IIT ISM के पूर्व छात्र ने बनाया स्वदेशी ड्रोन, 14 हजार फीट पर 78 मिनट भरी उड़ान
IIT (ISM) के पूर्व छात्र सौरव सिंह
IIT (ISM) धनबाद के पूर्व छात्र सौरव सिंह और उनकी टीम ने विजय Z-1 नाम का स्वदेशी ड्रोन तैयार किया है. यह ड्रोन भारतीय सेना के हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल में अरुणाचल प्रदेश में 14 हजार फीट की ऊंचाई पर 1 घंटे 18 मिनट तक उड़ा. यह ड्रोन कठिन मौसम और ऊंचाई वाले इलाकों के लिए खास तौर पर विकसित किया गया है.
धनबाद. IIT (ISM) धनबाद के पूर्व छात्र सौरव सिंह और उनके को-फाउंडर ने स्वदेशी ड्रोन तैयार कर तकनीकी क्षेत्र में उपलब्धि हासिल की है. उनके स्टार्टअप का ड्रोन विजय Z-1 भारतीय सेना के हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल के दौरान अरुणाचल प्रदेश में 14 हजार फीट की ऊंचाई पर 1 घंटे 18 मिनट 26 सेकेंड तक उड़ा. भारतीय सेना ने इस ऊंचाई पर लगातार 45 मिनट उड़ान का लक्ष्य दिया था, जिसे ड्रोन ने निर्धारित समय से काफी अधिक उड़ान भरकर पूरा किया.

सौरव सिंह IIT (ISM) के 2020 बैच के छात्र रहे हैं. उन्होंने 2022 में माइनिंग इंजीनियरिंग में एमटेक पूरा किया. वह जेनिथ अनमैंड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के को-फाउंडर हैं. वर्ष 2025 में शुरू हुआ यह स्टार्टअप सेंटर ऑफ इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (CIIE), IIT (ISM) धनबाद में इनक्यूबेटेड है.
कठिन मौसम और ऊंचाई वाले इलाकों के लिए तैयार किया गया ड्रोन
विजय Z-1 एक UAV यानी अनमैन्ड एरियल व्हीकल है. यह हाई-एंड्योरेंस और ऑल-वेदर क्वाडकॉप्टर है, जिसे कठिन मौसम और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निगरानी समेत विभिन्न कार्यों के लिए विकसित किया गया है.
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ड्रोन पर काम अगस्त 2025 में शुरू हुआ था. इसी महीने तैयार पहले प्रोटोटाइप ने 100 मिनट से अधिक की उड़ान भरी थी. टीम अब तक पांच प्रोटोटाइप तैयार कर चुकी है. जून 2026 में तैयार छठा और नवीनतम वर्जन फाइनल वर्जन है, जिसमें 85 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी कंटेंट है.
ड्रोन का कार्बन-फाइबर फ्रेम भी टीम ने खुद डिजाइन और विकसित किया है. इसके अलावा 1000 घंटे से अधिक ग्राउंड टेस्टिंग और क्रैश टेस्टिंग की जा चुकी है.
14 हजार फीट पर 1 घंटे 18 मिनट की उड़ान
विजय Z-1 ने सामान्य ऊंचाई पर 2 घंटे 22 मिनट की उड़ान का प्रदर्शन किया है. वहीं 12 हजार फीट की ऊंचाई पर इसने 1 घंटे 20 मिनट 33 सेकेंड और 14 हजार फीट पर 1 घंटे 18 मिनट 26 सेकेंड तक उड़ान भरी.
ड्रोन की ऑपरेशनल ऊंचाई 4200 मीटर, रेंज 40 किलोमीटर और पेलोड क्षमता 500 ग्राम तक है. इसे जरूरत के अनुसार 1.2 किलोग्राम तक बढ़ाया जा सकता है. इसका वजन करीब 2.7 किलोग्राम है और यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम पर काम करता है.
बारिश और कोहरे के बीच सेना ने किया ट्रायल
भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड ने 3 और 4 अगस्त 2026 को अरुणाचल प्रदेश में हाई-एल्टीट्यूड बेस कैंप और सेला टॉप के ऊपर विजय Z-1 का ट्रायल किया. ट्रायल के दौरान बारिश और कोहरे जैसी परिस्थितियों के बावजूद ड्रोन ने प्रदर्शन किया.
ट्रायल के बाद कंपनी को भारतीय सेना की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. सेना की ओर से ड्रोन को जल्द शामिल किये जाने में रुचि दिखाई गयी है. सितंबर 2026 में विजय Z-1 का प्रोक्योरमेंट-लेवल वैलिडेशन टेस्टिंग चरण चल रहा है.
'आत्मनिर्भर भारत के लिए डिफेंस टेक्नोलॉजी जरूरी'
सौरव सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत उन तकनीकों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकता, जो देश की संप्रभुता और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी हैं. डिफेंस टेक्नोलॉजी इस विजन को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
वहीं, IIT (ISM) के डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस प्रो. आलोक दास ने कहा कि विजय Z-1 इस बात का उदाहरण है कि पूर्व छात्रों के आइडिया किस तरह उपयोगी तकनीक में बदल सकते हैं. यह IIT (ISM) के इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम की क्षमता को भी दर्शाता है.
हर माह 90 ड्रोन बनाने की क्षमता
जेनिथ अनमैंड सिस्टम्स फिलहाल बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप है. कंपनी की हर माह करीब 90 ड्रोन बनाने की क्षमता है. कंपनी ड्रोन की दूसरी सीरीज और हाइब्रिड प्रोपल्शन सिस्टम पर भी काम कर रही है.
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इसके अलावा 50 मिनट से अधिक फ्लाइट टाइम वाला कॉम्पैक्ट ट्रेनिंग ड्रोन भी कमर्शियलाइजेशन के लिए तैयार है.
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