भारत के स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र के लिए क्यों खास है क्रिटिकल मिनरल्स का पुनर्चक्रण? जानें केंद्रीय मंत्री की बड़ी बात
केंद्रीय एवं राज्य कोयला मंत्री
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण के महत्व पर प्रकाश डाला। यह भारत की स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा तैयारियों और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए क्यों आवश्यक है, जानें।
धनबाद. केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों का पुनर्चक्रण भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, रक्षा तैयारियों, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उन्नत विनिर्माण के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. उन्होंने उपयोग की अवधि पूरी कर चुके उत्पादों से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा देने और देश में पुनर्चक्रण क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया.
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श्री रेड्डी सोमवार को नयी दिल्ली के हयात रीजेंसी में खान मंत्रालय और मैटेरियल्स रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. संगोष्ठी का विषय ‘भारत का महत्वपूर्ण खनिज पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र और चक्रीय अर्थव्यवस्था’ था. उन्होंने सरकार, उद्योग, शोध संस्थानों और स्टार्टअप को मिलकर तकनीक आधारित और टिकाऊ पुनर्चक्रण व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया.
ई-कचरे को महत्वपूर्ण खनिजों के स्रोत के रूप में देखने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने नवीन तकनीक, उद्यमिता, जिम्मेदार ई-कचरा प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता की जरूरत बतायी. उन्होंने कहा कि ई-कचरा और उपयोग की अवधि पूरी कर चुके उत्पादों को केवल बेकार सामग्री नहीं माना जाना चाहिए. इनमें मौजूद महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति की जा सकती है. इसके लिए देश में आधुनिक पुनर्चक्रण क्षमता विकसित करने के साथ उद्योग, शोध संस्थानों और स्टार्टअप के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत है.

उन्होंने इस दिशा में जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया. उनका कहना था कि महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण को व्यापक अभियान से जोड़ने की जरूरत है, ताकि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सके और देश की आत्मनिर्भरता मजबूत हो.
गांव-गांव तक पहुंचे पुनर्चक्रण की जागरूकता
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण क्षमता बढ़ाना संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और आत्मनिर्भर चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है. उन्होंने जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन और ई-कचरे के पुनर्चक्रण को लेकर जागरूकता गांव-गांव तक पहुंचाने पर जोर दिया.

श्री दुबे ने कहा कि पुनर्चक्रण योग्य संसाधनों को औपचारिक पुनर्चक्रण व्यवस्था तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनभागीदारी जरूरी है. लोगों को ई-कचरे और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री के उचित संग्रहण और पुनर्चक्रण के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है.
लिथियम-आयन बैटरियों से धातु पुनर्प्राप्ति पर चर्चा
संगोष्ठी में महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण, ई-कचरा संग्रहण, लिथियम-आयन बैटरियों से धातुओं की पुनर्प्राप्ति, ब्लैक मास के प्रसंस्करण और निर्यात तथा अलौह धातुओं के पुनर्चक्रण पर तकनीकी सत्र आयोजित किये गये. विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता और उनके पुनर्चक्रण से जुड़ी तकनीकी एवं औद्योगिक संभावनाओं पर चर्चा की.
इस दौरान महत्वपूर्ण खनिज पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र पर अवधारणा पत्र भी जारी किया गया. संगोष्ठी में पुनर्चक्रण क्षेत्र को तकनीक, उद्योग और जनभागीदारी से मजबूत करने पर जोर दिया गया.
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