मांदर की थाप पर थिरके 15 गांव, 509 लोगों ने मनाया करम मिलन; सहारा में दिखी लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर

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सहारा में करम मिलन समारोह में उपस्थित समाज के लोग | Prabhat Khabar Network

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सहारा में 15 गांवों के 509 लोगों ने मांदर की थाप पर कर्मा नृत्य कर सामाजिक एकजुटता और लोक संस्कृति का संदेश दिया. उत्सव का माहौल रहा.

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प्रतिनिधि, बासुकिनाथ : मांदर की थाप शुरू हुई तो कदम खुद-ब-खुद थिरकने लगे. करमा गीतों की गूंज के बीच महिलाओं और युवाओं की टोली ने पारंपरिक अंदाज में सामूहिक नृत्य शुरू किया तो सहारा का माहौल उत्सव में बदल गया. जरमुंडी प्रखंड क्षेत्र के सहारा में झारखंड दलित समाज के बैनर तले आयोजित कर्मा मिलन समारोह में सोमवार को करीब 15 गांवों से 509 लोग जुटे. गांव-गांव से पहुंचे समाज के लोगों ने एक साथ कर्मा पर्व मनाकर सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान का संदेश दिया.

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फीता काटकर हुआ समारोह का शुभारंभ

जरमुंडी प्रखंड कोर कमेटी की अगुवाई में आयोजित समारोह का संचालन संजय असांगा ने किया. मुख्य अतिथि संताल परगना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सत्यम कुमार मेहरा और विशिष्ट अतिथि दुमका जिला सचिव अरविंद कुमार दास रहे. अतिथियों का समाज के लोगों ने स्वागत किया. फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ. इसके बाद कर्मा पर्व की परंपरा और सामाजिक महत्व पर चर्चा हुई.

सहारा में करमा मिलन समारोह में उपस्थित समाज के लोग | Prabhat Khabar Network
सहारा में करमा मिलन समारोह में उपस्थित समाज के लोग | Prabhat Khabar Network

मांदर की थाप पर महिलाओं और युवाओं ने किया कर्मा नृत्य

समारोह में जैसे-जैसे कर्मा गीतों की लय तेज हुई, वैसे-वैसे उत्साह भी बढ़ता गया. पारंपरिक गीतों पर महिलाओं और युवाओं ने सामूहिक रूप से कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया. मांदर की थाप और गीतों के साथ एक-दूसरे का हाथ थामकर नृत्य करती टोली ने समारोह में लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की. आसपास के गांवों से पहुंचे लोग भी इस सांस्कृतिक आयोजन में शामिल होते चले गए.

15 गांवों के लोगों को एक मंच पर लाना रहा उद्देश्य

आयोजकों के अनुसार, समारोह का उद्देश्य कर्मा पर्व की पारंपरिक संस्कृति को जीवित रखने के साथ समाज के लोगों को एक मंच पर लाना था. अलग-अलग गांवों से आए 509 लोगों की मौजूदगी में आयोजित मिलन समारोह ने गांवों के बीच सामाजिक जुड़ाव को भी मजबूत किया.

नई पीढ़ी को परंपरा से जोड़ने पर जोर

समारोह में वक्ताओं ने कहा कि कर्मा पर्व प्रकृति, परंपरा और सामूहिक जीवन से जुड़ा पर्व है. ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलता है. सामूहिक कर्मा नृत्य के जरिए समाज के लोगों ने आपसी भाईचारे और एकता का परिचय दिया. देर तक चले कार्यक्रम में गीत-संगीत और नृत्य का दौर जारी रहा तथा सहारा का माहौल पूरी तरह कर्मामय बना रहा

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