, पेसा कानून का पालन सुनिश्चित करने तथा संबंधित कंपनी को क्षेत्र से वापस भेजने की मांग को लेकर नारेबाजी की. आंदोलनकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठायी.

बिना ग्रामसभा अनुमति बोरिंग का आरोप

धरना को संबोधित करते हुए भाकपा माले के जिला संयोजक सह राज्य कमेटी सदस्य भुण्डा बास्की, पलटन हांसदा एवं सुभाषचंद्र मंडल ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पिछले नौ-दस महीने से बिना ग्रामसभा की अनुमति के जबरन कोल टेस्टिंग बोरिंग का काम कराया जा रहा था. उन्होंने कहा कि भाकपा माले एवं आदिवासी संघर्ष मोर्चा के आंदोलन के कारण आखिरकार प्रशासन को बोरिंग मशीनें हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा.

उन्होंने कहा कि अब किसी भी कीमत पर क्षेत्र में दोबारा कोल टेस्टिंग बोरिंग का कार्य नहीं होने दिया जायेगा. नेताओं ने मशीनों को हटाये जाने को आंदोलन की बड़ी जीत बताया.

मुकदमे वापस लेने की मांग

भाकपा माले नेताओं ने कहा कि कोल टेस्टिंग बोरिंग का विरोध करने वाले दर्जनों युवाओं एवं महिलाओं पर कथित रूप से फर्जी मुकदमे दर्ज किये गये हैं. उन्होंने सभी मुकदमों को तत्काल वापस लेने की मांग की. साथ ही रायमनी सोरेन की रिहाई की मांग भी उठायी गयी.

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

नेताओं ने कहा कि रायमनी सोरेन पिछले तीन महीने से जेल में हैं और उनके दो छोटे बच्चे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आदिवासी समाज, आदिवासी संघर्ष मोर्चा एवं भाकपा माले सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन तेज करेंगे. इसकी पूरी जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी.

लगाये गये नारे

धरना के दौरान “बिना ग्रामसभा अनुमति कोल टेस्टिंग बोरिंग बंद करो”, “पेसा कानून का हनन बंद करो”, “काेल कंपनी वापस जाओ” समेत कई नारे लगाये गये. कार्यक्रम में सुरेश मुर्मू, रामेश्वर टुडू, सन्यासी हेंब्रम, जाम्बड़ू बास्की, बुद्धय किस्कू, मीकू टुडू, सागेन मुर्मू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola