गरडी से उठी सांस्कृतिक चेतना की नयी मशाल, हर रविवार गूंजेगी मांझी थान में मरांग बुरु की आराधना

Author Anand jaswal|Edited by Priya Gupta
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मांझी थान में साप्ताहिक बोंगा बुरु की शुरुआत करते आदिवासी. | Prabhat Khabar Network

दुमका के गरडी गांव में मांझी थान में साप्ताहिक पूजा की शुरुआत हुई है। यह पहल संताल समाज को नशामुक्त और अपनी संस्कृति से जोड़ने का एक अनूठा प्रयास है।

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संवाददाता, दुमका बदलते समय और आधुनिक जीवन की तेज रफ्तार के बीच जहां पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्य धीरे-धीरे धुंधले पड़ते जा रहे हैं, वहीं दुमका प्रखंड का छोटा-सा गरडी गांव अपनी जड़ों की ओर लौटने का संदेश दे रहा है. गांव के लेखा होड़ सह समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन मरांग बुरु की पहल पर यहां मांझी थान में साप्ताहिक बोंगा बुरु की शुरुआत की गयी है. यह पहल केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि संताल समाज के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरी है. संताल समाज में सामान्यतः साप्ताहिक मांझी थान पूजा की परंपरा नहीं रही है. ऐसे में गरडी गांव का यह निर्णय विशेष महत्व रखता है. हर रविवार गांव के महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे मांझी थान में एकत्र होकर अपने आराध्य देव मरांग बुरु के प्रति श्रद्धा अर्पित करेंगे और सामूहिक प्रार्थना के माध्यम से गांव की सुख-शांति, समृद्धि और सामाजिक एकता की कामना करेंगे. पूजा के दौरान बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से जीवन के सकारात्मक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया.

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उन्हें नशे से दूर रहने, नियमित रूप से विद्यालय जाने, माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करने तथा अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करने का संदेश दिया गया. ग्रामीणों का मानना है कि यदि नयी पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहेगी, तो समाज की पहचान और आत्मा सुरक्षित रहेगी. मांझी थान में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ धूप, अगरबत्ती, जल, गुड़, चूड़ा, लड्डू और अन्य सामग्री अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना की गयी. श्रद्धालुओं ने स्वेच्छा से दान भी दिया. गांव की सभा में यह निर्णय लिया गया कि पूजा से प्राप्त दान राशि का उपयोग मांझी थान की मरम्मत और सामाजिक व धार्मिक कार्यों में किया जाएगा. विशेष रूप से यह भी तय किया गया कि इस राशि का उपयोग हड़िया या किसी अन्य नशीली वस्तु पर नहीं किया जाएगा. ग्रामीणों ने कहा कि यह पहल केवल एक गांव तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संताल समाज के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बने. उनका विश्वास है कि सामूहिक पूजा और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में भाईचारा, अनुशासन और आत्मसम्मान की भावना मजबूत होगी. पूजा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. इस अवसर पर नायकी बाबा सनातन किस्कू, गुडित गायना मुर्मू, पराणिक धुनीराम मुर्मू, नायकी गोगो बीटी सोरेन, मीनू टुडू, शिवलाल मुर्मू, स्टेफन मुर्मू, बोड़ो हेंब्रम, छोटे हेंब्रम, माइकिल हेंब्रम, सुनील मरांडी, विराज मरांडी, सोनू टुडू, संजय हेंब्रम, गणेश मरांडी, पोरेश मरांडी, सरहूल हेंब्रम, मनीला मुर्मू, सूरजमुखी मुर्मू, पकू मुर्मू, फुलसेबेन मरांडी, श्रीफूल मुर्मू, बाहा टुडू, बिटी सोरेन, मेरी किस्कू, मायनो हांसदा, सोना टुडू, छीता हेंब्रम, सुमी मरांडी, उल्फा सोरेन, एलिनबिना मरांडी और अमृता मरांडी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.


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