जिला परिषद की विशेष बैठक में सदस्यों का फूटा गुस्सा, बोले- बिना बोर्ड की मंजूरी से हो रहे काम
जिला परिषद की विशेष बोर्ड बैठक में शामिल सदस्यों की फोटो
धनबाद जिला परिषद की बैठक में सदस्यों ने अधिकारियों पर लापरवाही और कमीशनखोरी का आरोप लगाया. योजनाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर जमकर हंगामा हुआ.
धनबाद. जिला परिषद की शनिवार को हुई विशेष बोर्ड बैठक में सदस्यों की नाराजगी खुलकर सामने आयी. सदस्यों ने जिला परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लापरवाही बरतने और जनप्रतिनिधियों की बातों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. बिना बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव लाये योजनाओं को स्वीकृत करने और उनका क्रियान्वयन किये जाने का मुद्दा भी बैठक में जोरदार तरीके से उठा.

सदस्यों ने कहा कि जिला परिषद में उनकी भूमिका केवल बैठक में शामिल होने तक सीमित होकर रह गयी है. जनता से जुड़े कई काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं. उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली में सुधार के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की मांग की.
शनिवार को जिला परिषद सभागार में आयोजित बैठक में अध्यक्ष शारदा सिंह, उपाध्यक्ष सरिता देवी, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह उपविकास आयुक्त सन्नी राज समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी और जिला परिषद सदस्य मौजूद थे.
ये भी पढ़ें: झरिया के अधिवक्ता जावेद को निशाना बनाने की थी तैयारी, भूली में कट्टा-कारतूस के साथ युवक गिरफ्तार
अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल
सदस्य सोहराब अंसारी ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जिला परिषद में जनता की जरूरतों से अधिक कमीशन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है. उन्होंने कहा कि सदस्यों द्वारा उठाये गये सवालों का अधिकारियों के पास संतोषजनक जवाब तक नहीं रहता.
उन्होंने वर्ष 2022-23 में स्वीकृत जलमीनार का मामला उठाते हुए कहा कि अब तक इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
निजी जमीन पर ट्रांसफार्मर लगाने का मामला उठा
सोहराब अंसारी ने गोविंदपुर में ग्रामीणों की सहमति के बिना निजी जमीन पर ट्रांसफार्मर लगाये जाने का मामला भी उठाया. उन्होंने बिजली विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पैसे देने वालों के काम को प्राथमिकता मिलती है, जबकि गरीब लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता.
उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों की बात ही नहीं सुनी जायेगी और जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तो जिला परिषद सदस्य बने रहने का औचित्य क्या है.
'मजाक बनकर रह गया है जिला परिषद'
सदस्य विकास कुमार महतो ने कहा कि जिला परिषद में कई ऐसे कार्य किये जा रहे हैं, जिनकी जानकारी या चर्चा बोर्ड की बैठक में नहीं होती. उन्होंने रामाकुंडा सीएससी सेंटर का उदाहरण देते हुए कहा कि अब तक इसकी जांच नहीं की गयी है.
उन्होंने कहा कि जब सदस्यों की बात ही नहीं सुनी जाती, तो उन्हें जनता के बीच जवाब देना मुश्किल हो जाता है. महतो ने कहा कि जिला परिषद में काम कराने के लिए यदि सदस्यों को कोर्ट का सहारा लेना पड़े या धरना-प्रदर्शन करना पड़े, तो यह जिला परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करेगा.
उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में सदस्यों को दिग्भ्रमित किया जाता है. साथ ही कहा कि यदि 16वें वित्त आयोग से जुड़ा मामला नहीं होता, तो शायद यह विशेष बोर्ड बैठक भी आयोजित नहीं होती.
ये भी पढ़ें: नेशनल लोक अदालत में 15.67 अरब के विवादों का निबटारा, 1.66 अरब की परिसंपत्तियों व नियुक्ति पत्र का वितरण
पारदर्शिता के साथ काम कराने की मांग
बैठक में सदस्यों ने अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली में सुधार की मांग की. सदस्यों का कहना था कि योजनाओं की स्वीकृति और क्रियान्वयन में बोर्ड को जानकारी दी जानी चाहिए तथा जनप्रतिनिधियों को उनकी जिम्मेदारी के अनुरूप भूमिका मिलनी चाहिए.
बैठक में सदस्यों ने जनता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बरतने पर जोर दिया.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए