वैश्विक बदलाव के बीच भारत को बढ़ानी होगी स्टील उत्पादन क्षमता : प्रिया रंजन

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ग्लोबल स्टील इंडस्ट्री में बदलाव और तकनीक की भूमिका पर आइआइटी आइएसएम में चर्चा | Prabhat Khabar Network

वैश्विक स्टील इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों के बीच, भारत को अपनी स्टील उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है. सेल बोकारो के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रिया रंजन ने घरेलू मांग पूरी करने के लिए तकनीकी प्रगति और कुशल प्रबंधन पर जोर दिया.

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ग्लोबल स्टील इंडस्ट्री में हो रहे बदलाव, भारत में बढ़ती स्टील की मांग, उत्पादन क्षमता विस्तार और तकनीक की भूमिका को लेकर शनिवार को आइआइटी आइएसएम धनबाद में विशेष सत्र का आयोजन किया गया. कार्यक्रम सेंटेनरी डिस्टिंग्विश्ड स्पीकर सीरीज के तहत डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग की ओर से आयोजित हुआ. सेल बोकारो के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रिया रंजन ने ग्लोबल स्टील इंडस्ट्री सिनेरियो : टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट एंड क्रिटिकल बिजनेस प्रैक्टिसेज विषय पर व्याख्यान दिया.

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घरेलू मांग पूरी करने के लिए क्षमता विस्तार जरूरी

प्रिया रंजन ने कहा कि भारत में स्टील की घरेलू मांग लगातार बढ़ रही है. इसे पूरा करने के लिए देश को स्टील उत्पादन के साथ औद्योगिक क्षमता का भी लगातार विस्तार करना होगा. उन्होंने वैश्विक स्टील उद्योग में बदलते परिदृश्य और उत्पादन क्षेत्र में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की.

चीन के उत्पादन और ट्रेड पॉलिसी से बढ़ी प्रतिस्पर्धा

उन्होंने कहा कि चीन में बड़े पैमाने पर स्टील उत्पादन और वैश्विक ट्रेड पॉलिसी में हो रहे बदलावों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. ऐसे माहौल में भारतीय स्टील उद्योग को तकनीकी दक्षता, बेहतर प्रबंधन और लागत नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.

वैश्विक तनाव से बढ़ती है उत्पादन लागत

प्रिया रंजन ने कहा कि वैश्विक तनाव और प्रमुख समुद्री मार्गों में व्यवधान का सीधा असर स्टील उद्योग पर पड़ता है. इससे कच्चे माल की उपलब्धता, परिवहन और इंश्योरेंस की लागत बढ़ जाती है, जिसका प्रभाव स्टील उत्पादन की कुल लागत पर पड़ता है. ऐसी परिस्थितियों में बेहतर प्लानिंग और संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन बेहद जरूरी है.

तकनीक और प्रबंधन की अहम भूमिका

व्याख्यान के दौरान स्टील उद्योग में तकनीकी बदलाव, उत्पादन क्षमता, प्रबंधन रणनीति और महत्वपूर्ण व्यावसायिक प्रक्रियाओं पर भी चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने बदलते वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और संसाधनों के कुशल प्रबंधन को महत्वपूर्ण बताया.

मौके पर प्रो. धीरज कुमार, प्रो. रश्मि सिंह, प्रो. विभास चंद्र और प्रो. नीलाद्रि दास समेत अन्य फैकल्टी सदस्य मौजूद थे.


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