धनबाद में अवैध लॉटरी का नेटवर्क! मोबाइल पर बुकिंग, घर तक डिलीवरी; बरोरा में टिकट छपने का दावा
प्रतिकात्मक फोटो
धनबाद और कोलियरी क्षेत्रों में अवैध लॉटरी का कारोबार तेजी से फैल रहा है. व्हाट्सऐप बुकिंग और होम डिलीवरी के जरिए चल रहे इस नेटवर्क का पूरा सच जानें.
धनबाद. झारखंड में प्रतिबंध के बावजूद धनबाद के सीमावर्ती और कोलियरी इलाकों में अवैध लॉटरी कारोबार का नेटवर्क फैलने का दावा किया जा रहा है. मैथन से लेकर बरोरा तक इस नेटवर्क के सक्रिय होने की बात सामने आ रही है. सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल से कथित रूप से लॉटरी टिकट की सप्लाई, स्थानीय स्तर पर टिकटों की छपाई, कोडवर्ड में लेन-देन और व्हाट्सऐप के जरिये नंबरों की बुकिंग तक की व्यवस्था संचालित हो रही है.
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बताया जा रहा है कि यह कारोबार अब गुमटी और पान दुकानों तक सीमित नहीं है. एजेंटों और पेडलरों के जरिये ग्रामीण इलाकों से लेकर बाजारों तक टिकट पहुंचाने के साथ घर और दुकानों तक डिलीवरी की कथित व्यवस्था भी विकसित हो चुकी है.
सूत्रों के अनुसार, मैथन क्षेत्र में सक्रिय बताये जाने वाले दीपक ग्रुप से अलग बरोरा क्षेत्र में पप्पू नामक व्यक्ति के माध्यम से कोलियरी इलाकों में कथित रूप से अवैध लॉटरी का कारोबार संचालित किया जा रहा है. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
धनबाद के अलग-अलग इलाकों तक पहुंच रहा टिकट
पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे होने के कारण मैथन और आसपास का इलाका कथित लॉटरी नेटवर्क की अहम कड़ी बताया जा रहा है. सूत्रों का दावा है कि पश्चिम बंगाल से टिकट धनबाद के अलग-अलग इलाकों तक पहुंचाये जाते हैं.
नागालैंड और सिक्किम की लॉटरी के नाम पर भी टिकट बेचे जाने की चर्चा है. सूत्रों के अनुसार, छोटे पेडलरों से लेकर बड़े एजेंटों तक कई स्तर पर लोग इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं. ग्रामीण इलाकों में छोटी रकम से शुरू होने वाला यह कारोबार शहरों और कोलियरी क्षेत्रों तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है.
बंद क्वार्टर और फैक्ट्रियों में टिकट छापने का आरोप
इस कथित नेटवर्क का सबसे गंभीर पहलू स्थानीय स्तर पर लॉटरी टिकटों की छपाई बताया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, चिरकुंडा और मिहिजाम के बंद पड़े क्वार्टरों व फैक्ट्रियों के अलावा बरोरा क्षेत्र के सुनसान स्थानों का इस्तेमाल कथित तौर पर टिकट तैयार करने के लिए किया जा रहा है.

यदि जांच में यह दावा सही पाया जाता है, तो मामला केवल प्रतिबंधित लॉटरी की बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा. इससे स्थानीय स्तर पर टिकट तैयार करने वाले संगठित नेटवर्क की मौजूदगी का भी संकेत मिल सकता है.
कोडवर्ड में होता है लेन-देन
सूत्रों के अनुसार, नेटवर्क से जुड़े एजेंट और पेडलर टिकट, नंबर और रकम के लेन-देन के लिए कथित तौर पर कोडवर्ड का इस्तेमाल करते हैं. इसके जरिये कारोबार से जुड़ी जानकारी बाहरी लोगों से छिपाने और नेटवर्क के भीतर आपसी पहचान आसान रखने की कोशिश की जाती है.
जांच के दौरान इन कोडवर्ड और लेन-देन की कड़ी सामने आती है तो नेटवर्क से जुड़े एजेंटों और कथित संचालकों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है.
मोबाइल पर नंबर बुकिंग, घर तक पहुंच रहा टिकट
अवैध लॉटरी का कथित कारोबार अब मोबाइल और सोशल मीडिया तक पहुंचने की बात सामने आ रही है. सूत्रों के अनुसार, व्हाट्सऐप के जरिये नंबर बुक किये जाते हैं. ग्राहक से मोबाइल पर संपर्क करने के बाद एजेंट कथित तौर पर टिकट घर या दुकान तक पहुंचा देते हैं.
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यानी ग्राहक को टिकट खरीदने के लिए किसी गुमटी या दुकान तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती. मोबाइल पर बुकिंग और एजेंट के जरिये डिलीवरी की व्यवस्था ने इस कथित कारोबार को और आसान बना दिया है.
जांच के दायरे में कई सवाल
प्रतिबंध के बावजूद यदि धनबाद के अलग-अलग इलाकों में इस तरह का नेटवर्क संचालित हो रहा है, तो इसके पीछे कौन लोग हैं और इसे स्थानीय स्तर पर किसका संरक्षण प्राप्त है, यह बड़ा सवाल है.
क्या बरोरा समेत अन्य इलाकों में वास्तव में अवैध लॉटरी टिकटों की छपाई हो रही है. यदि ऐसा है तो इन कथित ठिकानों तक पुलिस और प्रशासन की नजर क्यों नहीं पहुंची. टिकटों की सप्लाई, मोबाइल बुकिंग और डिलीवरी से जुड़े नेटवर्क की जांच होने पर ही इन सवालों के जवाब सामने आ सकेंगे.
फिलहाल सामने आये दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही अवैध लॉटरी के इस कथित नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी.
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