जहां खतरे की जतायी थी आशंका, वहीं धंसी जमीन; महेशपुर कोलियरी में ओबी डंपिंग पर बवाल
प्रबंधन के साथ नोकझोंक करते ग्रामीण
धनबाद में बीसीसीएल की महेशपुर कोलियरी में ओबी डंपिंग के कारण जमीन धंस गई, जिससे 50 फीट चौड़ा और 15 फीट गहरा गड्ढा बन गया. घटना से आसपास के ग्रामीण दहशत में हैं और उन्होंने ओबी डंपिंग का काम रुकवा दिया है.
धनबाद. बीसीसीएल के गोविंदपुर क्षेत्र संख्या तीन की महेशपुर कोलियरी में आउटसोर्सिंग कंपनी की ओबी डंपिंग को लेकर जतायी जा रही आशंका सोमवार को भू-धंसान के रूप में सामने आयी. दोपहर करीब 12:45 बजे ओबी डंप के पास तेज आवाज के साथ जमीन धंसने लगी. कुछ ही देर में रास्ते का करीब 15 फीट गहरा और 50 फीट चौड़ा हिस्सा धंस गया.

भू-धंसान के बाद आसपास की जमीन में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गयीं. घटना के समय आसपास कोयला चुन रहे कई बच्चे और महिलाएं इसकी चपेट में आने से बाल-बाल बच गये. वहीं पत्थर लेने पहुंचा एक ट्रैक्टर भी धंसे हिस्से की जद में आने से बच गया.
तेज आवाज और शोर सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामीण
जमीन धंसने की तेज आवाज और लोगों के शोर की सूचना मिलते ही बत्तीघर समेत आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे. देखते ही देखते घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुट गयी और इलाके में अफरातफरी मच गयी.
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घटना से नाराज ग्रामीणों ने ओबी डंपिंग को लेकर कोलियरी प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ विरोध जताया. इस दौरान प्रबंधन के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई. विरोध के बाद ग्रामीणों ने ओबी ट्रांसपोर्टिंग का काम रोक दिया.
जिस खतरे की आशंका जतायी, उसी क्षेत्र में धंसी जमीन
ग्रामीणों के अनुसार, महेशपुर कोलियरी के डिपिलरिंग क्षेत्र में पहले से ही जमीन की स्थिति को लेकर खतरा बना हुआ था. खदान के ऊपर होलेज और उत्पादन मार्ग के ऊपर ओबी डंप किये जाने से पिलरों पर अतिरिक्त भार पड़ने की आशंका जतायी जा रही थी.
मजदूरों, यूनियन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने इसको लेकर पहले भी विरोध किया था. ग्रामीणों का कहना है कि ओबी डंपिंग से खदान की सुरक्षा को लेकर उठाये जा रहे सवालों को गंभीरता से नहीं लिया गया. इस संबंध में पहले भी प्रभात खबर में खदान की सुरक्षा और ओबी डंपिंग से उत्पन्न संभावित खतरे को लेकर खबर प्रकाशित की गयी थी.
दो दिनों से बत्तीघर के समीप जारी थी ओबी डंपिंग
ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध के बावजूद पिछले दो दिनों से डिपिलरिंग क्षेत्र को हटाकर महेशपुर बत्तीघर के समीप ओबी डंपिंग जारी रखी गयी. सोमवार को इसी क्षेत्र में जमीन धंसने के बाद ओबी डंपिंग को लेकर पहले से जतायी जा रही आशंका और गंभीर हो गयी है.
360 मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल
एटक नेता रामचंद्र साव, जमसं नेता सुनील हाड़ी, बीसीकेयू नेता मो. तेजमुल और आजसू नेता राकेश ग्याली ने कहा कि महेशपुर कोलियरी में करीब 360 मजदूर कार्यरत हैं. आरोप लगाया कि मजदूरों की सुरक्षा को जोखिम में डालकर काम कराया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि सुरक्षित स्थान उपलब्ध नहीं होने के बावजूद खदान के ऊपर ओबी का पहाड़ खड़ा किया जा रहा है. इससे चालू खदान के पिलरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है.
आबादी के समीप ओबी डंपिंग से बढ़ा खतरा
यूनियन नेताओं ने कहा कि कई स्थानों पर डिपिलरिंग के बाद जमीन में दरार और धंसान की स्थिति बन रही है. इसके बावजूद ओबी डंपिंग जारी रखना गंभीर लापरवाही है. बत्तीघर के समीप आबादी और आवास भी हैं. ऐसे में भविष्य में बड़ी घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
सुरक्षित स्थान पर ओबी डंपिंग की मांग
ग्रामीणों और यूनियन नेताओं ने सुरक्षित स्थान चिह्नित कर ओबी डंपिंग कराने, धंसे क्षेत्र की तकनीकी जांच कराने और खतरे वाले स्थान पर तत्काल काम रोकने की मांग की है.
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ग्रामीणों का कहना है कि सोमवार की घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन भू-धंसान के समय बच्चे, महिलाएं या ट्रैक्टर कुछ और करीब होते तो स्थिति गंभीर हो सकती थी. घटना के बाद बत्तीघर और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल है.
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