SNMMCH के रिटायर्ड प्रोफेसर की पेंशन कटौती का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द, 16 सप्ताह में दोबारा जांच का निर्देश
झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो.
झारखंड हाईकोर्ट ने शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर की पेंशन में 10 वर्षों तक 15% कटौती के सरकारी आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने विभागीय जांच प्रक्रिया में खामियां पाईं और मामले को फिर से सुनवाई के लिए भेजा है. विभाग को 16 सप्ताह के भीतर इस पर अंतिम निर्णय लेना होगा, अन्यथा प्रोफेसर को पेंशन का पूरा लाभ मिलेगा.
धनबाद. शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच), पूर्व पीएमसीएच, धनबाद के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ हरिवंश कुमार सिंह की पेंशन में 10 वर्षों तक 15 प्रतिशत कटौती करने के सरकार के आदेश को झारखंड हाइकोर्ट ने रद्द कर दिया है. यह मामला उनकी सेवानिवृत्ति के बाद शुरू की गयी विभागीय कार्रवाई से जुड़ा था. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने विभागीय जांच की प्रक्रिया में खामी पाते हुए मामले को दोबारा अनुशासनिक प्राधिकारी के पास भेज दिया. कोर्ट ने विभाग को गवाहों की जांच के चरण से कार्रवाई आगे बढ़ाने और 16 सप्ताह के भीतर अंतिम आदेश पारित करने का निर्देश दिया है.
सेवानिवृत्ति के बाद शुरू हुई थी विभागीय कार्रवाई
डॉ हरिवंश कुमार सिंह एसएनएमएमसीएच के पीएसएम विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे और वर्ष 2021 में सेवानिवृत्त हुए थे. सेवानिवृत्ति के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गयी. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव ने 22 सितंबर 2022 को आदेश जारी कर उनकी पेंशन में 10 वर्षों तक 15 प्रतिशत कटौती की सजा दी थी.
इस आदेश को चुनौती देते हुए डॉ सिंह ने झारखंड हाइकोर्ट में याचिका दायर की. याचिका में विभागीय जांच की प्रक्रिया और जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाये गये थे.
गवाहों की जांच नहीं होने पर अदालत ने जतायी आपत्ति
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि विभागीय जांच के दौरान आरोपों और उनसे संबंधित दस्तावेजों को साबित करने के लिए किसी मौखिक गवाह की जांच नहीं की गयी. उनका कहना था कि केवल दस्तावेजों के आधार पर आरोपों को साबित मान लिया गया, जबकि दस्तावेजों को विधिवत साबित करने के लिए गवाहों की जांच की प्रक्रिया आवश्यक थी.
अदालत ने चार्जशीट और जांच रिपोर्ट का अवलोकन किया. इसमें पाया गया कि चार्जशीट में जिन दस्तावेजों का उल्लेख किया गया था, उन्हें साबित करने के लिए किसी गवाह से पूछताछ नहीं की गयी. कोर्ट ने इसे विभागीय जांच की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कमी माना.
22 सितंबर 2022 का सजा आदेश रद्द
हाइकोर्ट ने विभागीय जांच में पायी गयी खामी के आधार पर 22 सितंबर 2022 के सजा संबंधी आदेश को रद्द कर दिया. इसके साथ ही मामले को अनुशासनिक प्राधिकारी के पास वापस भेज दिया गया है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि विभाग गवाहों की जांच के स्तर से विभागीय कार्रवाई को दोबारा आगे बढ़ाये.
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि दूसरे कारण बताओ नोटिस में उनकी पेंशन में 50 प्रतिशत कटौती प्रस्तावित की गयी थी, जबकि अंतिम आदेश में 15 प्रतिशत कटौती की सजा दी गयी. हालांकि, अदालत के फैसले का मुख्य आधार विभागीय जांच में गवाहों की जांच नहीं किये जाने से जुड़ी प्रक्रिया संबंधी कमी रही.
16 सप्ताह में अंतिम आदेश नहीं तो पेंशन लाभ
हाइकोर्ट ने अनुशासनिक प्राधिकारी को गवाहों की जांच समेत निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर 16 सप्ताह के भीतर अंतिम आदेश पारित करने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाता है, तो सजा के कारण अब तक रोकी गयी पेंशन की पूरी राशि का लाभ डॉ सिंह को देना होगा.
अदालत ने याचिका को आंशिक रूप से मंजूर करते हुए विभाग को कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. इस फैसले से फिलहाल 2022 में जारी पेंशन कटौती का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा, जबकि विभाग को नयी प्रक्रिया के बाद मामले में अंतिम निर्णय लेना होगा.
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