बेटियां न होंगी, तो बहू कहां से लाओगे

Published at :30 Apr 2016 7:49 AM (IST)
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बेटियां न होंगी, तो बहू कहां से लाओगे

दुमका : घट रहे लिंगानुपात के कारण एवं निदान जैसे विषय पर प्रेस क्लब दुमका द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन सूचना भवन सभागार में शुक्रवार को किया गया, जिसका विधिवत उद‍घाटन मुख्य अतिथि जिला परिषद‍ अध्यक्ष जायस बेसरा, विशिष्ट अतिथि उपाध्यक्ष असीम मंडल एवं नगर परिषद‍ अध्यक्ष अमिता रक्षित सहित अन्य ने संयुक्त रूप से […]

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दुमका : घट रहे लिंगानुपात के कारण एवं निदान जैसे विषय पर प्रेस क्लब दुमका द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन सूचना भवन सभागार में शुक्रवार को किया गया, जिसका विधिवत उद‍घाटन मुख्य अतिथि जिला परिषद‍ अध्यक्ष जायस बेसरा, विशिष्ट अतिथि उपाध्यक्ष असीम मंडल एवं नगर परिषद‍ अध्यक्ष अमिता रक्षित सहित अन्य ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.
इस संगोष्ठी में प्रशासनिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, शिक्षाविद‍, सामाजिक- राजनीतिक कार्यकर्ताओं व दुमका के मीडियाकर्मियों ने दुमका के शहरी क्षेत्र में लिंगानुपात 781 के स्तर से उपर उठाने पर और राष्ट्रीय औसत तक ले जाने के लिए कन्या भ्रूण हत्या रोकने, दहेज जैसी कुरीतियां समाप्त करने, बेटियों को बेटों के समान हक प्रदान करने पर बल दिया.
संगोष्ठी में झारखंड बार काउंसिल के सदस्य गोपेश्वर प्रसाद झा, सांसद प्रतिनिधि विजय कुमार सिंह, उपनिदेशक जनसंपर्क अजय नाथ झा, अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी शिव नारायण साह, शबनम खातून आदि मौजूद थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता क्लब के अध्यक्ष शिवशंकर चौधरी ने की. विषय प्रवेश राजीव रंजन ने, जबकि मंच का संचालन दुष्यंत कुमार व धन्यवाद ज्ञापन सुमन सिंह ने किया.
गणमान्य ने रखे विचार
दहेज के लिए महिलाओं का हत्या होना सभ्य समाज के लिए किसी कलंक से कम नहीं है. पुरुषों के अनुपात में महिलाओं की घटती संख्या तो और भी चिंता का विषय है.
– जॉयस बेसरा, अध्यक्ष, जिला परिषद‍
जीवन को महकाने वाली बेटियां आज संकट में है. इन्हें हर हाल में बचाना होगा. सर्वाधिक बिक्री की जाने वाली दवाओं में गर्भ निरोधक गोली की बिक्री प्रमुख स्थान रखती है जिस पर हर हाल में रोक लगाना चाहिए. तभी स्त्री व पुरुष का संतुलन बना रहेगा और सृष्टि में त्रुटि नहीं आयेगी.
अमिता रक्षित, चेयरपर्सन, नगर परिषद‍
कुटुंब न्यायालय के समक्ष न्याय पाने के लिए महिलाओं की बढ़ती संख्या पर भी चिंता का विषय है. कन्या भ्रूण हत्या के लिए दहेज प्रथा सबसे अधिक जिम्मेदार है. इन कुरीतियों से समाज को उबारने की जरूरत है.
– विजय कुमार सिंह, अध्यक्ष, अधिवक्ता संघ
जो बेटी है, वही मां है. यह हमें समझना होगा. लड़कियां जितना केयर अभिभावकों का कर सकती है, उतना लड़के नहीं. कन्या भ्रूण हत्या पर रोक से संबंधित कड़े कानूनी प्रावधान किये गये हैं आवश्यकता है.
– गोपेश्वर प्रसाद झा, वरीय अधिवक्ता
बेटियों को इस धरा पर लाकर बेटियों के प्रति कोई अहसान नहीं किया जाता बल्कि धरती पर आना उनका वाजिब हक है और यह हक उन्हें हर हाल में मिलना चाहिए. आज जो स्थिति पैदा हुई है, उसके लिए सामाजिक रीति रिवाज भी जिम्मेदार है.
– अजय नाथ झा, उपिनदेशक, जनसंपर्क
हमें इस अभियान को घर-घर तक ले जाना होगा. महिलाएं ही जब जागरूक होंगी, तो कन्या भ्रूण हत्या रुकेगा. बालिकाएं किसी क्षेत्र में उपेक्षित नहीं होंगी. हमलोग जल्द ही एक संकल्प पत्र तैयार करवा रहे हैं. जिसका काम जल्द ही धरातल पर देखने को मिलेगा.
– रिंकू मोदी, सचिव, प्रेरणा.
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