एक छात्रा के लिए स्कूल,दो शिक्षक तैनात: दुमका के इस विद्यालय की अनोखी कहानी

Updated:
विज्ञापन

उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बेनियाग्राम | Prabhat Khabar Network

झारखंड के दुमका में एक अनोखा स्कूल, जहां सिर्फ एक छात्रा के लिए दो शिक्षक तैनात हैं. स्कूल के विलय को लेकर शिक्षा विभाग की लापरवाही आई सामने.

विज्ञापन

प्रतिनिधि, रानीश्वर . अक्सर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन झारखंड के दुमका जिले में एक ऐसा स्कूल भी है, जहां तस्वीर बिल्कुल उलट है . यहां विद्यार्थी महज एक है, जबकि शिक्षक दो पदस्थापित हैं . हालांकि इनमें से एक शिक्षक वर्ष 2011 से दूसरे स्कूल में प्रतिनियुक्त हैं . इसके बावजूद इस विद्यालय का अब तक नजदीकी स्कूल में विलय नहीं हो सका है .

आपके शहर में

विज्ञापन

यह मामला रानीश्वर प्रखंड के गोबिंदपुर पंचायत अंतर्गत बेनियाग्राम गांव स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय का है . कभी इस स्कूल में 29 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन धीरे-धीरे विद्यार्थियों की संख्या घटती गयी और अब कक्षा तीन में पढ़ने वाली फातेमा खातुन ही यहां की इकलौती छात्रा रह गयी है . खास बात यह है कि फातेमा इसी स्कूल में पदस्थापित पारा शिक्षक और प्रधान शिक्षक रहीम अंसारी की बेटी है .

29 बच्चों से शुरू हुआ स्कूल, अब सिर्फ एक छात्रा

झारखंड शिक्षा परियोजना के तहत वर्ष 2002 में बेनियाग्राम गांव में अभियान विद्यालय की शुरुआत हुई थी . बाद में इसे उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय का दर्जा दिया गया . वर्ष 2006-07 में विद्यालय के लिए दो कमरों के भवन का निर्माण कराया गया . साथ ही किचन शेड समेत अन्य सुविधाएं भी विकसित की गयीं .

विद्यालय शुरू होने के समय दो पारा शिक्षकों रहीम अंसारी और तपन गोराई का चयन हुआ था . उस समय पहली से पांचवीं कक्षा तक करीब 29 बच्चे पढ़ते थे . लेकिन समय बीतने के साथ बच्चों की संख्या लगातार कम होती गयी और अब स्थिति यह है कि पूरे विद्यालय में केवल एक छात्रा का नामांकन है .

यह भी पढ़ें:

राजमहल में 6 हजार होल्डिंग, टैक्स जमा सिर्फ 5 ने किया: घर-घर वसूली बंद, ऑनलाइन सिस्टम बना चुनौती

2011 में दूसरे स्कूल भेजे गये शिक्षक, आज तक नहीं लौटे

वर्ष 2011 में प्राथमिक विद्यालय सिउलीबोना में शिक्षक का पद रिक्त हुआ . इसके बाद बेनियाग्राम स्कूल के पारा शिक्षक तपन गोराई को वहां प्रतिनियुक्त कर दिया गया . तब से वह वहीं कार्यरत हैं .

इस तरह कागज पर बेनियाग्राम स्कूल में दो पारा शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन विद्यालय में नियमित रूप से एक ही शिक्षक मौजूद हैं . दूसरी ओर, स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या घटकर महज एक रह गयी है .

बच्चे आंगनबाड़ी से निकलकर दूसरे स्कूल में ले रहे नामांकन

प्रधान शिक्षक रहीम अंसारी के अनुसार बेनियाग्राम गांव नारायणपुर आंगनबाड़ी केंद्र के पोषक क्षेत्र में आता है . तीन से छह वर्ष तक के बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र में स्कूल पूर्व शिक्षा प्राप्त करते हैं . इसके बाद अधिकांश बच्चे पास स्थित यूएमएस हाड़जुड़िया में नामांकन करा लेते हैं .

