तसर किसानों को तकनीक का मंत्र, रोग पहचान से लेकर प्रबंधन तक दी गयी जानकारी
जागरूकता में शामिल अतिथि व अन्य | Prabhat Khabar Network
तसर रेशम किसानों के लिए 'मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0' जागरूकता कार्यक्रम. जानें रोग पहचान, बचाव और उत्पादन बढ़ाने की नई तकनीकें.
मसलिया. प्रखंड के धोबना स्थित पायलट प्रोजेक्ट सेंटर, काठिजोरिया के कमांड क्षेत्र में शुक्रवार को ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ के तहत तसर रेशम कृषकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में 40 से अधिक रेशम कीटपालकों ने भाग लिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रांची के समन्वयक डॉ शांताकार गिरि ने की. उन्होंने ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ के उद्देश्य एवं महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि किसान-केंद्रित विस्तार व्यवस्था के माध्यम से रेशम किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है. इससे किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ तसर कीटों में होने वाले रोगों की पहचान और उनके प्रबंधन की तकनीक स्वयं अपना सकेंगे.
आपके शहर में
रोग पहचान, बचाव और प्रबंधन के उपायों का प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान किसानों को तसर कीटों में होने वाले रोगों की पहचान, बचाव एवं प्रबंधन के उपायों का क्रमवार प्रदर्शन किया गया. किसानों को पेब्रीन-मुक्त डीएफएल प्राप्त करने तथा रोग की शुरुआती अवस्था में उसकी पहचान कर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रेरित किया गया.
रेशम उत्पादन बढ़ाने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
मौके पर अग्र परियोजना पदाधिकारी सह जिला नोडल पदाधिकारी, दुमका रवि शंकर शर्मा ने दुमका क्षेत्र में रेशम निदेशालय की भूमिका तथा कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर से किये जा रहे सहयोग और विस्तार गतिविधियों की जानकारी दी. मुख्य अतिथि मुखिया पुतुल मुर्मू ने किसानों को तसर तकनीक को अक्षरशः अपनाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि रेशम उत्पादन को बढ़ावा मिलने से किसानों की आय में वृद्धि के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. कार्यक्रम में केंद्र के कर्मी एवं बड़ी संख्या में रेशम कृषक उपस्थित थे.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए