महज 14 परिवार और 24 साल पुरानी दुर्गापूजा, गिरिपुर की कहानी है खास

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दुर्गा मंदिर,गिरिपुर.| Prabhat Khabar Network

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रानीश्वर के गिरिपुर गांव में 14 परिवार मिलकर 2002 से दुर्गापूजा कर रहे हैं. 2009-10 में मंदिर बना. रामकृष्ण मिशन बेलुड़ मठ के नियमानुसार पूजा होती है.

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प्रतिनिधि, रानीश्वर: रानीश्वर प्रखंड क्षेत्र के कुमिरदहा पंचायत का छोटा सा गांव गिरिपुर अपनी अनोखी दुर्गापूजा परंपरा के लिए जाना जाता है. महज 14 परिवारों वाले इस गांव में ग्रामीण मिल-जुलकर पिछले करीब 24 वर्षों से मां दुर्गा की पूजा करते आ रहे हैं.

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गांव में दुर्गापूजा की शुरुआत वर्ष 2002 में कलश स्थापना के साथ हुई थी. खास बात यह है कि यहां रामकृष्ण मिशन बेलुड़ मठ, कोलकाता के नियमानुसार दुर्गापूजा आयोजित की जाती है.

2002 में कलश स्थापना से हुई शुरुआत

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2002 में गिरिपुर में पहली बार कलश स्थापित कर दुर्गापूजा शुरू की गयी थी. पूजा के शुभारंभ के समय रामकृष्ण मिशन बेलुड़ मठ से स्वामीजी भी गिरिपुर पहुंचे थे.

इसके अगले वर्ष यानी 2003 में ग्रामीणों ने पंडाल बनाकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की और विधिवत पूजा-अर्चना की. इसके बाद गांव में स्थायी मंदिर बनाने की पहल शुरू हुई.

2009-10 में बनकर तैयार हुआ मंदिर

कई वर्षों तक गिरिपुर में पंडाल बनाकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती रही. इसके बाद ग्रामीणों के प्रयास से वर्ष 2009-10 में दुर्गा मंदिर बनकर तैयार हुआ.

मंदिर तैयार होने के बाद से वहीं मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है. सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीण हर साल मिलकर पूजा का आयोजन करते हैं.

पूजा में शामिल होते हैं गांव के सभी परिवार

ग्रामीण भजन कुमार सिंह ने बताया कि पहले गांव में दुर्गापूजा नहीं होती थी. उस समय पूजा देखने और पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए आसपास के गांवों में जाना पड़ता था.

अब गांव में ही मां दुर्गा की पूजा होने से सभी परिवार उत्साह के साथ इसमें शामिल होते हैं. पूजा आयोजन में गांव के हर परिवार का सहयोग रहता है.

इस बार करीब 50 हजार रुपये का बजट

ग्रामीणों के अनुसार इस बार दुर्गापूजा आयोजन के लिए करीब 50 हजार रुपये का बजट रखा गया है. छोटे गांव के सभी परिवार मिलकर पूजा की तैयारियों में जुटते हैं.

गांव में पूजा को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहता है और ग्रामीण सामूहिक रूप से पूजा की व्यवस्था संभालते हैं.

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एकादशी को होता है प्रतिमा विसर्जन

गिरिपुर में मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन एकादशी के दिन किया जाता है. विसर्जन के दौरान गांव में छोटा सा मेला भी लगता है.

गांव छोटा होने के बावजूद यहां वर्षों से चली आ रही दुर्गापूजा की परंपरा ग्रामीणों को एकजुट करती है. यही वजह है कि 14 परिवारों के इस छोटे से गांव में दुर्गापूजा का उत्साह हर साल देखने को मिलता है.

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