रहीम अंसारी बताते हैं कि यही एक बड़ी वजह है, जिसके कारण धीरे-धीरे बेनियाग्राम स्कूल में बच्चों की संख्या कम होती चली गयी . उन्होंने स्कूल का नजदीकी विद्यालय में विलय करने का अनुरोध भी किया है, लेकिन अब तक इस पर निर्णय नहीं हो सका है .

करीब 30 स्कूलों का हो चुका है विलय, फिर यहां क्यों नहीं?

रानीश्वर प्रखंड क्षेत्र में करीब 30 स्कूलों का दूसरे विद्यालयों के साथ विलय किया जा चुका है . इनमें करीब एक दर्जन सरकारी स्कूल भी शामिल हैं . ऐसे में एक छात्रा के लिए संचालित हो रहे बेनियाग्राम स्कूल का अब तक विलय नहीं होना चर्चा का विषय बना हुआ है .

विद्यालय का भवन मौजूद है, शिक्षक के पद भी हैं, संयोजिका भी है और स्कूल के विकास समेत विभिन्न मदों में सरकारी राशि का आवंटन भी होता है . लेकिन पढ़ने वाले बच्चों की संख्या सिर्फ एक है .

एक बच्ची के लिए एमडीएम की व्यवस्था भी चुनौती

स्कूल में एक संयोजिका भी कार्यरत है . लेकिन महज एक छात्रा के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करना भी व्यवहारिक रूप से चुनौती बन गया है .

एमडीएम के तहत प्राथमिक स्तर पर प्रति बच्चे प्रतिदिन 100 ग्राम चावल तथा सब्जी और अन्य राशन के लिए 6 रुपये 78 पैसे की राशि मिलती है . दूसरी ओर, एक रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 1000 रुपये से अधिक है . ऐसे में सिर्फ एक बच्ची के लिए भोजन तैयार करने की व्यवस्था को लेकर खर्च और संसाधन का सवाल भी सामने आता है .

अंडे के लिए छह रुपये, बाजार में कीमत आठ से ज्यादा

विद्यालयों में बच्चों को सप्ताह में दो-दो अंडे देने का प्रावधान है . इसके लिए एक अंडे पर छह रुपये की राशि का आवंटन होता है . जबकि बाजार में एक अंडे की कीमत आठ रुपये से अधिक है . ऐसे में आवंटित राशि और बाजार की वास्तविक कीमत के बीच का अंतर भी विद्यालय के लिए परेशानी का कारण बन रहा है .

दो शिक्षकों के मानदेय पर 40 हजार से ज्यादा खर्च

बेनियाग्राम विद्यालय में पदस्थापित दो पारा शिक्षकों के मानदेय मद में प्रतिमाह 40 हजार रुपये से अधिक का भुगतान किया जाता है . वहीं, विद्यालय की एक संयोजिका को दो हजार रुपये मानदेय मिलता है . इसके अलावा विद्यालय विकास समेत अन्य मदों में भी राशि का आवंटन होता है .

ऐसे में सवाल यह है कि जिस स्कूल में पढ़ने वाला सिर्फ एक बच्चा है, वहां लंबे समय तक इसी व्यवस्था को जारी रखना कितना व्यावहारिक है . दूसरी ओर, स्कूल के विलय की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं .

प्रस्ताव गया, लेकिन स्वीकृति अब तक नहीं

बीइइओ सह बीआरसी समन्वयक एस्थेर मुर्मू ने बताया कि उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बेनियाग्राम को नजदीकी स्कूल के साथ विलय करने का प्रस्ताव शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों के पास भेजा गया था . हालांकि अब तक इसकी स्वीकृति नहीं मिली है .

फिलहाल बेनियाग्राम का यह स्कूल सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जहां कभी 29 बच्चों की चहल-पहल हुआ करती थी, लेकिन आज सिर्फ एक छात्रा के लिए स्कूल संचालित हो रहा है . एक ओर स्कूलों में शिक्षक और संसाधनों की कमी की शिकायतें सामने आती हैं, तो दूसरी ओर इस विद्यालय की स्थिति व्यवस्था के दूसरे पहलू पर सवाल खड़े करती है.

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola