4.25 करोड़ रु का श्रम उपकर बकाया, बीसीसीएल समेत 180 संवेदकों को नोटिस
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धनबाद में श्रम विभाग ने बीसीसीएल से जुड़े 180 संवेदकों पर बकाया 4.25 करोड़ रुपये के श्रम उपकर की वसूली तेज कर दी है. बकाया राशि का भुगतान न करने पर कंपनियों के खिलाफ सर्टिफिकेट केस दर्ज किया जाएगा. यह उपकर निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है.
निर्माण कार्यों पर देय श्रम उपकर की वसूली को लेकर धनबाद में श्रम विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है. बीसीसीएल से जुड़े 180 संवेदक कंपनियों पर करीब 4.25 करोड़ रुपये का श्रम उपकर बकाया बताया गया है. विभाग ने बकायेदारों को रिमाइंडर नोटिस जारी कर निर्धारित समय सीमा में राशि जमा करने का निर्देश दिया है. नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं होने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ सर्टिफिकेट केस दर्ज कर बकाया राशि की वसूली की जायेगी.
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180 संवेदकों पर 4.25 करोड़ रुपये बकाया
विभागीय जांच और निर्माण कार्यों के ऑडिट में सामने आये आंकड़ों के अनुसार 180 संवेदकों पर कुल 4.25 करोड़ रुपये की देनदारी है. औसत के आधार पर देखें तो प्रत्येक संवेदक पर करीब 2.36 लाख रुपये बकाया बनता है. हालांकि वास्तविक देनदारी अलग-अलग निर्माण कार्यों की लागत और संबंधित कंपनी द्वारा किये गये काम के आधार पर अलग है.
विभाग के अनुसार पहले चरण में 180 में से 50 संवेदकों को नोटिस जारी किया गया था. अब शेष बकायेदारों को भी नोटिस भेजकर राशि जमा कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जा रही है.
भवन, सड़क और क्वार्टर निर्माण से जुड़ा है बकाया
बीसीसीएल की ओर से विभिन्न संवेदकों को भवन, सड़क, क्वार्टर और अन्य निर्माण कार्यों के ठेके दिये गये थे. इन कार्यों के रिकॉर्ड और ऑडिट के आधार पर देय श्रम उपकर की गणना की गयी है. नियम के अनुसार निर्माण लागत का एक प्रतिशत श्रम उपकर के रूप में जमा किया जाना है.
भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए संसाधन जुटाना है. उपकर से प्राप्त राशि संबंधित कल्याण बोर्ड के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित योजनाओं में इस्तेमाल की जाती है.
भुगतान नहीं किया तो बढ़ेगी देनदारी
श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस के बाद भी बकाया राशि जमा नहीं करने पर सर्टिफिकेट केस की कार्रवाई की जायेगी. उपलब्ध प्रावधान के अनुसार निर्धारित समय पर उपकर का भुगतान नहीं होने पर बकाया राशि पर प्रति माह दो प्रतिशत ब्याज देय हो सकता है. यानी 4.25 करोड़ रुपये की पूरी बकाया राशि पर एक महीने की देरी में करीब 8.50 लाख रुपये अतिरिक्त ब्याज बन सकता है, यदि पूरी राशि पर ब्याज लागू होता है.
पहले भी हो चुकी है कानूनी कार्रवाई
धनबाद में श्रम उपकर की वसूली को लेकर विभाग पहले भी सर्टिफिकेट केस दर्ज करा चुका है. अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी में बीसीसीएल और दो संवेदक कंपनियों के खिलाफ करीब 4.5 करोड़ रुपये की बकाया राशि की वसूली के लिए सर्टिफिकेट केस दर्ज कराया गया था. इससे संकेत मिलता है कि विभाग अब केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बकाया राशि की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रहा है.
श्रमिक कल्याण योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है उपकर
श्रम उपकर से मिलने वाली राशि झारखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के कल्याण पर खर्च की जाती है. ऐसे में बड़ी राशि का बकाया रहने से कल्याण योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों पर असर पड़ सकता है. विभाग निर्माण कार्यों के रिकॉर्ड, स्वीकृत लागत और उपकर भुगतान की जांच कर बकायेदारों की पहचान कर रहा है. उपकर जमा करने के लिए श्रम विभाग की ओर से ऑनलाइन व्यवस्था भी उपलब्ध करायी गयी है.
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