25 करोड़ का अस्पताल तैयार, सुविधाएं पूरी फिर भी इलाज के इंतजार में मरीज
बंद पड़े आधुनिक हॉस्पिटल परिसर एवं भवन | Prabhat Khabar Network
हंसडीहा में 25 करोड़ की लागत से बना 100 बेड का आधुनिक अस्पताल करोड़ों की लागत के बावजूद सालों से बंद है. आधुनिक सुविधाओं से लैस यह अस्पताल इलाज शुरू होने का इंतज़ार कर रहा है, जबकि चोरी और जंगल-झाड़ियों से ढकने का खतरा मंडरा रहा है.
हंसडीहा : हंसडीहा में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सांसद डॉ निशिकांत दुबे की पहल पर 25 करोड़ रुपये की लागत से 100 बेड वाले आधुनिक अस्पताल भवन का निर्माण कराया गया था. जुलाई 2017 में भूमि पूजन के साथ शुरू हुआ निर्माण कार्य अक्टूबर 2020 में पूरा भी हुआ और अस्पताल भवन स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया. लेकिन निर्माण के वर्षों बाद भी अस्पताल में इलाज की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है.
आपके शहर में
आधुनिक सुविधाओं से लैस इस अस्पताल में प्रत्येक बेड के साथ मॉनिटर, 12 आईसीयू बेड, चार मर्चरी, ब्लड बैंक, लैब, डायलिसिस सेंटर, ऑपरेशन थियेटर, ओपीडी, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी लैब जैसी सुविधाओं का प्रावधान किया गया था. इसके अलावा लॉन्ड्री, कैंटीन, शुद्ध पेयजल के लिए ईटीपी प्लांट, ऑक्सीजन प्लांट, पानी की टंकी, गैरेज और फायर सेफ्टी जैसी व्यवस्थाएं भी की गई.

बंद अस्पताल पर चोरों की नजर
अस्पताल के लंबे समय से बंद रहने का खामियाजा अब इसके भवन और संसाधनों को भी भुगतना पड़ रहा है. वर्ष 2025 में अस्पताल से लाखों रुपये के उपकरणों की चोरी की घटना सामने आई थी. वर्तमान में अस्पताल परिसर जंगल-झाड़ियों से घिरा हुआ है और पुलिस द्वारा जब्त किए गए वाहनों से भी परिसर भरा पड़ा है. सुरक्षा के लिए चौकीदारों की तैनाती की गई है, लेकिन रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
कई शहरों के बीच अहम स्थान
हंसडीहा का यह अस्पताल भौगोलिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है. यह हंसडीहा के साथ दुमका, बौंसी, भागलपुर, बांका, देवघर और गोड्डा जाने वाले मार्गों के प्रमुख केंद्र में है. स्थानीय लोगों को बेहतर इलाज के लिए देवघर करीब 47 किलोमीटर, दुमका 42 किलोमीटर, गोड्डा 32 किलोमीटर और भागलपुर करीब 72 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. ऐसे में हंसडीहा में 100 बेड का अस्पताल शुरू होने से आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है.
निरीक्षण के बाद भी नहीं शुरू हुआ संचालन
अस्पताल को चालू करने की दिशा में कई बार देवघर एम्स की टीम द्वारा निरीक्षण भी किया जा चुका है. राज्य सरकार के अधिकारी भी कई बार भवन-संसाधन देखने पहुंचे हैं. इसके बावजूद अस्पताल संचालन को लेकर अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है. करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किया गया अस्पताल आज भी मरीजों के इलाज के बजाय बंद भवन के रूप में खड़ा है. स्थानीय लोगों ने अस्पताल को जल्द से जल्द चालू कर क्षेत्रवासियों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है.
रात में सांप-बिच्छुओं से परेशानी
अस्पताल की सुरक्षा में तैनात चौकीदार शीतल दास ने बताया कि अस्पताल परिसर की सुरक्षा के लिए छह लोगों की ड्यूटी लगाई गई है. दिन में दो और रात में चार चौकीदार पहरेदारी करते हैं. एक वर्ष पूर्व चोरी की घटना के बाद से यहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है. उन्होंने बताया कि रात के समय जंगल-झाड़ियों से निकलने वाले सांप, बिच्छू और अन्य कीड़े-मकोड़ों से काफी परेशानी होती है. वहीं, परिसर में रात के समय पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी नहीं है.
ग्रामीणों को बेहतर इलाज की उम्मीद
ग्राम प्रधान टुनटुन मरिक ने कहा कि हंसडीहा का अस्पताल वर्ष 2017 से 2020 के बीच बनकर तैयार हो गया था, लेकिन अब तक इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है. क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं के अलावा अन्य गंभीर मरीजों को भी समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल पाता है. आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए मरीजों को बाहर ले जाकर महंगा इलाज कराना काफी मुश्किल होता है. ऐसे में इस अस्पताल को जल्द से जल्द चालू करना बेहद जरूरी है.
सुविधा नहीं मिली तो आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय निवासी सूरज साह ने कहा कि अस्पताल बनने के समय लोगों को काफी उम्मीदें थीं. हंसडीहा चार सड़कों का प्रमुख चौराहा है, जहां आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन बेहतर इलाज की सुविधा नहीं होने से घायलों की जान चली जाती है. जनता के पैसे से बने इतने बड़े अस्पताल भवन का उपयोग नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है. जनप्रतिनिधियों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए. यदि जल्द स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हुईं, तो जनता सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होगी.
मैनपावर और विशेषज्ञ चिकित्सकों की जरूरत
चिकित्सा प्रभारी पदाधिकारी सरैयाहाट प्रभा रानी ने कहा कि हंसडीहा में बड़ा अस्पताल भवन बनकर तैयार है, लेकिन इसे संचालित करने के लिए पर्याप्त मैनपावर और विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता है. इसके लिए जनप्रतिनिधियों और सरकार के स्तर से पहल जरूरी है. अस्पताल भवन तो तैयार है, लेकिन चिकित्सकों और कर्मचारियों के रहने के लिए आवास की व्यवस्था नहीं है. ऐसी स्थिति में अस्पताल का सुचारू रूप से संचालन मुश्किल होगा.
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