नियोजन की मांग को लेकर विवाद, सीएमडी समेत दो पर प्राथमिकी; अपमान और धमकी देने का आरोप

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बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल

धनबाद में बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल और उनके पीए के खिलाफ नियोजन की मांग पर अपमान और धमकी देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

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बोकारो जिले के दुग्धा थाना क्षेत्र के बुढ़ीडीह निवासी सचिन हेंब्रम ने नियोजन की मांग को लेकर बीसीसीएल के सीएमडी कार्यालय में कथित तौर पर अपमानित करने, जातिसूचक टिप्पणी, गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाया है.

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मामले में उन्होंने न्यायालय में परिवाद दाखिल कर बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल और उनके निजी सहायक को अभियुक्त बनाया है. परिवाद के आधार पर शुक्रवार की शाम सरायढेला थाने में दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी.

अनुकंपा पर नियोजन के लिए किया आवेदन

परिवादी सचिन हेंब्रम ( पिता स्व दशरथ मांझी) ने आरोप लगाया है कि उनके पिता मधुबन वाशरी ब्लॉक-2, बीसीसीएल में ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे. पांच मार्च 2010 को पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने अनुकंपा के आधार पर नियोजन के लिए आवेदन दिया. उनका कहना है कि आवेदन बीसीसीएल प्रबंधन के माध्यम से कोयला भवन स्थित सीएमडी कार्यालय भेजा गया था.

प्रार्थी सचिन के अनुसार, 17 जून 2026 को वह कोयला भवन पहुंचे थे. उनका आरोप है कि आवेदन के बाद सीएमडी के आदेश व कथित उकसावे पर उन्हें कार्यालय कक्ष से अपमानित कर बाहर कर दिया गया. परिवादी का दावा है कि घटना को वहां मौजूद कई महिला-पुरुषों तथा उनके साथ गये गवाहों ने देखा और सुना.

गाली-गलौज व धमकी देने का आरोप

सचिन के अनुसार, 18 जून को वह दोबारा नियोजन के संबंध में सीएमडी कार्यालय पहुंचे. नियोजन की मांग करने पर सीएमडी कथित रूप से भड़क गये और उन्हें ‘मांझी’ कहकर अपमानित करने के साथ गाली-गलौज की.

आरोप है कि सीएमडी के निजी सहायक ने उन्हें कार्यालय से बाहर निकालते हुए नौकरी नहीं मिलने और दोबारा कार्यालय आने पर जान का खतरा होने की कथित धमकी दी. परिवादी ने इससे मानसिक एवं शारीरिक रूप से आहत होने की बात कही है.

कई जगह फरियाद के बाद कोर्ट पहुंचे तो हुई थाने में प्राथमिकी

परिवादी का कहना है कि उन्होंने स्थानीय थाने को मामले की मौखिक जानकारी दी थी. इसके अलावा धनबाद के उपायुक्त, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नयी दिल्ली तथा केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री को भी आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की. कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने न्यायालय में परिवाद दाखिल किया. इसी के आधार पर सरायढेला थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी है.


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